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कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में अब ‘साइलेंस ज़ोन’ का अनुभव: सफारी के दौरान मोबाइल फोन पर पूर्ण प्रतिबंध, नियम तोड़ा तो होगा फोन सीज

The Hill India News
Last updated: February 5, 2026 12:19 pm
The Hill India News
Published: February 5, 2026
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रामनगर (उत्तराखंड): विश्व प्रसिद्ध जिम कॉर्बेट टाइगर रिजर्व अपनी प्राकृतिक सुंदरता और बाघों के दीदार के लिए जाना जाता है। लेकिन अब यहाँ आने वाले पर्यटकों के लिए एक बड़ी खबर है। वन्यजीवों की सुरक्षा और जंगल के शांत वातावरण को मानवीय हस्तक्षेप से मुक्त रखने के लिए पार्क प्रशासन ने एक ऐतिहासिक और कड़ा फैसला लिया है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में, अब कॉर्बेट के सभी पर्यटन जोनों में सफारी के दौरान मोबाइल फोन ले जाने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है।

Contents
सुप्रीम कोर्ट का आदेश और उद्देश्य: क्यों पड़ा मोबाइल पर बैन?प्रवेश द्वारों पर जमा करने होंगे फोन: क्या है नई गाइडलाइन?उल्लंघन पर ‘जीरो टॉलरेंस’: मोबाइल सीज और चालान की कार्रवाईगाइड और चालकों पर भी लागू होगा नियमविशेषज्ञों की राय और भविष्य की राहपर्यटकों के लिए कुछ महत्वपूर्ण बातें:

यह नियम आज से प्रभावी रूप से लागू कर दिया गया है। इसका उद्देश्य न केवल वन्यजीवों को डिजिटल शोर से बचाना है, बल्कि पर्यटकों को प्रकृति के साथ बिना किसी रुकावट के जुड़ने का अवसर देना भी है।


सुप्रीम कोर्ट का आदेश और उद्देश्य: क्यों पड़ा मोबाइल पर बैन?

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने वन्यजीव संरक्षण को लेकर गंभीर रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया था कि जंगल सफारी के दौरान स्मार्टफोन का उपयोग कई स्तरों पर हानिकारक है। अक्सर देखा गया है कि पर्यटक वन्यजीवों के करीब जाकर सेल्फी लेने या शोर मचाते हुए वीडियो बनाने की कोशिश करते हैं, जिससे जानवरों के व्यवहार में परिवर्तन आता है और सुरक्षा का खतरा पैदा होता है।

इस फैसले के पीछे तीन मुख्य स्तंभ हैं:

  1. वन्यजीव सुरक्षा: जानवरों को अचानक होने वाले मोबाइल वाइब्रेशन या रिंगटोन के शोर से बचाना।

  2. डिजिटल हस्तक्षेप को कम करना: जंगल के भीतर सोशल मीडिया रील और लाइव वीडियो के बढ़ते चलन को रोकना।

  3. पारिस्थितिक संतुलन: प्राकृतिक वातावरण को यथासंभव मानवीय शोर से मुक्त और स्वाभाविक बनाए रखना।


प्रवेश द्वारों पर जमा करने होंगे फोन: क्या है नई गाइडलाइन?

पार्क प्रशासन ने इस आदेश को कड़ाई से लागू करने के लिए विस्तृत गाइडलाइन जारी की है। कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के पार्क वार्डन अमित ग्वासाकोटी ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि नियम अब सभी के लिए अनिवार्य हैं:

  • डे-सफारी पर्यटक: जो पर्यटक केवल दिन की सफारी (Day Safari) के लिए आएंगे, उन्हें प्रवेश द्वार पर ही अपने मोबाइल फोन जमा कराने होंगे। इसके लिए गेट पर सुरक्षित काउंटर बनाए गए हैं।

  • नाइट स्टे पर्यटक: जो पर्यटक पार्क के भीतर स्थित रेस्ट हाउसों में रुकने जा रहे हैं, उनके मोबाइल फोन जिप्सी में लगे एक विशेष सुरक्षित बॉक्स में जमा किए जाएंगे। यह बॉक्स जिप्सी चालक और नेचर गाइड की प्रत्यक्ष निगरानी में रहेगा।

