उत्तराखंडफीचर्ड

देहरादून: रिटायर्ड ब्रिगेडियर की मौत मामले में अब तक 7 आरोपी गिरफ्तार; मुख्य आरोपी पुलिस की रडार पर

देहरादून। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून का शांत कहा जाने वाला राजपुर इलाका सोमवार को गोलियों की तड़तड़ाहट से थर्रा उठा था। दो पक्षों के बीच शुरू हुए आपसी विवाद ने एक बेगुनाह और देश की सेवा कर चुके रिटायर्ड ब्रिगेडियर मुकेश जोशी की जान ले ली। इस सनसनीखेज देहरादून फायरिंग केस में देहरादून पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए अब तक कुल सात आरोपियों को सलाखों के पीछे भेज दिया है। बुधवार को पुलिस ने घटना में शामिल तीन और फरार आरोपियों को गिरफ्तार कर बड़ी सफलता हासिल की है।

बिल के विवाद से शुरू हुई थी ‘गैंगवार’ जैसी स्थिति

पुलिस की प्राथमिक जांच में जो तथ्य सामने आए हैं, वे चौंकाने वाले हैं। जांच के अनुसार, इस पूरे खूनी संघर्ष की पटकथा 29 मार्च की रात को ही लिख दी गई थी। कुठालगेट के पास स्थित एक बार में स्टाफ और कुछ ग्राहकों के बीच बिल के भुगतान को लेकर तीखी बहस हुई थी। मामूली सी लगने वाली यह कहासुनी अगले ही दिन यानी 30 मार्च को एक हिंसक संघर्ष में बदल गई।

प्रत्यक्षदर्शियों और पुलिस के अनुसार, अगले दिन सुबह दोनों पक्ष हथियारों से लैस होकर आमने-सामने आ गए। राजधानी की सड़कों पर गाड़ियों से एक-दूसरे का पीछा किया गया और अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी गई। देखते ही देखते देहरादून की शांत वादियां गोलियों की आवाज से गूँज उठीं।

मॉर्निंग वॉक पर निकले ब्रिगेडियर बने शिकार

30 मार्च की सुबह करीब 6:00 से 6:30 बजे के बीच, जोहड़ी गांव के पास फिल्मी स्टाइल में गाड़ियों का पीछा किया जा रहा था। एक काले रंग की स्कॉर्पियो, सफेद रंग की कार का पीछा कर रही थी और उसमें सवार युवक लगातार फायरिंग कर रहे थे। दुर्भाग्यवश, इसी दौरान देश के गौरव रहे रिटायर्ड ब्रिगेडियर मुकेश जोशी अपने दैनिक नियम के अनुसार मॉर्निंग वॉक पर निकले थे।

दौड़ती गाड़ियों से चली एक ‘भटकी हुई’ गोली सीधे ब्रिगेडियर जोशी को जा लगी। लहूलुहान अवस्था में उन्हें अस्पताल ले जाया गया, लेकिन तब तक उन्होंने दम तोड़ दिया था। एक सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारी की इस तरह सरेआम हुई मौत ने न केवल उनके परिवार को तोड़ा, बल्कि पूरे उत्तराखंड शासन और प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था पर सवालिया निशान खड़े कर दिए।

पुलिस की ताबड़तोड़ कार्रवाई: 3 और आरोपी गिरफ्तार

घटना की गंभीरता और जन आक्रोश को देखते हुए एसएसपी देहरादून ने तत्काल विशेष टीमों का गठन किया। देहरादून फायरिंग केस की तफ्तीश करते हुए पुलिस ने घटना वाले दिन यानी 30 मार्च की शाम तक ही चार मुख्य आरोपियों को दबोच लिया था। पकड़े गए आरोपियों के पास से पुलिस ने अवैध हथियार भी बरामद किए थे, जिससे यह साफ हो गया कि यह विवाद सोची-समझी साजिश के तहत हिंसक रूप ले चुका था।

पकड़े गए आरोपियों से मिली जानकारी के आधार पर पुलिस ने अपनी दबिश जारी रखी। इसी क्रम में आज पुलिस ने तीन और आरोपियों— आदेश गिरी, समीर चौधरी और मोहित अरोड़ा को गिरफ्तार किया है। एसपी सिटी प्रमोद सिंह ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि ये तीनों आरोपी फायरिंग की घटना के वक्त मौके पर मौजूद थे और हिंसा भड़काने में शामिल थे।

एसएसपी का सख्त संदेश: “बख्शा नहीं जाएगा कोई भी अपराधी”

देहरादून पुलिस इस मामले में बेहद सख्त रुख अपनाए हुए है। एसपी सिटी प्रमोद सिंह ने स्पष्ट किया है कि इस जघन्य अपराध में शामिल हर एक चेहरे को बेनकाब किया जाएगा। उन्होंने कहा, हमने अब तक सात लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। फरार चल रहे अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर छापेमारी की जा रही है। देहरादून की कानून व्यवस्था से खिलवाड़ करने वाले किसी भी शख्स को बख्शा नहीं जाएगा।

इलाके में तनाव और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम

रिटायर्ड ब्रिगेडियर मुकेश जोशी की मौत के बाद राजपुर और आसपास के इलाकों में शोक के साथ-साथ तनाव का माहौल है। स्थानीय निवासियों में इस बात को लेकर गहरा रोष है कि कैसे अपराधी बेखौफ होकर सड़कों पर फायरिंग कर रहे हैं। पुलिस ने एहतियातन क्षेत्र में गश्त बढ़ा दी है और संदिग्ध गाड़ियों की चेकिंग की जा रही है।

यह घटना केवल एक आपराधिक मामला नहीं है, बल्कि यह उस बढ़ती असहिष्णुता का भी परिचायक है जहाँ एक मामूली बिल का विवाद किसी की जान लेने तक पहुँच जाता है। देहरादून फायरिंग केस ने एक बार फिर राजधानी में अवैध हथियारों की उपलब्धता और युवाओं में बढ़ते अपराध की प्रवृत्ति पर बहस छेड़ दी है। अब सबकी नजरें पुलिस की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं, ताकि ब्रिगेडियर जोशी के परिवार को न्याय मिल सके और देहरादून की सड़कों पर फिर कभी ऐसी ‘गैंगवार’ न हो।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button