
Dehradun/Haridwar: उत्तराखंड के बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड (Ankita Bhandari Murder Case) में एक नया और बेहद महत्वपूर्ण मोड़ आया है। लंबे समय से इस मामले में जिस ‘वीआईपी’ (VIP) को लेकर कयासों का बाजार गर्म था, उसे लेकर पुलिस ने अपनी चुप्पी तोड़ी है। हरिद्वार के पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) शेखर सुयाल ने स्पष्ट किया है कि जांच में जिस व्यक्ति का नाम ‘वीआईपी’ के तौर पर उभरा था, वह वास्तव में कोई राजनेता या बड़ा रसूखदार व्यक्ति नहीं, बल्कि नोएडा का एक निवासी है।
इस खुलासे के बाद सोशल मीडिया पर चल रही दावों की बाढ़ और राजनीतिक गलियारों में मचे घमासान के बीच पुलिस की थ्योरी ने नई बहस छेड़ दी है।
कौन है वह ‘VIP’ जिसे पुलिस ने पहचाना?
पुलिस के अनुसार, जांच के दौरान धर्मेंद्र कुमार उर्फ प्रधान नाम के व्यक्ति की पहचान हुई है, जो उत्तर प्रदेश के नोएडा का रहने वाला है। एसपी ग्रामीण शेखर सुयाल ने मीडिया को बताया कि धर्मेंद्र कुमार हत्या की घटना से करीब दो दिन पहले काम के सिलसिले में उस क्षेत्र में आया था।
पुलिस जांच के मुख्य बिंदु:
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रिजॉर्ट में मौजूदगी: धर्मेंद्र कुमार ‘वनंत्रा रिजॉर्ट’ में केवल कुछ देर के लिए खाना खाने रुका था।
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रिकॉर्ड्स की पुष्टि: पुलिस ने रिजॉर्ट के रजिस्टर, सीसीटीवी फुटेज और वहां मौजूद कर्मचारियों के बयानों के आधार पर इस दावे की पुष्टि की है।
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स्टेटस: पुलिस का कहना है कि धर्मेंद्र कुमार का किसी भी राजनीतिक दल या सरकार से वह ‘वीआईपी’ वाला संबंध नहीं मिला है, जैसा कि दावों में कहा जा रहा था।
अभिनेत्री उर्मिला सनावर के दावों से गरमाया मामला
अंकिता भंडारी केस में ‘वीआईपी’ का मुद्दा तब फिर से सुर्खियों में आया जब अभिनेत्री उर्मिला सनावर (Urmila Sanawar) का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ। इस वीडियो में उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया था कि अंकिता की हत्या के पीछे जिस ‘वीआईपी’ को सेवाएं देने का दबाव बनाया जा रहा था, वह भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का एक बड़ा नेता है।
उर्मिला ने अपने दूसरे वीडियो में ‘गट्टू’ नामक एक व्यक्ति का भी जिक्र किया था। इन दावों ने न केवल आम जनता के बीच आक्रोश पैदा किया, बल्कि उत्तराखंड की धामी सरकार के लिए भी असहज स्थिति पैदा कर दी। पुलिस के ताजा बयान को इन्हीं वायरल दावों के जवाब के रूप में देखा जा रहा है।
कांग्रेस का हमला: ‘CBI जांच से कम कुछ मंजूर नहीं’
पुलिस के इस खुलासे को विपक्ष ने ‘लीपापोती’ करार दिया है। उत्तराखंड कांग्रेस (Uttarakhand Congress) ने इस मामले में सरकार और पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि:
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पुलिस केवल छोटे मोहरों को आगे करके असली गुनहगारों को बचा रही है।
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जब तक मामले की निष्पक्ष जांच नहीं होगी, अंकिता को न्याय नहीं मिलेगा।
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पार्टी ने मांग की है कि इस मामले की जांच उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) के वर्तमान या सेवानिवृत्त न्यायाधीश की निगरानी में CBI से कराई जाए।
विपक्ष का आरोप है कि ‘गट्टू’ और ‘वीआईपी’ के संबंधों की जांच उस गहराई से नहीं की गई, जितनी जरूरी थी।
अंकिता भंडारी हत्याकांड: अब तक क्या हुआ?
19 वर्षीय अंकिता भंडारी ऋषिकेश के पास स्थित ‘वनंत्रा रिजॉर्ट’ में रिसेप्शनिस्ट के तौर पर काम करती थी। सितंबर 2022 में उसकी संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। जांच में सामने आया कि रिजॉर्ट मालिक पुलकित आर्य और उसके सहयोगियों ने अंकिता पर किसी ‘वीआईपी’ को ‘स्पेशल सर्विस’ देने का दबाव बनाया था। इनकार करने पर अंकिता को नहर में धक्का देकर उसकी हत्या कर दी गई थी।
इस मामले में मुख्य आरोपी पुलकित आर्य फिलहाल जेल में है, जो पूर्व भाजपा नेता विनोद आर्य का बेटा है। इसी जुड़ाव के कारण शुरू से ही इस केस में ‘वीआईपी’ एंगल को लेकर राजनीति चरम पर रही है।
पारदर्शिता बनाम पुलिस की थ्योरी
हरिद्वार पुलिस के हालिया बयान ने कानूनी रूप से तो एक स्पष्टीकरण दिया है, लेकिन क्या यह जनता और अंकिता के परिवार को संतुष्ट कर पाएगा? सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे दावों और विपक्ष के कड़े रुख के बीच, अंकिता भंडारी हत्याकांड एक बार फिर इंसाफ की चौखट पर खड़ा है। नोएडा के धर्मेंद्र कुमार उर्फ प्रधान का नाम सामने आने के बाद अब यह देखना होगा कि क्या कोर्ट इस दलील को स्वीकार करता है या जांच का दायरा और बढ़ेगा।



