जकार्ता/नई दिल्ली: दुनिया के सबसे अधिक भूकंप संवेदनशील क्षेत्र ‘रिंग ऑफ फायर’ में स्थित इंडोनेशिया एक बार फिर कुदरत के कहर से दहल उठा है। गुरुवार की सुबह पूर्वी इंडोनेशिया में आए भीषण भूकंप ने न केवल प्रशांत महासागर के द्वीपों को हिलाकर रख दिया, बल्कि पड़ोसी देशों के तटीय क्षेत्रों में भी मौत का खौफ पैदा कर दिया है। रिक्टर स्केल पर 7.4 की तीव्रता वाले इस भूकंप के बाद अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों ने सुनामी की चेतावनी जारी कर दी है। इसी बीच, भारत के उत्तरी छोर यानी लद्दाख और राजधानी दिल्ली के कुछ हिस्सों में भी भूकंपीय हलचल दर्ज की गई है।
इंडोनेशिया: मोलुका सागर में प्रलयंकारी आहट
अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के आंकड़ों के अनुसार, भूकंप का केंद्र पूर्वी इंडोनेशिया के मोलुका सागर में स्थित था। इसकी गहराई सतह से लगभग 35 किलोमीटर नीचे मापी गई। 7.4 तीव्रता का भूकंप वैज्ञानिक दृष्टि से ‘शक्तिशाली’ श्रेणी में आता है, जो ऊँची इमारतों को गिराने और समुद्र में बड़ी लहरें पैदा करने में सक्षम है।
भूकंप के झटके इतने तेज थे कि उत्तरी मोलुका प्रांत के टर्नेट शहर सहित आसपास के द्वीपों पर लोग घरों से बाहर निकल आए। फिलहाल, प्रभावित क्षेत्रों में बिजली और संचार व्यवस्था आंशिक रूप से बाधित हुई है। स्थानीय प्रशासन जान-माल के नुकसान का आकलन करने में जुटा है, हालांकि सुदूर द्वीप होने के कारण सटीक जानकारी आने में वक्त लग सकता है।
सुनामी का खतरा: 1,000 किलोमीटर के दायरे में अलर्ट
इस भूकंप के बाद सबसे बड़ी चिंता समुद्र की लहरों को लेकर है। यूएस सुनामी चेतावनी प्रणाली ने आधिकारिक बुलेटिन जारी करते हुए कहा है कि भूकंप के केंद्र से 1,000 किलोमीटर के दायरे में आने वाले तटों पर ‘खतरनाक सुनामी लहरें’ टकरा सकती हैं।
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प्रभावित देश: इंडोनेशिया के अलावा फिलीपींस और मलेशिया के तटीय इलाकों के लिए भी हाई अलर्ट जारी किया गया है।
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निकासी के निर्देश: टर्नेट और आसपास के निचले इलाकों में रहने वाले नागरिकों को ऊंचे स्थानों पर जाने की सलाह दी गई है। समुद्र के किनारे रहने वाले मछुआरों और पर्यटकों को तत्काल तट खाली करने के निर्देश दिए गए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समुद्र के भीतर जमीन का विस्थापन अधिक हुआ है, तो आने वाले कुछ घंटों में लहरों का तांडव देखा जा सकता है।
लद्दाख के लेह में तड़के महसूस हुए झटके
एक तरफ जहाँ इंडोनेशिया कुदरती मार झेल रहा है, वहीं दूसरी ओर भारत का केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख भी भूकंप के झटकों से थर्रा उठा। नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (NCS) के अनुसार, गुरुवार सुबह तड़के लेह क्षेत्र में भूकंप के झटके महसूस किए गए। हालांकि लद्दाख में आए भूकंप की तीव्रता इंडोनेशिया जितनी विनाशकारी नहीं थी, लेकिन हिमालयी क्षेत्र में बार-बार आ रहे ये झटके भूवैज्ञानिकों के लिए चिंता का विषय हैं। स्थानीय निवासियों के अनुसार, झटके कुछ सेकंड तक महसूस हुए, जिससे नींद में सो रहे लोग घबराकर जाग गए।
दिल्ली के उत्तर जिले में हल्की हलचल
पहाड़ों के साथ-साथ देश की राजधानी दिल्ली भी आज सुबह भूकंपीय गतिविधि से अछूती नहीं रही। दिल्ली के उत्तरी जिले के कुछ इलाकों में भूकंप का एक हल्का झटका महसूस किया गया। राहत की बात यह रही कि इसकी तीव्रता बेहद कम थी, जिसके कारण जान-माल के नुकसान की कोई सूचना नहीं मिली। अधिकांश लोगों को इसका पता भी नहीं चला, लेकिन सीस्मोग्राफ पर दर्ज हुई इस हलचल ने दिल्ली की ‘सिस्मिक ज़ोनिंग’ को लेकर फिर से सतर्क कर दिया है।
विशेषज्ञों की राय: क्या यह एक ही श्रृंखला का हिस्सा है?
भूवैज्ञानिकों का कहना है कि इंडोनेशिया में शक्तिशाली भूकंप और सुनामी का आना इस क्षेत्र की टेक्टोनिक प्लेटों में मची उथल-पुथल का परिणाम है। इंडोनेशिया ‘पैसिफिक रिंग ऑफ फायर’ पर स्थित है, जहाँ कई टेक्टोनिक प्लेटें आपस में टकराती हैं।
जहाँ तक लद्दाख और दिल्ली का सवाल है, विशेषज्ञों का मानना है कि इंडोनेशिया और उत्तर भारत के भूकंपों के बीच सीधा कोई संबंध नहीं है। लद्दाख का भूकंप भारतीय प्लेट और यूरेशियन प्लेट के बीच के दबाव का परिणाम है। हालांकि, एक ही दिन में एशिया के अलग-अलग हिस्सों में ऐसी हलचल वैश्विक स्तर पर प्लेटों की सक्रियता को दर्शाती है।
क्या करें और क्या न करें?
भूकंप की स्थिति में विशेषज्ञों ने नागरिकों के लिए कुछ महत्वपूर्ण गाइडलाइन्स जारी की हैं:
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घबराएं नहीं: भूकंप के दौरान शांत रहना सबसे जरूरी है।
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ड्रॉप, कवर और होल्ड: अगर आप घर के अंदर हैं, तो किसी मजबूत टेबल के नीचे छिप जाएं।
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लिफ्ट का प्रयोग न करें: भूकंप के समय हमेशा सीढ़ियों का ही इस्तेमाल करें।
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तटीय क्षेत्रों से दूर रहें: सुनामी अलर्ट की स्थिति में समुद्र की ओर जाने की गलती न करें, भले ही लहरें शांत दिख रही हों।
फिलहाल, पूरी दुनिया की नजरें पूर्वी इंडोनेशिया और मोलुका सागर पर टिकी हैं। अगले 24 घंटे सुनामी के लिहाज से अत्यंत संवेदनशील हैं। भारत सरकार और आपदा प्रबंधन एजेंसियां भी लद्दाख और दिल्ली की स्थिति पर पैनी नजर बनाए हुए हैं। इंडोनेशिया में शक्तिशाली भूकंप और सुनामी की यह घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि प्रकृति के सामने इंसान आज भी कितना विवश है।



