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डिजिटल क्रांति की ओर देहरादून: जिलाधिकारी सविन बंसल की ‘प्रोजेक्ट उत्कर्ष’ पहल से सरकारी स्कूलों को मिली नई रफ्तार

देहरादून, 07 फरवरी 2026: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में शिक्षा के आधुनिकीकरण और तकनीक-सक्षम शिक्षण वातावरण विकसित करने की दिशा में जिला प्रशासन ने एक बड़ी छलांग लगाई है। माननीय मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन और जिलाधिकारी सविन बंसल के दूरदर्शी नेतृत्व में जनपद के राजकीय माध्यमिक विद्यालयों को स्मार्ट क्लासरूम में तब्दील करने की ऐतिहासिक शुरुआत हो गई है। ‘प्रोजेक्ट उत्कर्ष’ के तहत जिला प्रशासन ने निजी और सरकारी स्कूलों के बीच की डिजिटल खाई को पाटने के लिए ठोस कदम उठाए हैं।

प्रोजेक्ट उत्कर्ष: हर कक्षा में अब होगी स्मार्ट तकनीक

शिक्षा के क्षेत्र में यह आधुनिकीकरण का एक ऐसा मॉडल है, जो आने वाले समय में पूरे प्रदेश के लिए नजीर बनेगा। जिलाधिकारी सविन बंसल के व्यक्तिगत निर्देशन में जनपद के 168 राजकीय माध्यमिक विद्यालयों के लिए 884 स्मार्ट टीवी की स्थापना हेतु वर्क ऑर्डर जारी कर दिया गया है। इस परियोजना पर कुल 3.67 करोड़ रुपये की लागत आएगी, जिसका प्रावधान विशेष रूप से ‘जिला खनन न्यास’ (District Mineral Foundation) से किया गया है।

इस पहल का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि संसाधनों के अभाव में सरकारी स्कूल का कोई भी बच्चा आधुनिक शिक्षा से वंचित न रहे। जिलाधिकारी का विजन स्पष्ट है—तकनीक केवल खास वर्ग तक सीमित न रहे, बल्कि यह समाज के अंतिम छोर पर खड़े छात्र तक भी पहुंचे।


निवेश और बुनियादी ढांचा: फर्नीचर से लेकर स्मार्ट स्क्रीन तक

देहरादून जिला प्रशासन केवल डिजिटल उपकरणों तक ही सीमित नहीं रहा है, बल्कि स्कूलों के बुनियादी ढांचे को भी पूरी तरह से बदल दिया गया है।

  • फर्नीचर युक्त विद्यालय: इससे पूर्व जिला प्रशासन ने लगभग 5 करोड़ रुपये के सीएसआर (CSR) फंड का उपयोग कर जिले के सभी सरकारी स्कूलों को आधुनिक फर्नीचर से सुसज्जित किया था।

  • स्मार्ट टीवी का वितरण: वर्तमान योजना के तहत स्कूलों में दो अलग-अलग आकारों के स्मार्ट टीवी लगाए जा रहे हैं। छोटे और मध्यम कमरों के लिए 43 इंच और बड़े कक्षा-कक्षों के लिए 55 इंच के हाई-डेफिनिशन स्मार्ट टीवी का चयन किया गया है।


पारदर्शी चयन प्रक्रिया: जैम पोर्टल के जरिए हुआ फर्म का चयन

इस महत्त्वपूर्ण परियोजना में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए पूरी खरीद प्रक्रिया ‘जैम’ (GeM) पोर्टल के माध्यम से ई-टेंडर प्रणाली द्वारा संपन्न की गई।

  1. प्रतिस्पर्धा: निविदा प्रक्रिया में देश भर की कुल 12 प्रतिष्ठित फर्मों ने हिस्सा लिया।

  2. टेंडर समिति: मुख्य विकास अधिकारी (CDO) की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया गया, जिसमें NIC, कोषागार और तकनीकी विभागों के विशेषज्ञ शामिल थे।

  3. मानक: तकनीकी और वित्तीय मूल्यांकन के बाद न्यूनतम दर वाली पात्र फर्म को कार्यादेश (Work Order) निर्गत किया गया है।


कैसे बदलेगा शिक्षण का अनुभव?

स्मार्ट टीवी की स्थापना केवल एक उपकरण मात्र नहीं है, बल्कि यह सीखने-सिखाने की पूरी प्रक्रिया को बदलने वाला कदम है। इसके माध्यम से शिक्षक अब:

  • दिक्षा (DIKSHA) पोर्टल और पीएम ई-विद्या जैसे राष्ट्रीय प्लेटफार्मों का सीधे उपयोग कर सकेंगे।

  • ऑडियो-वीडियो कंटेंट और ई-लर्निंग मॉड्यूल्स के जरिए कठिन विषयों को रोचक ढंग से समझा सकेंगे।

  • वर्चुअल कक्षाओं के माध्यम से छात्र विशेषज्ञों से जुड़ सकेंगे, जिससे उनकी अवधारणात्मक समझ (Conceptual Understanding) में उल्लेखनीय सुधार होगा।

यह कदम राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के उन उद्देश्यों को भी पूरा करता है, जो तकनीक-आधारित और इंटरएक्टिव लर्निंग पर जोर देते हैं।


जिलाधिकारी का संदेश: “शिक्षा ही भविष्य की नींव है”

परियोजना के बारे में जानकारी देते हुए जिलाधिकारी सविन बंसल ने कहा, “प्रशासन विद्यार्थियों को आधुनिक संसाधनों से जोड़ने के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है। सरकारी विद्यालयों में डिजिटल अंतर को खत्म करना हमारी प्राथमिकता है। स्मार्ट टीवी की स्थापना से न केवल शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ेगी, बल्कि विद्यार्थियों में प्रतिस्पर्धात्मक भावना का भी विकास होगा।”

उन्होंने संबंधित विभागों को निर्देश दिए हैं कि आपूर्ति और स्थापना का कार्य निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूर्ण किया जाए ताकि नए सत्र तक सभी छात्र इस डिजिटल सुविधा का लाभ उठा सकें।


उत्तराखंड के लिए एक नया ‘दून मॉडल’

देहरादून जिला प्रशासन की यह पहल राज्य के अन्य जनपदों के लिए एक प्रेरणा है। जिला खनन निधि और सीएसआर फंड का सही दिशा में उपयोग कैसे किया जा सकता है, सविन बंसल ने इसका एक उत्कृष्ट उदाहरण पेश किया है। स्मार्ट टीवी, डिजिटल कंटेंट और बेहतर फर्नीचर के साथ अब देहरादून के सरकारी स्कूल निजी स्कूलों को कड़ी टक्कर देने के लिए तैयार हैं।

यह वास्तव में एक ‘डिजिटल क्रांति’ है जो आने वाली पीढ़ी को सशक्त बनाने और उत्तराखंड को शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी।

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