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उत्तराखंडफीचर्ड

Uttarakhand: मुख्यमंत्री धामी ने प्रदेशवासियों को इगास पर्व की बधाई, कहा — “लोक संस्कृति हमारी पहचान, इसे आगे बढ़ाना हम सबकी जिम्मेदारी”

The Hill India News
Last updated: October 31, 2025 12:59 pm
The Hill India News
Published: October 31, 2025
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देहरादून, 31 अक्टूबर: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्यवासियों को पारंपरिक पर्व इगास (बूढ़ी दीपावली) की हार्दिक शुभकामनाएं दी हैं। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर जारी अपने संदेश में कहा कि यह पर्व न केवल उत्तराखंड की सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक है, बल्कि यह हमारी लोकजीवन की जीवंतता, आत्मीयता और पारिवारिक एकता का प्रतीक भी है।

Contents
इगास – लोकजीवन और परंपरा का जीवंत प्रतीकराज्य सरकार ने इगास पर अवकाश को दी मान्यतायुवाओं को लोक संस्कृति से जुड़ने का आह्वानप्रवासी उत्तराखंडियों से की अपील“लोक संस्कृति हमारी पहचान, इसे आगे बढ़ाना हमारा कर्तव्य”प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि की कामना

मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी राज्य की लोक संस्कृति और लोक परंपरा उसकी आत्मा होती है। देवभूमि उत्तराखंड का गौरव इसकी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत में निहित है और इगास पर्व इस विरासत का अभिन्न हिस्सा है। उन्होंने कहा कि यह पर्व हमें अपनी जड़ों से जुड़ने, अपने परिवार और समुदाय के साथ रिश्तों को सुदृढ़ करने तथा अपनी परंपराओं को आगे बढ़ाने का संदेश देता है।

इगास – लोकजीवन और परंपरा का जीवंत प्रतीक

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड के पर्वत, घाटियां और गांव सैकड़ों वर्षों से अपनी विशिष्ट परंपराओं और त्योहारों के लिए प्रसिद्ध रहे हैं। दीपावली के 11वें दिन मनाया जाने वाला इगास (बूढ़ी दीपावली) उन पर्वों में से एक है, जो देवभूमि की सांस्कृतिक समृद्धि को दर्शाता है। इस दिन ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष पकवान बनते हैं, लोकगीत गाए जाते हैं, और परिवार एकत्र होकर पारंपरिक रीति-रिवाजों का निर्वहन करते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आधुनिकता के इस दौर में जहां समाज तेजी से बदल रहा है, वहीं अपनी संस्कृति और परंपराओं से जुड़ाव बनाए रखना बेहद जरूरी है। “हमारी लोक परंपराएं हमारी पहचान हैं। यदि हम इन्हें भूल जाएंगे, तो अपनी जड़ों से कट जाएंगे। इगास जैसे पर्व हमारी सांस्कृतिक चेतना को बनाए रखते हैं,” उन्होंने कहा।

राज्य सरकार ने इगास पर अवकाश को दी मान्यता

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि इगास पर्व के महत्व और जनभावनाओं को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने इसे राजकीय अवकाश के रूप में मान्यता दी है, ताकि उत्तराखंड के लोग अपने पारंपरिक पर्व को पूरे उत्साह के साथ मना सकें। उन्होंने कहा कि इस निर्णय के पीछे उद्देश्य यही था कि प्रवासी और शहरी क्षेत्रों में रहने वाले उत्तराखंडवासी भी अपने गांव लौटकर इस त्योहार को अपने परिवार और समुदाय के साथ मना सकें।

उन्होंने कहा कि यह कदम न केवल एक सांस्कृतिक पहल है, बल्कि यह उत्तराखंड की लोक पहचान और सामुदायिक भावना को पुनर्जीवित करने की दिशा में एक ठोस प्रयास है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार उत्तराखंड की लोक संस्कृति को सहेजने और संवारने के लिए हरसंभव कदम उठा रही है।

युवाओं को लोक संस्कृति से जुड़ने का आह्वान

मुख्यमंत्री ने युवाओं से आग्रह किया कि वे अपनी लोक संस्कृति, भाषा, संगीत और परंपराओं से जुड़ें तथा इन्हें आधुनिक मंचों पर भी प्रसारित करें। उन्होंने कहा, “आज की युवा पीढ़ी उत्तराखंड की सांस्कृतिक धरोहर की असली वारिस है। हमें सुनिश्चित करना होगा कि आने वाली पीढ़ियां हमारी इस समृद्ध परंपरा को गर्व से आगे बढ़ाएं।”

उन्होंने कहा कि राज्य के गांवों में लोककलाओं, पारंपरिक वाद्ययंत्रों, लोक नृत्यों और परिधानों के संरक्षण के लिए भी योजनाएं लागू की जा रही हैं। यह प्रयास है कि उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान न केवल राज्य तक सीमित रहे बल्कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी पहचान बनाए।

प्रवासी उत्तराखंडियों से की अपील

मुख्यमंत्री धामी ने विदेशों और देश के अन्य हिस्सों में रह रहे प्रवासी उत्तराखंडियों से भी अपील की कि वे अपने लोक पर्व इगास को अपने मूल गांवों में जाकर मनाने का प्रयास करें। उन्होंने कहा कि जब प्रवासी उत्तराखंडी अपने गांव लौटकर इस पर्व को मनाते हैं, तो इससे न केवल पारिवारिक एकता मजबूत होती है, बल्कि गांवों की अर्थव्यवस्था और सांस्कृतिक जीवन में भी नई ऊर्जा का संचार होता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि “राज्य की प्रगति तभी संभव है जब हर उत्तराखंडी अपनी संस्कृति पर गर्व करे और उसके संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभाए।”

“लोक संस्कृति हमारी पहचान, इसे आगे बढ़ाना हमारा कर्तव्य”

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की लोक संस्कृति में निहित मूल्य हमें जीवन की सरलता, समर्पण और सामूहिकता का संदेश देते हैं। उन्होंने कहा कि “सांस्कृतिक चेतना ही समाज की एकता और अस्तित्व की आधारशिला होती है। इगास पर्व इस चेतना को पुनर्जीवित करने का अवसर है।”

उन्होंने राज्यवासियों से अपील की कि वे अपने स्थानीय रीति-रिवाजों, लोकगीतों और पारंपरिक पर्वों को आगे बढ़ाने में सक्रिय भूमिका निभाएं। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार लोक संस्कृति को पाठ्यक्रम, पर्यटन और ग्रामीण विकास से जोड़ने की दिशा में ठोस कदम उठा रही है, ताकि पारंपरिक पहचान और आधुनिक विकास दोनों का संतुलन बना रहे।

प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि की कामना

मुख्यमंत्री ने अंत में प्रदेशवासियों के सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हुए कहा कि “इगास पर्व हमारे जीवन में नई ऊर्जा, प्रेम और सद्भाव लाए। आइए, इस पर्व को हम सब मिलकर अपनी जड़ों से जुड़ने और उत्तराखंड की गौरवशाली संस्कृति को आगे बढ़ाने का संकल्प दिवस बनाएं।”

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