
नई दिल्ली। देश का ध्यान 1 फरवरी को संसद में पेश होने वाले केंद्रीय बजट 2026 पर टिका है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इस बार न केवल अपना लगातार नौवां बजट पेश करके एक नया कीर्तिमान स्थापित करेंगी, बल्कि दशकों से चली आ रही बजट भाषण की एक महत्वपूर्ण परंपरा को भी तोड़ने की तैयारी में हैं। सूत्रों के अनुसार, इस बार का बजट भाषण केवल टैक्स स्लैब में बदलाव या लोक-लुभावन घोषणाओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसमें भारत को वैश्विक महाशक्ति बनाने का एक विस्तृत और रणनीतिक विज़न दिखाई देगा।
बजट परंपरा में बड़ा बदलाव: पार्ट-B का नया अवतार
स्वतंत्र भारत के इतिहास में पिछले 75 वर्षों से यह परिपाटी रही है कि बजट भाषण का ‘पार्ट-A’ सरकारी योजनाओं, मंत्रालयों के आवंटन और व्यापक आर्थिक नीतियों पर केंद्रित होता है, जबकि ‘पार्ट-B’ को मुख्य रूप से टैक्स घोषणाओं और पॉलिसी संशोधनों के लिए आरक्षित रखा जाता है।
लेकिन इस बार निर्मला सीतारमण बजट भाषण की इस लीक से हटकर कुछ नया कर सकती हैं। विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, वित्त मंत्री इस बार पार्ट-B का उपयोग भारत के आर्थिक भविष्य के लिए एक ‘डिटेल्ड विज़न’ पेश करने के लिए करेंगी। इसमें देश की स्थानीय क्षमताओं को वैश्विक आकांक्षाओं के साथ जोड़ने का एक नया खाका होगा, जो केवल लघु अवधि की प्राथमिकताओं तक सीमित नहीं रहेगा।
अल्पकालिक प्राथमिकताओं और दीर्घकालिक लक्ष्यों का तालमेल
आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि बजट 2026 केवल एक वार्षिक वित्तीय विवरण न होकर 21वीं सदी के दूसरे क्वार्टर के लिए एक व्यापक रोडमैप होगा। इसमें सरकार दोहरे मोर्चे पर काम करती नजर आएगी:
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अल्पकालिक प्राथमिकताएं: महंगाई नियंत्रण, उपभोग (Consumption) को बढ़ावा देना और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देना।
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दीर्घकालिक लक्ष्य: ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition), डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और वैश्विक सप्लाई चेन में भारत की हिस्सेदारी बढ़ाना।
राजकोषीय घाटा (Fiscal Deficit): 4 प्रतिशत की ओर कदम
बाजार और निवेशकों की नजरें इस बार राजकोषीय घाटे के आंकड़ों पर सबसे अधिक होंगी। चालू वित्त वर्ष (2025-26) के लिए राजकोषीय घाटा जीडीपी के 4.4 प्रतिशत पर रहने का अनुमान है। सरकार ने पहले ही 4.5 प्रतिशत से नीचे का लक्ष्य हासिल कर अपनी वित्तीय अनुशासन की प्रतिबद्धता दिखाई है।
अब चर्चा यह है कि वित्त वर्ष 2026-27 के लिए सरकार 4 प्रतिशत के राजकोषीय घाटे का साहसिक लक्ष्य घोषित कर सकती है। यदि ऐसा होता है, तो यह वैश्विक रेटिंग एजेंसियों और विदेशी निवेशकों के लिए एक सकारात्मक संकेत होगा, जिससे भारत का कर्ज-जीडीपी अनुपात और अधिक संतुलित हो जाएगा।
पूंजीगत व्यय (Capex) में 15% की भारी बढ़ोतरी संभव
बुनियादी ढांचे (Infrastructure) का विकास वर्तमान सरकार की आर्थिक रणनीति का केंद्र रहा है। चालू वित्त वर्ष में नियोजित पूंजीगत व्यय 11.2 लाख करोड़ रुपये है। निजी निवेश में अभी भी जारी सावधानी को देखते हुए, सरकार बुनियादी ढांचे पर खर्च को कम करने के मूड में नहीं है।
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अनुमानित वृद्धि: 10 से 15 प्रतिशत।
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कुल आवंटन: यह राशि 12 लाख करोड़ रुपये के पार जा सकती है।
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प्रभाव: सड़क, रेलवे, और पोर्ट कनेक्टिविटी में सुधार से रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
परंपराएं तोड़ने में माहिर रही हैं वित्त मंत्री
यह पहली बार नहीं है जब निर्मला सीतारमण किसी स्थापित परंपरा को बदल रही हैं। इससे पहले भी उन्होंने बजट के पारंपरिक स्वरूप को आधुनिक बनाने के लिए कई कदम उठाए हैं:
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बही-खाता: 2019 में उन्होंने ब्रिटिशकालीन लेदर ब्रीफकेस को त्यागकर लाल कपड़े में लिपटा ‘बही-खाता’ अपनाया।
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पेपरलेस बजट: पिछले चार वर्षों से बजट दस्तावेजों की छपाई बंद कर इसे पूरी तरह डिजिटल कर दिया गया है, जो ‘डिजिटल इंडिया’ का प्रतीक है।
सामाजिक सुरक्षा और ‘G RAM G’ पर फोकस
आर्थिक आंकड़ों के साथ-साथ सामाजिक सुरक्षा (Social Security) भी इस बजट का एक प्रमुख स्तंभ होने की उम्मीद है। शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में बजट आवंटन बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। विशेष रूप से ‘G RAM G’ जैसी योजनाओं के माध्यम से समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक लाभ पहुंचाने का विज़न इस बजट की विशेषता हो सकता है।
बजट 2026 ऐसे समय में आ रहा है जब वैश्विक अर्थव्यवस्था कई अनिश्चितताओं से गुजर रही है। ऐसे में भारत का यह बजट रूटीन टैक्स बदलावों से ऊपर उठकर एक आत्मनिर्भर और विकसित राष्ट्र की नींव रखने वाला दस्तावेज साबित हो सकता है। 1 फरवरी को होने वाला यह भाषण तय करेगा कि भारत 21वीं सदी की वैश्विक आर्थिक व्यवस्था में अपनी भूमिका को किस तरह परिभाषित करता है।



