लखनऊ। उत्तर प्रदेश में आउटसोर्सिंग के माध्यम से विभिन्न सरकारी विभागों और संस्थानों में सेवाएं दे रहे लाखों कर्मचारियों के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। राज्य में आउटसोर्स कर्मचारियों की सेवा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम (UPCOS) की शुरुआत की गई है। सरकार के इस कदम से करीब 3.5 लाख से अधिक आउटसोर्स कर्मियों को लाभ मिलने की उम्मीद है। नई व्यवस्था में कर्मचारियों की सैलरी, उपस्थिति, बैंक खाते, कटौती, भविष्य निधि और बीमा जैसी सुविधाओं की डिजिटल निगरानी की जाएगी।
सरकार का कहना है कि आउटसोर्स कर्मचारियों को केवल काम करने वाला कर्मचारी समझने के बजाय उनके अधिकारों और सामाजिक सुरक्षा को भी प्राथमिकता दी जाएगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस अवसर पर कहा कि सरकार और कर्मचारी के बीच संबंध केवल वेतन और काम तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि यह विश्वास और जिम्मेदारी पर आधारित होना चाहिए। सरकार का प्रयास है कि कर्मचारियों का समय कागजी कार्रवाई और कार्यालयों के चक्कर लगाने में न बीते, बल्कि वे अपने कर्तव्यों और परिवार पर ध्यान दे सकें।
समय पर मिलेगी सैलरी, डिजिटल होगी पूरी व्यवस्था
नई व्यवस्था की सबसे बड़ी खासियत यह बताई जा रही है कि आउटसोर्स कर्मचारियों से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराया जाएगा। कर्मचारी अपनी सर्विस डिटेल, बैंक खाते की जानकारी, उपस्थिति और वेतन से होने वाली कटौती जैसी जानकारी एक ही स्थान पर देख सकेंगे।
इसके साथ ही कर्मचारियों को अपनी शिकायतों के लिए भी अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर लगाने की आवश्यकता कम होगी। पोर्टल के माध्यम से शिकायत दर्ज कराने और उसके निस्तारण की स्थिति देखने की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कर्मचारी को अपनी समस्या के समाधान के लिए किसी बिचौलिए या अनावश्यक माध्यम पर निर्भर न रहना पड़े।
सरकार की ओर से यह भी कहा गया है कि कर्मचारियों को हर महीने 5 तारीख से पहले वेतन उपलब्ध कराने की व्यवस्था को प्राथमिकता दी जाएगी। इससे समय पर वेतन न मिलने की समस्या से कर्मचारियों को राहत मिलने की उम्मीद है।
EPF और ESIC की होगी रियल टाइम निगरानी
आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों में से एक भविष्य निधि और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी सुविधाएं हैं। नई व्यवस्था के तहत EPF और ESIC जैसी सुविधाओं की रियल टाइम मॉनिटरिंग किए जाने की बात कही गई है।
इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कर्मचारी के वेतन से भविष्य निधि या अन्य निर्धारित कटौतियां होने के बाद संबंधित राशि और सुविधाओं का रिकॉर्ड भी पारदर्शी तरीके से उपलब्ध रहे। कर्मचारी अपने अधिकारों से जुड़ी जानकारी डिजिटल माध्यम से देख सकेगा।
सरकार की ओर से यह भी जोर दिया गया है कि हर आउटसोर्स कर्मचारी को उसकी मेहनत और निर्धारित नियमों के अनुसार उचित वेतन मिले तथा उसके सामाजिक सुरक्षा संबंधी अधिकार सुरक्षित रहें।
50 लाख रुपये का दुर्घटना बीमा भी मिलेगा
नई व्यवस्था में आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए 50 लाख रुपये के दुर्घटना बीमा की सुविधा को भी महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे कर्मचारियों और उनके परिवारों को आकस्मिक परिस्थितियों में आर्थिक सुरक्षा मिल सकेगी।
आउटसोर्स व्यवस्था में काम करने वाले बड़ी संख्या में कर्मचारी ऐसे कार्यों से जुड़े होते हैं, जिनमें उन्हें कार्यालय के साथ-साथ फील्ड में भी काम करना पड़ता है। ऐसे में दुर्घटना बीमा की सुविधा उनके लिए महत्वपूर्ण सामाजिक सुरक्षा कवच साबित हो सकती है।
अब कर्मचारी को सीधे नौकरी से हटाना आसान नहीं होगा
आउटसोर्स कर्मचारियों की नौकरी की सुरक्षा को लेकर भी सरकार ने महत्वपूर्ण संदेश दिया है। कार्यक्रम के दौरान उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि आउटसोर्स कर्मचारी को किसी आरोप या शिकायत के आधार पर सीधे नौकरी से नहीं हटाया जाना चाहिए। यदि किसी कर्मचारी पर कोई आरोप लगता है तो उसकी जांच और निर्धारित प्रक्रिया के बाद ही कार्रवाई की जानी चाहिए।
