देहरादून: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से साइबर अपराध का एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने निवेश के नाम पर होने वाले बड़े खेल की पोल खोल दी है। राजपुर रोड निवासी एक गृहिणी को अधिक मुनाफे का झांसा देकर साइबर ठगों ने ₹69 लाख का चूना लगा दिया। चौंकाने वाली बात यह है कि पीड़िता ने न केवल अपनी और अपने पति की जमा-पूंजी गंवाई, बल्कि भारी-भरकम लोन और कर्ज लेकर भी ठगों के खातों में रकम ट्रांसफर कर दी।
एसएसपी एसटीएफ (SSP STF) अजय सिंह ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच के आदेश दिए हैं। पुलिस अब उन बैंक खातों की कुंडली खंगाल रही है, जिनमें यह बड़ी रकम भेजी गई है।
फेसबुक विज्ञापन से बुना गया जाल
ठगी की यह स्क्रिप्ट 10 फरवरी को शुरू हुई, जब पीड़िता ने फेसबुक ब्राउज़ करते समय ‘आनंद राठी शेयर्स एंड स्टॉक ब्रोकर्स लिमिटेड’ के नाम से मिलता-जुलता एक आकर्षक निवेश विज्ञापन देखा। विज्ञापन में दावा किया गया था कि स्टॉक मार्केट में निवेश कर बहुत कम समय में मोटा मुनाफा कमाया जा सकता है।
पीड़िता ने जैसे ही विज्ञापन के लिंक पर क्लिक किया, उनका संपर्क कावेरी मल्होत्रा नाम की एक महिला से हुआ। कावेरी ने खुद को इन्वेस्टमेंट एक्सपर्ट बताते हुए पीड़िता को विश्वास में लिया और निवेश के लिए एक ऑनलाइन फॉर्म भरवाया। इसके बाद पीड़िता को एक व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़ा गया, जहां कथित तौर पर निवेश की टिप्स साझा की जाती थीं।
फर्जी डैशबोर्ड और भरोसे का खेल
साइबर ठगों ने पीड़िता को फंसाने के लिए एक फर्जी आईडी और पासवर्ड दिया, जिसे ‘एआर ऑफिशियल’ पेज पर लॉगिन करना था। 17 फरवरी को पीड़िता ने पहली बार ₹50 हजार का निवेश किया। जैसे ही यह रकम उनके ऑनलाइन डैशबोर्ड पर मुनाफे के साथ बढ़ती हुई दिखाई देने लगी, पीड़िता का भरोसा ठगों पर पक्का हो गया।
यहीं से ठगों ने अपना असली खेल शुरू किया। कावेरी मल्होत्रा ने पीड़िता को लालच दिया कि यदि वह बड़ी धनराशि निवेश करती है, तो उसे ‘वीआईपी कोटा’ के तहत असाधारण रिटर्न मिलेगा।
लोन और कर्ज लेकर लुटा दी जीवन भर की कमाई
मुनाफे के मायाजाल में फंसी महिला ने 25 मार्च तक अपने बैंक खाते और आईटी सेक्टर में कार्यरत अपने पति के खातों से पैसे निकालने शुरू कर दिए। जब बचत खत्म हो गई, तो ठगों के दबाव में आकर उन्होंने विभिन्न माध्यमों से लोन लिया और रिश्तेदारों से कर्ज भी लिया। कुल मिलाकर ₹69 लाख की भारी-भरकम राशि ठगों द्वारा बताए गए अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर कर दी गई।
जब खुली पोल: सिक्योरिटी के नाम पर मांगे ₹50 लाख
ठगी का खुलासा तब हुआ जब पीड़िता ने अपनी जरूरत के लिए निवेश की गई रकम में से कुछ हिस्सा निकालने का प्रयास किया। जैसे ही उन्होंने ‘विड्रॉल’ (Withdrawal) के लिए आवेदन किया, कथित कंपनी की ओर से उन्हें मैसेज मिला कि उनके फंड को निकालने के लिए ₹50 लाख की ‘सिक्योरिटी धनराशि’ जमा करनी होगी।
तभी पीड़िता को एहसास हुआ कि वे एक संगठित साइबर गिरोह के चंगुल में फंस चुकी हैं। उन्होंने तुरंत साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में इसकी शिकायत दर्ज कराई।
एसटीएफ की सख्त चेतावनी: विज्ञापन देख न करें भरोसा
एसएसपी एसटीएफ अजय सिंह ने बताया कि पीड़िता की शिकायत पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और पुलिस की एक विशेष टीम टेक्निकल सर्विलांस के जरिए आरोपियों की लोकेशन ट्रेस करने में जुटी है।
अजय सिंह ने जनता से अपील करते हुए कहा, “सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे फेसबुक और इंस्टाग्राम पर आने वाले लुभावने निवेश विज्ञापनों से सावधान रहें। कोई भी प्रतिष्ठित ब्रोकरेज फर्म इस तरह व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए व्यक्तिगत रूप से पैसे नहीं मांगती है। निवेश से पहले संस्था की आधिकारिक वेबसाइट और सेबी (SEBI) रजिस्ट्रेशन की जांच अवश्य करें।“
बढ़ते साइबर फ्रॉड और सुरक्षा के उपाय
विशेषज्ञों का कहना है कि शेयर बाजार में बढ़ती दिलचस्पी का फायदा उठाकर अपराधी नामी गिरामी कंपनियों के फर्जी पेज बनाकर लोगों को ठग रहे हैं। इसे ‘इन्वेस्टमेंट स्कैम’ कहा जाता है।
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संदेह करें: यदि कोई बहुत कम समय में पैसा दोगुना करने का वादा करे, तो वह फ्रॉड हो सकता है।
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लिंक से बचें: व्हाट्सएप या टेलीग्राम पर आने वाले अननोन लिंक के जरिए कोई ऐप डाउनलोड न करें।
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हेल्पलाइन 1930: किसी भी प्रकार की साइबर ठगी होने पर तुरंत नेशनल साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें या पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं।



