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असम में चुनावी शंखनाद के बीच तीखे हुए सियासी बाण: CM हिमंता का गौरव गोगोई पर ‘पाकिस्तानी एजेंट’ वाला बड़ा हमला

गुवाहाटी: असम में आगामी असम विधानसभा चुनाव की आहट के साथ ही प्रदेश की सियासत में उबाल आ गया है। आरोप-प्रत्यारोप का दौर अब व्यक्तिगत हमलों और राष्ट्रवाद की बहस तक जा पहुँचा है। सूबे के मुख्यमंत्री और भारतीय जनता पार्टी के कद्दावर नेता हिमंता बिस्वा सरमा ने कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला है। मुख्यमंत्री ने गोगोई को सीधे तौर पर ‘पाकिस्तान का एजेंट’ करार देकर राज्य के राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है।

सीएम सरमा की खुली चुनौती: “हिम्मत है तो दर्ज करें केस”

गुरुवार को गुवाहाटी में पत्रकारों से मुखातिब होते हुए मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने बिना किसी लाग-लपेट के कांग्रेस नेतृत्व पर प्रहार किया। उन्होंने कहा, गौरव गोगोई पाकिस्तान के एजेंट हैं। इतना ही नहीं, उनकी पत्नी भी पाकिस्तान की एजेंट हैं। अगर गौरव गोगोई में साहस है, तो वे मेरे इन आरोपों के खिलाफ केस दर्ज करके दिखाएं।”

मुख्यमंत्री का यह बयान सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में जंगल की आग की तरह फैल गया है। सरमा ने अपनी बात पर जोर देते हुए आगे कहा कि उनका उद्देश्य किसी को डराना या धमकाना नहीं है, बल्कि वह केवल उस सच को उजागर कर रहे हैं जिसे वह जानते हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि गोगोई डरने वाले व्यक्ति नहीं हैं, यह अच्छी बात है, लेकिन सच को झुठलाया नहीं जा सकता।

असम की राजनीति और ध्रुवीकरण का दांव

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि हिमंता बिस्वा सरमा का यह बयान महज एक चुनावी जुमला नहीं है, बल्कि इसके पीछे गहरी चुनावी रणनीति छिपी है। असम में चुनाव के समय ‘विदेशी’ और ‘राष्ट्रवाद’ जैसे मुद्दे हमेशा से निर्णायक भूमिका निभाते आए हैं। गोगोई परिवार, जो दशकों तक असम की सत्ता के केंद्र में रहा है, पर इस तरह के गंभीर आरोप लगाकर भाजपा ने असम की राजनीति को फिर से वैचारिक ध्रुवीकरण की ओर मोड़ दिया है।

विश्लेषकों के अनुसार, इस तरह की बयानबाजी से हिंदू मतदाताओं को एकजुट करने और कांग्रेस को ‘अल्पसंख्यक तुष्टिकरण’ व ‘राष्ट्र-विरोधी’ ताकतों के करीब दिखाने की कोशिश की जा रही है।

गोगोई और सरमा: पुरानी अदावत का नया अध्याय

असम की सियासत में हिमंता बिस्वा सरमा और पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई के पुत्र गौरव गोगोई के बीच शब्दों की जंग कोई नई बात नहीं है। हिमंता, जो कभी तरुण गोगोई के सबसे करीबी रणनीतिकार माने जाते थे, आज गौरव गोगोई के सबसे बड़े राजनीतिक शत्रु के रूप में खड़े हैं। लोकसभा में गौरव गोगोई की बढ़ती सक्रियता और असम में कांग्रेस के पुनरुद्धार की कोशिशों ने भाजपा खेमे में हलचल बढ़ा दी है।

“सत्य परेशान हो सकता है, पराजित नहीं। मैं वही कहता हूँ जो सच है। गोगोई को इस चुनौती को स्वीकार करना चाहिए।” – हिमंता बिस्वा सरमा, मुख्यमंत्री

मौन है कांग्रेस, लेकिन सुलग रही है आग

मुख्यमंत्री के इस विस्फोटक बयान के बाद कांग्रेस खेमे में फिलहाल सन्नाटा पसरा है। पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस इसे कानूनी रूप देने और जनता के बीच ‘अपमान’ के मुद्दे के तौर पर ले जाने की योजना बना रही है। विधानसभा चुनाव से ठीक पहले इस तरह के आरोपों ने कांग्रेस के लिए रक्षात्मक स्थिति पैदा कर दी है।

आगामी चुनाव और बढ़ता सियासी पारा

असम में अगले कुछ महीनों में चुनाव होने हैं। राज्य में परिसीमन (Delimitation) के बाद यह पहला बड़ा चुनाव होगा, जहाँ सीटों के समीकरण बदल चुके हैं। ऐसे में भाजपा अपनी ‘विकास और राष्ट्रवाद’ की पिच पर आक्रामक है, जबकि कांग्रेस और अन्य क्षेत्रीय दल नागरिकता, पहचान और बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर सरकार को घेर रहे हैं।

हिमंता बिस्वा सरमा के इस बयान ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आने वाला असम विधानसभा चुनाव विकास के मुद्दों से कहीं अधिक ‘पहचान’ और ‘राष्ट्रीय सुरक्षा’ के इर्द-गिर्द सिमटने वाला है। गौरव गोगोई पर लगाए गए ये आरोप राज्य की चुनावी दिशा को तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे। अब देखना यह है कि क्या गौरव गोगोई इस चुनौती को स्वीकार कर कानूनी रास्ता अपनाते हैं या इस जुबानी जंग का जवाब चुनावी मैदान में देते हैं।

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