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असम चुनाव: कांग्रेस का ‘मास्टरस्ट्रोक’ या मजबूरी? टिकट चाहिए तो देनी होगी 50 हजार की फीस और ‘वफादारी’ का हलफनामा

गुवाहाटी | विशेष संवाददाता: असम विधानसभा चुनाव की बिसात बिछ चुकी है, लेकिन इस बार कांग्रेस (Congress) ने चुनावी मैदान में उतरने से पहले अपनी ही पार्टी के भीतर होने वाली संभावित बगावत को रोकने के लिए एक अभूतपूर्व दांव खेला है। अक्सर चुनावों में टिकट न मिलने पर नेताओं के ‘बागी’ तेवर पार्टी का खेल बिगाड़ देते हैं, जिसे देखते हुए असम कांग्रेस ने एक विशेष ‘एप्लीकेशन फॉर्म’ (Ticket Application Form) और सख्त नियमों का नया फॉर्मूला तैयार किया है।

अब असम में कांग्रेस का उम्मीदवार बनने के लिए केवल राजनीतिक रसूख काफी नहीं होगा, बल्कि दावेदारों को अपनी जेब ढीली करने के साथ-साथ ‘अनुशासन’ के कठिन शपथ पत्र पर हस्ताक्षर भी करने होंगे।


टिकट के लिए ‘एंट्री फीस’: 50 हजार का डिमांड ड्राफ्ट अनिवार्य

कांग्रेस ने स्पष्ट कर दिया है कि टिकट की दावेदारी कोई ‘मुफ्त’ प्रक्रिया नहीं होगी। पार्टी द्वारा जारी किए गए आधिकारिक दिशा-निर्देशों के अनुसार, जो भी नेता चुनाव लड़ने का इच्छुक है, उसे आवेदन फॉर्म के साथ 50,000 रुपये का डिमांड ड्राफ्ट (Demand Draft) जमा करना होगा।

पार्टी के इस कदम के पीछे दो मुख्य तर्क दिए जा रहे हैं:

  1. गंभीर उम्मीदवारों की छंटनी: भारी-भरकम फीस रखने से केवल वही लोग आवेदन करेंगे जो वास्तव में चुनाव लड़ने के प्रति गंभीर हैं। इससे अनावश्यक भीड़ को कम किया जा सकेगा।

  2. चुनावी फंड का संग्रह: 126 सीटों वाले राज्य में सैकड़ों आवेदकों से मिलने वाली यह राशि पार्टी के चुनावी कोष में मदद करेगी।


‘बगावत’ पर लगाम: अंडरटेकिंग से बंधेंगे हाथ

असम विधानसभा चुनाव (Assam Assembly Election) में कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी चुनौती आंतरिक गुटबाजी और बगावत रही है। इसे रोकने के लिए आवेदन फॉर्म में एक ‘अंडरटेकिंग’ (Undertaking) यानी वचनबद्धता का कॉलम जोड़ा गया है।

इस नियम के मुताबिक, आवेदन करने वाले हर नेता को यह लिखित गारंटी देनी होगी कि यदि पार्टी उन्हें टिकट नहीं देती है और किसी अन्य उम्मीदवार का चयन करती है, तो वे:

  • निर्दलीय चुनाव नहीं लड़ेंगे।

  • किसी दूसरी पार्टी का दामन नहीं थामेंगे।

  • पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवार के खिलाफ प्रचार या भितरघात नहीं करेंगे।

यह पहली बार है जब किसी बड़े दल ने अपने संभावित उम्मीदवारों से ‘वफादारी’ का ऐसा औपचारिक लिखित अनुबंध मांगा है।


20 जनवरी तक का समय: 100 सीटों पर फोकस

असम की कुल 126 विधानसभा सीटों के लिए कांग्रेस ने अपनी रणनीति साफ कर दी है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस लगभग 100 सीटों पर खुद चुनाव लड़ेगी, जबकि शेष 26 सीटें छोटे क्षेत्रीय दलों और गठबंधन के साथियों के लिए छोड़ी जाएंगी।

आवेदन करने की आखिरी तारीख 20 जनवरी तय की गई है। इस समय सीमा के भीतर सभी दावेदारों को अपनी पूरी प्रोफाइल, राजनीतिक अनुभव और 50 हजार रुपये की फीस के साथ प्रदेश मुख्यालय में फॉर्म जमा करना होगा।


गठबंधन की गणित और कांग्रेस की तैयारी

असम में सत्ता विरोधी लहर का फायदा उठाने के लिए कांग्रेस ने इस बार छोटे दलों के साथ गठबंधन का रास्ता चुना है। ‘महाजोत’ (Grand Alliance) के जरिए पार्टी वोट बैंक के बिखराव को रोकना चाहती है। विशेषज्ञों का मानना है कि 50 हजार रुपये की फीस और बगावत न करने की शर्त लगाकर कांग्रेस ने टिकट वितरण के समय होने वाले हंगामे को पहले ही नियंत्रित करने की कोशिश की है।

[Table: असम चुनाव 2026 – मुख्य आंकड़े]

विवरण संख्या/तिथि
कुल विधानसभा सीटें 126
कांग्रेस द्वारा संभावित सीटें 100+
आवेदन की अंतिम तिथि 20 जनवरी
आवेदन शुल्क (DD) ₹50,000

राजनीतिक विशेषज्ञों की राय: क्या काम करेगा यह फॉर्मूला?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस का यह ‘एप्लीकेशन फॉर्म’ मॉडल दोधारी तलवार साबित हो सकता है। एक तरफ यह अनुशासन सुनिश्चित करेगा, लेकिन दूसरी तरफ, आर्थिक रूप से कमजोर लेकिन जमीन पर मजबूत कार्यकर्ताओं के लिए यह एक बाधा बन सकता है। साथ ही, राजनीति में ‘अंडरटेकिंग’ की कानूनी वैधता कितनी होगी, इस पर भी सवाल उठ रहे हैं।

हालांकि, कांग्रेस आलाकमान का मानना है कि इस प्रक्रिया से स्क्रीनिंग कमेटी का काम आसान होगा और केवल निष्ठावान नेता ही चुनावी दौड़ में शामिल होंगे।


अनुशासन की नई परिभाषा

असम विधानसभा चुनाव 2026 के लिए कांग्रेस का यह दांव अन्य राज्यों के लिए भी एक नजीर बन सकता है। यदि यह फॉर्मूला सफल रहता है, तो भविष्य में अन्य राजनीतिक दल भी बगावत रोकने के लिए ‘पे एंड प्ले’ (Pay and Play) और ‘नो रिवोल्ट’ (No Revolt) की नीति अपना सकते हैं। अब देखना यह होगा कि 20 जनवरी तक कितने नेता इस ‘परीक्षा’ में शामिल होते हैं और क्या टिकट वितरण के बाद भी यह शांति बनी रहती है।

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