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उत्तराखंड में मानव-वन्यजीव संघर्ष पर ‘कड़ा प्रहार’: CM धामी ने दिए हॉट-स्पॉट मैपिंग और डिजिटल निगरानी के निर्देश, मुआवजे की राशि बढ़कर हुई 10 लाख

The Hill India News
Last updated: January 6, 2026 1:53 pm
The Hill India News
Published: January 6, 2026
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देहरादून: उत्तराखंड में बढ़ते मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को सचिवालय में आयोजित उत्तराखंड राज्य वन्यजीव बोर्ड की 22वीं बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए कि वन्यजीवों की सुरक्षा के साथ-साथ मानव जीवन और संपत्ति की रक्षा करना सरकार की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। मुख्यमंत्री ने विभाग को संवेदनशील क्षेत्रों में सतर्कता बढ़ाने और आधुनिक तकनीक के उपयोग पर जोर देने को कहा है।

Contents
हॉट-स्पॉट मैपिंग और डिजिटल पहरा: सुरक्षा का नया ब्लूप्रिंटकॉरिडोर संरक्षण और ‘एनिमल पास’ को प्राथमिकता10 लाख रुपये हुआ मुआवजा: पीड़ित परिवारों को बड़ी राहतविकास और पर्यावरण में संतुलन: 9 प्रस्तावों को मिली मंजूरीकचरा प्रबंधन और ईको-टूरिज्म पर जोर

हॉट-स्पॉट मैपिंग और डिजिटल पहरा: सुरक्षा का नया ब्लूप्रिंट

मुख्यमंत्री ने गुलदार, बाघ, भालू और हाथियों के हमलों को रोकने के लिए बहुस्तरीय सुरक्षा ढांचा तैयार करने के निर्देश दिए हैं:

  • हॉट-स्पॉट मैपिंग: जिलाधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने क्षेत्रों में उन गांवों और ब्लॉकों की तत्काल मैपिंग करें जहां वन्यजीवों का खतरा सबसे अधिक है।

  • डिजिटल निगरानी: संवेदनशील क्षेत्रों में अब केवल मैन्युअल गश्त नहीं, बल्कि डिजिटल सर्विलांस और अर्ली वार्निंग सिस्टम (Early Warning System) के जरिए वन्यजीवों की गतिविधियों पर नजर रखी जाएगी।

  • सुरक्षा घेरा: प्रभावित गांवों में सोलर फेंसिंग, बायो-फेंसिंग और पहली बार ‘हनी बी फेंसिंग’ (मधुमक्खी बाड़) जैसे नवाचारों को अनिवार्य रूप से लागू करने को कहा गया है।


कॉरिडोर संरक्षण और ‘एनिमल पास’ को प्राथमिकता

वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास और उनके आवागमन को सुगम बनाने के लिए मुख्यमंत्री ने हाथी और बाघ कॉरिडोर के संरक्षण को शीर्ष प्राथमिकता दी। उन्होंने निर्देश दिए कि सड़कों और बुनियादी ढांचों के निर्माण के समय एनिमल अंडरपास और ओवरपास की व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाया जाए, ताकि वन्यजीव सड़कों पर न आएं। इसके अलावा, उन्होंने मौजूदा वन्यजीव नियमों में जरूरत पड़ने पर संशोधन के प्रस्ताव भी शासन को भेजने के निर्देश दिए।


10 लाख रुपये हुआ मुआवजा: पीड़ित परिवारों को बड़ी राहत

बैठक के दौरान प्रमुख वन संरक्षक ने जानकारी दी कि सरकार ने जनभावनाओं का सम्मान करते हुए वन्यजीवों के हमले में होने वाली मानव मृत्यु पर अनुग्रह राशि को 6 लाख रुपये से बढ़ाकर 10 लाख रुपये कर दिया है।

  • त्वरित कार्रवाई: प्रदेश के 32 वन प्रभागों में 93 क्विक रिस्पॉन्स टीमों (QRT) का गठन किया गया है, जो किसी भी घटना की सूचना मिलते ही तत्काल मौके पर पहुंचेंगी।

  • रेस्क्यू सेंटर: पिथौरागढ़, चम्पावत और रुद्रप्रयाग में नए वन्यजीव रेस्क्यू सेंटर स्थापित करने के लिए केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण को प्रस्ताव भेजा गया है।


विकास और पर्यावरण में संतुलन: 9 प्रस्तावों को मिली मंजूरी

बोर्ड की बैठक में विकास कार्यों के लिए वन भूमि हस्तांतरण के 9 प्रमुख प्रस्तावों पर सहमति बनी:

  1. पेयजल योजनाएं: केदारनाथ वन्यजीव अभयारण्य क्षेत्र में 6 महत्वपूर्ण पेयजल योजनाओं को मंजूरी दी गई।

  2. सड़क संपर्क: राजाजी नेशनल पार्क क्षेत्र से जुड़ी 2 मोटरमार्ग योजनाओं को हरी झंडी मिली।

  3. डिजिटल कनेक्टिविटी: रामनगर वन प्रभाग में ऑप्टिकल फाइबर बिछाने के प्रस्ताव को स्वीकृति दी गई।

  4. उपखनिज चुगान: संरक्षित क्षेत्रों की 10 किमी परिधि में चुगान से जुड़े 22 प्रस्तावों को राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड (NBWL) के पास विचारार्थ भेजने का निर्णय लिया गया।


कचरा प्रबंधन और ईको-टूरिज्म पर जोर

मुख्यमंत्री ने एक महत्वपूर्ण बिंदु की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में ठोस कचरा प्रबंधन को सख्ती से लागू किया जाए। अक्सर खुले में पड़े कचरे के कारण भालू और अन्य हिंसक जानवर आबादी वाले क्षेत्रों की ओर आकर्षित होते हैं। साथ ही, टेरिटोरियल फॉरेस्ट डिविजन में वन्यजीवों के उपचार के लिए पशु चिकित्सकों की तैनाती के भी निर्देश दिए गए।

वन मंत्री सुबोध उनियाल ने बैठक के निर्णयों को दूरदर्शी बताते हुए कहा कि इन कदमों से उत्तराखंड में वन्यजीव प्रबंधन और जन सुरक्षा के बीच एक आदर्श संतुलन स्थापित होगा।

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