
पटना: बिहार की राजनीति में आज बड़ा दिन माना जा रहा है, क्योंकि सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली नई सरकार के मंत्रिमंडल का विस्तार होने जा रहा है। राजधानी पटना में होने वाले शपथ ग्रहण समारोह को लेकर राजनीतिक हलकों में काफी हलचल है। बीजेपी और जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) दोनों दलों ने अपने-अपने मंत्रियों की सूची लगभग तय कर ली है। इस विस्तार में जातीय और क्षेत्रीय संतुलन साधने की पूरी कोशिश की गई है ताकि आगामी विधानसभा चुनावों से पहले मजबूत राजनीतिक संदेश दिया जा सके।
सबसे ज्यादा चर्चा जेडीयू की ओर से पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार के मंत्रिमंडल में शामिल होने को लेकर हो रही है। माना जा रहा है कि यह कदम जेडीयू की भविष्य की राजनीति और नेतृत्व परिवर्तन के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। वहीं बीजेपी ने भी कई नए और पुराने चेहरों को मौका देकर सामाजिक समीकरण साधने की रणनीति अपनाई है।
बीजेपी की ओर से जिन नेताओं को मंत्री बनाया जा सकता है उनमें लखविंदर पासवान, दिलीप जायसवाल, विजय सिन्हा, प्रमोद चंद्रवंशी, संजय टाइगर, नीतीश मिश्रा, मिथिलेश तिवारी, रामा निषाद, केदार गुप्ता, रामकृपाल यादव और श्रेयसी सिंह जैसे नाम प्रमुख हैं। इनमें कई नेता अलग-अलग जातीय समूहों और क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करते हैं। बीजेपी खासतौर पर पिछड़ा, अति पिछड़ा, दलित और सवर्ण वोट बैंक के बीच संतुलन बनाने की कोशिश में दिखाई दे रही है।
नीतीश मिश्रा को मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने को मिथिलांचल क्षेत्र के लिए बड़ा संदेश माना जा रहा है। वहीं इंजीनियर शैलेंद्र का नाम भी काफी चर्चा में है। पार्टी संगठन में सक्रिय भूमिका निभाने वाले नेताओं को सरकार में जगह देकर बीजेपी कार्यकर्ताओं को भी सकारात्मक संदेश देना चाहती है।
दूसरी ओर जेडीयू की सूची में निशांत कुमार के अलावा अशोक चौधरी, लेसी सिंह, सुनील कुमार, विजेंद्र यादव, श्रवण कुमार, विजय चौधरी, मदन सहनी, जमा खान, शीला मंडल, दामोदर रावत, बुलो मंडल और रत्नेश सदा जैसे नेताओं के नाम शामिल हैं। जेडीयू ने अपने कई पुराने और अनुभवी चेहरों पर भरोसा जताया है। पार्टी का प्रयास है कि सरकार में अनुभव और युवा नेतृत्व दोनों का संतुलन बना रहे।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस मंत्रिमंडल विस्तार के जरिए एनडीए बिहार में सामाजिक समीकरण को और मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। खासकर यादव, कुर्मी, दलित, अति पिछड़ा और मुस्लिम समुदाय के नेताओं को प्रतिनिधित्व देकर सभी वर्गों को साधने का प्रयास किया गया है। महिला नेताओं को भी पर्याप्त जगह मिलने की संभावना जताई जा रही है।
गौरतलब है कि बिहार मंत्रिमंडल में कुल 36 मंत्री शामिल किए जा सकते हैं। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पहले ही शपथ ले चुके हैं। वहीं जेडीयू की ओर से विजय कुमार चौधरी और विजेंद्र यादव को उपमुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी मिली है। अब मुख्यमंत्री और दोनों उपमुख्यमंत्रियों के अलावा लगभग 30 मंत्री शपथ ले सकते हैं।
पटना में शपथ ग्रहण समारोह की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं और बीजेपी-जेडीयू कार्यकर्ताओं में उत्साह का माहौल है। इस विस्तार के बाद विभागों के बंटवारे पर भी सभी की नजर रहेगी, क्योंकि कई वरिष्ठ नेता अहम मंत्रालयों की दौड़ में बताए जा रहे हैं।
बिहार की राजनीति में यह मंत्रिमंडल विस्तार सिर्फ सत्ता संतुलन का मामला नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे आगामी चुनावी रणनीति और भविष्य के नेतृत्व की दिशा तय करने वाला कदम भी समझा जा रहा है। खासतौर पर निशांत कुमार की एंट्री ने राजनीतिक चर्चाओं को और तेज कर दिया है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि नई टीम बिहार की राजनीति और प्रशासन में किस तरह की भूमिका निभाती है।



