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भ्रष्टाचार पर प्रहार: देहरादून के लाखामण्डल में अवैध वसूली पर पटवारी निलंबित; DM सविन बंसल का ‘जीरो टॉलरेंस’ एक्शन

देहरादून | मुख्य संवाददाता: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के प्रशासनिक गलियारों में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब जिलाधिकारी सविन बंसल (DM Savin Bansal) ने भ्रष्टाचार और अवैध वसूली के गंभीर आरोपों में एक राजस्व उप निरीक्षक (पटवारी) को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। मामला चकराता तहसील के लाखामण्डल क्षेत्र का है, जहां तैनात पटवारी पर गरीब ग्रामीणों और काश्तकारों से काम के बदले अवैध धन उगाही का आरोप लगा है।

जिलाधिकारी ने स्पष्ट संदेश दिया है कि सरकारी सेवा में रहते हुए जनता का शोषण करने वाले किसी भी कर्मचारी को बख्शा नहीं जाएगा।


क्या है पूरा मामला? (The Bribery Case Explained)

लाखामण्डल, चकराता क्षेत्र के निवासियों ने जिलाधिकारी को एक संयुक्त शिकायती पत्र सौंपा था। इस शिकायत की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि ग्रामीणों ने केवल मौखिक आरोप नहीं लगाए, बल्कि शपथ पत्र (Affidavit) के साथ पुख्ता ऑडियो साक्ष्य (Audio Evidence) भी एक पेनड्राइव में संलग्न कर प्रशासन को सौंपे।

शिकायत के मुख्य बिंदु:

  • आरोपी कर्मचारी: राजस्व उप निरीक्षक (पटवारी) जयलाल शर्मा।

  • अवैध वसूली का तरीका: फर्जी विक्रय पत्र तैयार करने, दाखिल-खारिज (Mutation) और छोटे-बड़े राजस्व दस्तावेजों को बनाने के एवज में खुलेआम नकद और ऑनलाइन पैसे मांगे जा रहे थे।

  • पीड़ित वर्ग: शिकायत में आरोप लगाया गया है कि पटवारी विशेष रूप से अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और गरीब काश्तकारों को निशाना बना रहा था।


DM सविन बंसल की त्वरित कार्रवाई और निलंबन

शिकायत मिलते ही जिलाधिकारी सविन बंसल ने प्रकरण की प्रारंभिक जांच के आदेश दिए। जांच में आरोप प्रथम दृष्टया गंभीर पाए गए। जिलाधिकारी ने माना कि उत्तराखण्ड राज्य कर्मचारी आचरण नियमावली, 2002 का स्पष्ट उल्लंघन हुआ है।

निलंबन आदेश के मुख्य प्रावधान:

  1. तत्काल निलंबन: जयलाल शर्मा को सेवा से तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।

  2. संबद्धीकरण: निलंबन की अवधि के दौरान उन्हें तहसील कालसी स्थित रजिस्ट्रार कानूनगो कार्यालय में संबद्ध (Attach) किया गया है।

  3. जीवन निर्वाह भत्ता: नियम के अनुसार, उन्हें अर्द्ध औसत वेतन के समतुल्य जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा, बशर्ते वह किसी अन्य व्यवसाय या निजी सेवा में संलग्न न हों।


जांच का जिम्मा तहसीलदार विकासनगर को

मामले की गहराई तक जाने और पर्दे के पीछे छिपे अन्य चेहरों को बेनकाब करने के लिए जिलाधिकारी ने तहसीलदार विकासनगर को जांच अधिकारी नामित किया है। उन्हें निर्देशित किया गया है कि वे एक माह के भीतर विस्तृत जांच रिपोर्ट (Inquiry Report) जिलाधिकारी को प्रस्तुत करें। इस जांच में ऑडियो साक्ष्यों की फॉरेंसिक जांच और पीड़ितों के बयान दर्ज करना भी शामिल होगा।


भ्रष्टाचार पर ‘शून्य सहिष्णुता’ (Zero Tolerance Policy)

देहरादून के जिला प्रशासन ने इस कार्रवाई के माध्यम से जनता के बीच एक मजबूत भरोसा कायम करने की कोशिश की है। जिलाधिकारी ने सख्त लहजे में कहा:

“भ्रष्टाचार और अवैध वसूली के मामलों में हमारी नीति शून्य सहिष्णुता (Zero Tolerance) की है। सरकारी तंत्र जनता की सेवा के लिए है, न कि उनके शोषण के लिए। यदि कोई भी अधिकारी या कर्मचारी अपनी शक्तियों का दुरुपयोग करते हुए पाया गया, तो उसके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।”


जनता का बढ़ता भरोसा और डिजिटल साक्ष्य

इस मामले में एक महत्वपूर्ण पहलू ग्रामीणों द्वारा ऑडियो साक्ष्य पेश करना है। यह दर्शाता है कि अब आम जनता भी भ्रष्टाचार के खिलाफ जागरूक हो रही है और सबूत जुटाने के लिए तकनीक का सहारा ले रही है। पेनड्राइव में मौजूद रिकॉर्डिंग्स ने प्रशासन के लिए कार्रवाई करना आसान बना दिया और आरोपी पटवारी के बचाव के रास्ते बंद कर दिए।


प्रशासनिक शुचिता की दिशा में बड़ा कदम

राजस्व विभाग अक्सर भ्रष्टाचार की शिकायतों के केंद्र में रहता है। ऐसे में एक पटवारी का निलंबन और तहसीलदार स्तर की जांच का आदेश देना यह बताता है कि सरकार और प्रशासन जमीनी स्तर पर शुचिता लाने के लिए गंभीर हैं। आने वाले एक महीने में आने वाली जांच रिपोर्ट यह तय करेगी कि क्या आरोपी कर्मचारी पर विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ आपराधिक मुकदमा (FIR) भी दर्ज किया जाएगा।

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