
महाराष्ट्र की राजनीति में बारामती उपचुनाव इस समय सबसे चर्चित मुद्दा बन गया है। इस चुनाव ने न सिर्फ राजनीतिक समीकरणों को बदल दिया है, बल्कि पवार परिवार के भीतर संपत्ति को लेकर भी तुलना और बहस तेज कर दी है। नामांकन के दौरान दाखिल किए गए चुनावी हलफनामों में सामने आए आंकड़ों ने इस मुकाबले को और ज्यादा हाई-प्रोफाइल बना दिया है।
बारामती से एनसीपी उम्मीदवार सुनेत्रा पवार की कुल संपत्ति करीब ₹122 करोड़ बताई गई है। यह आंकड़ा इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि यह उनके ससुर और देश के वरिष्ठ नेता शरद पवार की घोषित संपत्ति (करीब ₹61 करोड़) से लगभग दोगुना है। वहीं अगर परिवार के भीतर ही तुलना की जाए, तो सुनेत्रा पवार अपनी ननद सुप्रिया सुले से पीछे हैं, जिनकी कुल संपत्ति लगभग ₹167 करोड़ बताई गई है।
इन आंकड़ों के सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में “परिवार बनाम संपत्ति” की बहस तेज हो गई है। विपक्षी दलों ने इसे मुद्दा बनाते हुए पारदर्शिता और संपत्ति के स्रोतों पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं, जबकि एनसीपी खेमे का कहना है कि सभी आंकड़े चुनाव आयोग के नियमों के तहत पूरी पारदर्शिता के साथ पेश किए गए हैं।
बारामती सीट की बात करें तो यह लंबे समय से पवार परिवार का गढ़ रही है। इस सीट पर पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने लगातार आठ बार जीत दर्ज की थी, जिससे यह क्षेत्र उनके मजबूत प्रभाव का प्रतीक बन गया था। उनके निधन के बाद यह सीट खाली हुई और अब इस पर उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार चुनाव मैदान में हैं। शुरुआत में ऐसा माना जा रहा था कि उन्हें निर्विरोध जीत मिल सकती है, लेकिन अब स्थिति बदल चुकी है।
कांग्रेस ने इस सीट से अधिवक्ता आकाश विश्वनाथ मोरे को उम्मीदवार बनाकर मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की मंजूरी के बाद इस उम्मीदवार की घोषणा की गई, जिसकी जानकारी पार्टी महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने दी। कांग्रेस के इस कदम से अब यह चुनाव एकतरफा नहीं रहा और सीधी टक्कर की स्थिति बन गई है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बारामती उपचुनाव अब सिर्फ एक सीट का चुनाव नहीं रह गया है, बल्कि यह राजनीतिक विरासत, परिवार की प्रतिष्ठा और जनसमर्थन की परीक्षा बन गया है। जहां एक ओर सुनेत्रा पवार अपने परिवार की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रही हैं, वहीं कांग्रेस इस गढ़ में सेंध लगाने के लिए पूरी ताकत झोंक रही है।
संपत्ति के आंकड़ों ने इस चुनाव में एक नया आयाम जोड़ दिया है। आम जनता के बीच यह चर्चा हो रही है कि नेताओं की संपत्ति में इतना अंतर क्यों है और इसका स्रोत क्या है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि संपत्ति का बढ़ना कई कारकों पर निर्भर करता है, जैसे निवेश, व्यवसाय और पारिवारिक संपत्ति।
मतदाताओं के लिए यह चुनाव कई मायनों में अहम है। एक तरफ अनुभवी और स्थापित राजनीतिक परिवार का उम्मीदवार है, तो दूसरी तरफ विपक्ष की चुनौती है, जो बदलाव का संदेश दे रही है। ऐसे में जनता किसे चुनती है, यह देखना दिलचस्प होगा।
चुनाव आयोग के अनुसार बारामती और राहुरी विधानसभा सीटों पर 23 अप्रैल 2026 को मतदान होगा, जबकि मतगणना 4 मई 2026 को की जाएगी। जैसे-जैसे मतदान की तारीख नजदीक आ रही है, वैसे-वैसे राजनीतिक गतिविधियां तेज होती जा रही हैं।
कुल मिलाकर, बारामती उपचुनाव अब केवल एक राजनीतिक प्रक्रिया नहीं रह गया है, बल्कि यह प्रतिष्ठा, परिवार और आर्थिक ताकत की परीक्षा बन चुका है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या पवार परिवार अपना गढ़ बचा पाता है या कांग्रेस इस मजबूत किले में सेंध लगाने में सफल होती है।