  • प्रतिबंध से छूट: केवल पेशेवर कैमरे जैसे DSLR या स्टिल कैमरे ले जाने की अनुमति होगी। पर्यटक प्राकृतिक दृश्यों और वन्यजीवों की फोटोग्राफी कर सकेंगे, लेकिन इसके लिए मोबाइल फोन का उपयोग वर्जित रहेगा।


उल्लंघन पर ‘जीरो टॉलरेंस’: मोबाइल सीज और चालान की कार्रवाई

नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए पार्क प्रशासन ने सख्त दंड का प्रावधान किया है। यदि कोई पर्यटक सफारी के दौरान चोरी-छिपे मोबाइल का उपयोग करता पाया गया, तो उसका फोन तुरंत सीज (जब्त) कर लिया जाएगा।

इतना ही नहीं, इस मामले में जवाबदेही केवल पर्यटकों की नहीं होगी। पार्क वार्डन के अनुसार, यदि किसी जिप्सी में नियमों का उल्लंघन होता है, तो संबंधित नेचर गाइड और जिप्सी चालक के खिलाफ भी कठोर विभागीय कार्रवाई की जाएगी और उनका लाइसेंस रद्द किया जा सकता है। नाइट स्टे वाले पर्यटकों को उनके फोन केवल विश्राम गृह (रेस्ट हाउस) पहुँचने के बाद ही दिए जाएंगे, और उनका उपयोग केवल कमरे के भीतर तक ही सीमित रहेगा।


गाइड और चालकों पर भी लागू होगा नियम

इस अभियान की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह प्रतिबंध केवल पर्यटकों तक सीमित नहीं है। जिप्सी चालक और नेचर गाइड भी ड्यूटी के दौरान मोबाइल फोन का उपयोग नहीं कर पाएंगे। अक्सर देखा गया है कि गाइड एक-दूसरे को बाघ की लोकेशन बताने के लिए फोन का उपयोग करते हैं, जिससे एक ही स्थान पर कई जिप्सियां जमा हो जाती हैं (Crowding)। इस नए नियम से जंगल में अवांछित भीड़ पर भी लगाम लगेगी।


विशेषज्ञों की राय और भविष्य की राह

पर्यावरणविदों और वन्यजीव प्रेमियों ने इस फैसले का स्वागत किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में इस तरह के कदम से इको-टूरिज्म को एक नई दिशा मिलेगी। जब पर्यटक मोबाइल से दूर रहेंगे, तो वे जंगल की आवाजों और पक्षियों के कलरव को बेहतर ढंग से महसूस कर पाएंगे।

कॉर्बेट प्रशासन ने सभी पर्यटकों से अपील की है कि वे सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का सम्मान करें। यह प्रयास केवल प्रतिबंध नहीं है, बल्कि हमारी आने वाली पीढ़ियों के लिए वन्यजीवों और उनके प्राकृतिक आवास को संरक्षित करने की एक बड़ी मुहिम है।


पर्यटकों के लिए कुछ महत्वपूर्ण बातें:

विवरण नियम / स्थिति
क्या मोबाइल ले जा सकते हैं? नहीं, सफारी के दौरान पूरी तरह प्रतिबंधित।
क्या कैमरा ले जा सकते हैं? हाँ, DSLR और स्टिल कैमरे की अनुमति है।
फोन कहाँ जमा होंगे? प्रवेश द्वार या जिप्सी के लॉकर बॉक्स में।
नाइट स्टे वालों के लिए क्या है? रेस्ट हाउस के अंदर फोन चलाने की अनुमति होगी।
उल्लंघन पर क्या होगा? फोन जब्ती और भारी जुर्माना।

कॉर्बेट का यह फैसला देश के अन्य टाइगर रिजर्व्स के लिए भी एक मिसाल बन सकता है। अब देखना यह होगा कि तकनीक की दुनिया में रमे पर्यटक बिना स्मार्टफोन के जंगल के इस ‘डिजिटल डिटॉक्स’ को किस प्रकार अपनाते हैं।

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