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नई दिल्ली : केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने जल संसाधन के विकास एवं प्रबंधन के क्षेत्र में सहयोग के लिए भारत और डेनमार्क के बीच एक सहमति पत्र पर हस्ताक्षर करने को मंजूरी दी

The Hill India News
Last updated: November 2, 2022 4:37 pm
The Hill India News
Published: November 2, 2022
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प्रधानमंत्री  नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल को जल संसाधन के विकास और प्रबंधन के क्षेत्र में सहयोग के लिए भारत और डेनमार्क के बीच हस्‍ताक्षरित सहमति पत्र (एमओयू) से अवगत कराया गया।

इस एमओयू में परिकल्पित सहयोग के व्यापक क्षेत्र निम्‍नलिखित हैं:

• डिजिटलीकरण और सूचना मिलने में आसानी

• एकीकृत और स्मार्ट जल संसाधन विकास एवं प्रबंधन;

• जलभृत का मानचित्रण, भू-जल का प्रतिरूपण, निगरानी और पुनर्भरण;

• गैर-राजस्व जल और ऊर्जा खपत में कमी सहित घरों में बेहतरीन और सतत जल आपूर्ति;

•  जीवन यापन, सुदृढ़ता और आर्थिक विकास बढ़ाने के लिए नदि‍यों एवं तालाबों का कायाकल्प;

•  जल गुणवत्ता की निगरानी और प्रबंधन;

• अपशिष्ट जल के पुन: उपयोग/पुनर्चक्रण के लिए सर्कुलर इकोनॉमी सहित सीवेज/अपशिष्ट जल का शोधन, जिसमें व्यापक गाद प्रबंधन और जल आपूर्ति एवं स्वच्छता के क्षेत्र में नवीकरणीय ऊर्जा का अधिकतम उपयोग करना भी शामिल है;

•   जलवायु परिवर्तन में कमी और अनुकूलन, जिसमें प्रकृति आधारित समाधान भी शामिल हैं;

• नदी केंद्रित शहरी नियोजन जिसमें शहरों में बाढ़ प्रबंधन भी शामिल है;

• उपनगरीय और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए प्रकृति आधारित तरल अपशिष्ट में कमी के लिए उपाय।

अत: इस सहमति पत्र से सहयोग के दायरे में आने वाले क्षेत्रों के अधिकारियों, शिक्षाविदों, जल क्षेत्रों और उद्योग के बीच सीधे सहयोग के जरिए जल संसाधन के विकास एवं प्रबंधन; ग्रामीण क्षेत्रों में जलापूर्ति; और सीवेज/अपशिष्ट जल के शोधन के क्षेत्र में सहयोग व्यापक रूप से बढ़ेगा।

डेनमार्क साम्राज्य की प्रधानमंत्री सुश्री मेटे फ्रेडरिकसेन और भारत गणराज्य के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 28 सितंबर 2020 को भारत और डेनमार्क के बीच एक वर्चुअल शिखर सम्मेलन की सह-अध्यक्षता की और दोनों देशों के बीच ‘हरित रणनीतिक साझेदारी की स्थापना’पर एक संयुक्त वक्तव्य जारी किया। इस संयुक्त वक्तव्य में अन्य बातों के अलावा पर्यावरण/जल एवं सर्कुलर इकोनॉमी और स्मार्ट शहरों सहित सतत शहरी विकास के क्षेत्र में सहयोग की परिकल्पना की गई।

09 अक्टूबर 2021 को भारत की अपनी यात्रा के दौरान डेनमार्क की प्रधानमंत्री सुश्री मेटे फ्रेडरिकसेन से भेंट के बाद प्रधानमंत्री ने हरित रणनीतिक साझेदारी पर संयुक्त वक्तव्य पर आगे के कदमों के रूप में अन्य बातों के अलावा निम्नलिखित घोषणा की:

•  स्मार्ट जल संसाधन प्रबंधन के लिए उत्कृष्टता केंद्र (सीओईएसडब्ल्यूएआरएम) की स्थापना

• पणजी में स्मार्ट सिटी लैब की तर्ज पर वाराणसी में स्वच्छ नदियों के लिए एक लैब की स्थापना।

भारत गणराज्य के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की डेनमार्क यात्रा के दौरान 03 मई, 2022 को जल शक्ति मंत्रालय, भारत सरकार और पर्यावरण मंत्रालय, डेनमार्क सरकार के बीच एक आशय पत्र पर हस्ताक्षर किए गए। आशय पत्र पर हस्ताक्षर इसलिए किए गए थे, ताकि एक व्‍यापक एमओयू किया जा सके जिसमें अन्य बातों के अलावा ये दो नई पहल शामिल होंगी; वाराणसी में जल संसाधन के स्मार्ट प्रबंधन के लिए एक उत्कृष्टता केंद्र और स्वच्छ नदि‍यों के जल पर एक स्मार्ट लैब। प्रस्तावित सहयोग का मूल उद्देश्य समग्र एवं सतत दृष्टिकोण के माध्यम से वर्तमान और भावी मांगों को पूरा करने के लिए सुरक्षित व संरक्षित जल सुनिश्चित करना है।

जल शक्ति मंत्री की डेनमार्क यात्रा के दौरान इस आशय पत्र पर आगे के कदम के रूप में 12 सितम्बर 2022 को जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण विभाग, भारत सरकार और पर्यावरण मंत्रालय, डेनमार्क सरकार के बीच एक सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए गए।

 

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