इस व्यवस्था का उद्देश्य आउटसोर्स कर्मचारियों के बीच नौकरी को लेकर असुरक्षा की भावना को कम करना है। हालांकि इसका अर्थ यह नहीं है कि कर्मचारी को किसी भी गलती पर कार्रवाई से छूट मिल जाएगी। यदि जांच में आरोप सिद्ध होते हैं तो नियमानुसार कार्रवाई की जा सकेगी। यानी अब जोर प्रक्रिया, पारदर्शिता और जांच पर रहेगा।
वसूली करने वाली कंपनियों पर भी होगी सख्ती
आउटसोर्स कर्मचारियों की भर्ती के नाम पर किसी प्रकार की अवैध वसूली को लेकर भी सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। उपमुख्यमंत्री ने स्पष्ट संदेश दिया कि यदि किसी कर्मचारी से आउटसोर्सिंग के माध्यम से नौकरी दिलाने के नाम पर पैसे की मांग की जाती है तो संबंधित कंपनी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
ऐसी कंपनियों को ब्लैकलिस्ट किए जाने के साथ ही जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है। सरकार का उद्देश्य आउटसोर्स भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाना और कर्मचारियों के शोषण को रोकना है।
परिवहन निगम के कर्मचारियों का भी बढ़ा मानदेय
इसी कड़ी में उत्तर प्रदेश परिवहन निगम में कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारियों के मानदेय में भी बढ़ोतरी की गई है। सरकार ने जुलाई से 5 प्रतिशत मानदेय बढ़ाने का फैसला किया था। इसका लाभ कंप्यूटर ऑपरेटर, लेखाकार कम टैली ऑपरेटर और प्रोग्रामर के पदों पर कार्यरत कर्मचारियों को मिलेगा।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, परिवहन निगम में कार्यरत 249 कंप्यूटर ऑपरेटरों के मानदेय में वृद्धि के बाद यह लगभग 20,655 रुपये से बढ़कर 21,420 रुपये तक पहुंच जाएगा।
वहीं 35 लेखाकार कम टैली ऑपरेटरों के मानदेय में भी बढ़ोतरी की गई है। इसी तरह 26 प्रोग्रामरों का मानदेय लगभग 42,000 रुपये से बढ़कर 43,313 रुपये तक पहुंच जाएगा।
आंगनवाड़ी, आशा, रसोइया और ग्राम चौकीदारों को भी राहत की उम्मीद
राज्य सरकार ने विभिन्न मानदेय और प्रोत्साहन आधारित सेवाओं से जुड़े कर्मचारियों के लिए भी बजट में प्रावधान किए हैं। सरकार के अनुसार आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, आशा वर्करों, रसोइयों, ग्राम चौकीदारों और कोटेदारों के प्रोत्साहन तथा मानदेय में बढ़ोतरी के लिए बजट में धनराशि की व्यवस्था की गई है।
इससे राज्य में विभिन्न सरकारी योजनाओं और सेवाओं को जमीनी स्तर पर संचालित करने वाले बड़ी संख्या में लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है।
भर्ती में आरक्षण का भी मिलेगा लाभ
नई व्यवस्था में करीब तीन लाख कर्मचारियों को भर्ती में नियमों के अनुसार आरक्षण दिए जाने की बात भी सामने आई है। सरकार का कहना है कि आउटसोर्सिंग व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित और नियमबद्ध बनाने की दिशा में यह महत्वपूर्ण कदम है।
यदि इन सभी व्यवस्थाओं को प्रभावी तरीके से लागू किया जाता है तो आउटसोर्स कर्मचारियों को वेतन, सामाजिक सुरक्षा, बीमा, शिकायत निवारण और सेवा रिकॉर्ड से जुड़ी समस्याओं में बड़ी राहत मिल सकती है।
कुल मिलाकर उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा शुरू की गई उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम (UPCOS) की व्यवस्था को लाखों आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। सरकार का दावा है कि नई डिजिटल व्यवस्था से कर्मचारियों की सेवाओं और सुविधाओं में पारदर्शिता आएगी, समय पर वेतन सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी और कर्मचारियों के अधिकारों की निगरानी बेहतर तरीके से हो सकेगी। अब सबसे महत्वपूर्ण चुनौती इस व्यवस्था को जमीन पर प्रभावी ढंग से लागू करने की होगी, ताकि सरकार की घोषणाओं का वास्तविक लाभ हर पात्र आउटसोर्स कर्मचारी तक पहुंच सके।
