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Corbett Tiger Reserve: अब कॉर्बेट में ‘नो फोन ज़ोन’, सफारी के दौरान मोबाइल ले जाने पर पूर्ण प्रतिबंध; सुप्रीम कोर्ट का सख्त आदेश

Corbett National Park Safari Rules: जिम कॉर्बेट के ढिकाला, बिजरानी और झिरना समेत सभी पर्यटन जोनों में अब पर्यटक और गाइड मोबाइल फोन नहीं ले जा सकेंगे। वन्यजीवों की सुरक्षा और प्राइवेसी को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने यह ऐतिहासिक फैसला सुनाया है।

रामनगर (उत्तराखंड): विश्व प्रसिद्ध जिम कॉर्बेट टाइगर रिजर्व (CTR) में अब जंगल सफारी का रोमांच पूरी तरह से डिजिटल शोर-शराबे से मुक्त होने जा रहा है। वन्यजीवों के संरक्षण और उनके प्राकृतिक आवास में मानवीय हस्तक्षेप को न्यूनतम करने के उद्देश्य से, सुप्रीम कोर्ट ने टाइगर रिजर्व के भीतर मोबाइल फोन के इस्तेमाल पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का आदेश दिया है। इस फैसले के बाद अब पर्यटकों को गेट पर ही अपने स्मार्टफोन जमा कराने होंगे।


सुप्रीम कोर्ट का आदेश: क्यों लगा स्मार्टफोन पर ‘पहरा’?

सुप्रीम कोर्ट ने अपने हालिया निर्देश में स्पष्ट किया है कि टाइगर रिजर्व के कोर हैबिटेट (Core Habitat) और पर्यटन क्षेत्रों में सफारी के दौरान किसी भी प्रकार के मोबाइल डिवाइस की अनुमति नहीं दी जाएगी। अदालत का मानना है कि मोबाइल फोन न केवल वन्यजीवों की शांति में खलल डालते हैं, बल्कि सुरक्षा के लिहाज से भी एक बड़ी चुनौती पेश करते हैं।

पार्क प्रशासन अब इन निर्देशों को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए विस्तृत गाइडलाइन तैयार कर रहा है। कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के उप निदेशक, राहुल मिश्रा ने बताया:

“सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार सफारी के दौरान स्मार्टफोन प्रतिबंधित रहेंगे। हालांकि, पर्यटकों की सुविधा को देखते हुए उन्हें प्रोफेशनल कैमरे जैसे DSLR ले जाने की अनुमति होगी। जल्द ही प्रवेश द्वारों पर फोन जमा करने की लॉकर सुविधा शुरू की जाएगी।”


मोबाइल फोन प्रतिबंध के पीछे के 5 बड़े कारण

वन्यजीव विशेषज्ञों और नेचर गाइड संजय छिम्वाल के अनुसार, यह निर्णय अचानक नहीं लिया गया है, बल्कि इसके पीछे ठोस सुरक्षा और पारिस्थितिक कारण हैं:

  1. सेल्फी का क्रेज और खतरा: पर्यटक अक्सर अच्छी फोटो या वीडियो के चक्कर में वन्यजीवों के बेहद करीब चले जाते हैं, जो जानलेवा साबित हो सकता है।

  2. जानवरों में तनाव: फोन की रिंगटोन, तेज आवाज और फ्लैश वन्यजीवों को मानसिक तनाव में डाल देते हैं, जिससे उनके व्यवहार में आक्रामकता आ जाती है।

  3. रियल-टाइम लोकेशन शेयरिंग: नेटवर्क मिलने पर गाइड या पर्यटक बाघों (Tigers) की लोकेशन आपस में साझा कर देते हैं, जिससे एक ही जगह दर्जनों जिप्सियों की भीड़ जमा हो जाती है।

  4. ट्रैफिक जाम और शोर: जंगल के शांत वातावरण में जिप्सियों के जमावड़े से प्रदूषण और शोर बढ़ता है, जो इको-सिस्टम के लिए हानिकारक है।

  5. गोपनीयता और सुरक्षा: पार्क के भीतर की संवेदनशील जानकारी और जानवरों की मूवमेंट का लाइव प्रसारण सुरक्षा में सेंध लगा सकता है।


किसे-किसे माननी होगी ‘नो मोबाइल’ पॉलिसी?

यह नियम केवल पर्यटकों तक सीमित नहीं है। नए नियमों के दायरे में हर वह व्यक्ति आएगा जो सफारी के लिए पार्क के भीतर प्रवेश करेगा:

  • पर्यटक (देशी एवं विदेशी)

  • पंजीकृत टूर गाइड और नेचरलिस्ट

  • जिप्सी एवं सफारी वाहन चालक

  • होटल एवं लॉज संचालक (कोर जोन वाले)

  • पार्क का फील्ड स्टाफ

यदि कोई भी व्यक्ति नियम का उल्लंघन करते हुए पाया जाता है, तो उस पर भारी जुर्माना लगाने के साथ-साथ जिप्सी का लाइसेंस रद्द करने जैसी सख्त कार्रवाई भी की जा सकती है।


इन जोनों में लागू होगी व्यवस्था

कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के अंतर्गत आने वाले सभी प्रमुख जोन अब इस नई व्यवस्था का हिस्सा होंगे:

  • प्रमुख जोन: ढिकाला, बिजरानी, झिरना, गर्जिया, सर्पदुली।

  • अन्य क्षेत्र: गैरल, सुल्तान, सोनानदी, दुर्गा देवी, पाखरो, मुंडिया पानी।

  • वन प्रभाग: तराई पश्चिमी का फाटो जोन, सितावनी, पवलगढ़ और कॉर्बेट हेरिटेज सफारी जोन।


क्या कहते हैं वन्यजीव प्रेमी?

इस निर्णय का अधिकांश पर्यावरणविदों ने स्वागत किया है। उनका तर्क है कि लोग जंगल में प्रकृति का अनुभव करने आते हैं, न कि सोशल मीडिया अपडेट्स के लिए। मोबाइल फोन पर प्रतिबंध लगने से पर्यटक अब प्रकृति को अपनी आंखों से देख सकेंगे, न कि सिर्फ स्क्रीन के जरिए। इससे वन्यजीवों को भी अपना स्वाभाविक जीवन जीने में मदद मिलेगी।


आर्टिकल सारांश (Quick Facts):

विवरण जानकारी
प्रतिबंध मोबाइल फोन / स्मार्टफोन
अनुमति प्रोफेशनल DSLR कैमरे
प्रभावी क्षेत्र कॉर्बेट के सभी 10+ पर्यटन जोन
कारण सुरक्षा, शांति और वन्यजीव संरक्षण
जमा करने का स्थान पार्क का प्रवेश द्वार (Entrance Gate)

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