पिथौरागढ़: उत्तराखंड के सीमांत जिले पिथौरागढ़ में लगातार हो रही बारिश ने एक बार फिर पहाड़ों में आवाजाही की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। भारी बारिश के बीच आदि कैलाश यात्रा मार्ग पर भूस्खलन के कारण सड़क का एक बड़ा हिस्सा ध्वस्त हो गया, जिसके चलते यात्रा रोकनी पड़ी है। एस बैंड के पास करीब 10 मीटर सड़क टूट जाने से आदि कैलाश और ओम पर्वत की ओर जाने वाला मार्ग बाधित हो गया है। सड़क बंद होने के कारण 550 से अधिक यात्री अलग-अलग स्थानों पर फंसे हुए हैं।
इनमें करीब 400 यात्री गुंजी में पिछले 48 घंटे से सड़क खुलने का इंतजार कर रहे हैं, जबकि 150 से अधिक यात्रियों को धारचूला में ही रोकना पड़ा है। मार्ग की संवेदनशील स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने फिलहाल आदि कैलाश और ओम पर्वत यात्रा के लिए इनर लाइन परमिट (ILP) जारी नहीं किए हैं। प्रशासन का कहना है कि यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए मार्ग की स्थिति सामान्य होने के बाद ही आगे की यात्रा की अनुमति देने पर निर्णय लिया जाएगा।
बारिश के बाद कई जगह सड़क पर आया मलबा और बोल्डर
पिथौरागढ़ जिले के सीमांत क्षेत्रों में पिछले दो दिनों से बारिश का दौर जारी है। लगातार बारिश के कारण आदि कैलाश यात्रा मार्ग पर कई स्थानों पर बोल्डर और मलबा आने से सड़क यातायात प्रभावित हुआ। कुलागाड़, मलघाट, गस्कू और गरमपानी जैसे संवेदनशील स्थानों पर पहाड़ी से मलबा और पत्थर आने के कारण दारमा और चौदास घाटी का तहसील मुख्यालय से संपर्क भी प्रभावित हुआ।
शनिवार को पूरे दिन बारिश होने के कारण सड़क खोलने में मुश्किलें सामने आईं। लगातार बारिश और पहाड़ी से गिर रहे मलबे के कारण बीआरओ की टीम को काम शुरू करने में परेशानी हुई। हालांकि रविवार को मौसम में कुछ सुधार हुआ तो सड़क से मलबा हटाने का काम तेज किया गया।
पांगला थाने के हेड कांस्टेबल सोबन सिंह बनग्याल के अनुसार, रविवार शाम करीब चार बजे कुलागाड़, मलघाट, गस्कू और गरमपानी में सड़क से मलबा हटाकर यातायात को सुचारू कर दिया गया। इससे दारमा और चौदास क्षेत्र के ग्रामीणों को कुछ राहत मिली, लेकिन एस बैंड की स्थिति ने आदि कैलाश यात्रा को प्रभावित कर दिया।
एस बैंड में करीब 10 मीटर सड़क ध्वस्त
आदि कैलाश यात्रा मार्ग पर सबसे बड़ी परेशानी एस बेंड के पास सामने आई, जहां भूस्खलन के कारण सड़क का करीब 10 मीटर हिस्सा पूरी तरह ध्वस्त हो गया। सड़क टूटने की सूचना मिलते ही 65 आरसीसी ग्रेफ के जवान और कर्मचारी मौके पर पहुंचे और मार्ग को बहाल करने के लिए काम शुरू किया।
बीआरओ की टीम सड़क को जल्द से जल्द यातायात के लिए खोलने की कोशिश कर रही है। अधिकारियों के मुताबिक अगर मौसम अनुकूल रहा तो सोमवार शाम तक हल्के वाहनों के लिए रास्ता खोलने का प्रयास किया जाएगा। हालांकि पहाड़ी क्षेत्र में लगातार बदल रहे मौसम और दोबारा भूस्खलन की आशंका के कारण सड़क खोलने का काम चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।
गुंजी में 400 यात्रियों का 48 घंटे से इंतजार
सड़क बंद होने का सबसे ज्यादा असर उन यात्रियों पर पड़ा है जो आदि कैलाश की यात्रा पर निकले थे। करीब 400 यात्री गुंजी में पिछले 48 घंटे से फंसे हुए हैं। यात्रियों को अब सड़क खुलने का इंतजार है ताकि वे आगे की यात्रा कर सकें और अपने गंतव्य की ओर लौट सकें।
वाहन स्वामी प्रकाश दुग्ताल के मुताबिक सड़क बंद होने के कारण गुंजी में करीब 80 से 90 निजी और टैक्सी वाहन खड़े हैं। इन वाहनों में सवार लगभग 400 यात्री मार्ग खुलने की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
उनका कहना है कि सड़क बंद होने का असर केवल यात्रियों तक सीमित नहीं है, बल्कि स्थानीय कारोबार पर भी पड़ रहा है। आदि कैलाश यात्रा से जुड़े टैक्सी, होटल और होमस्टे कारोबार को भी नुकसान उठाना पड़ रहा है। यात्रा मार्ग बंद होने के कारण यात्रियों की आवाजाही रुक गई है, जिससे स्थानीय लोगों की आय भी प्रभावित हो रही है।
वहीं, धारचूला में भी 150 से अधिक यात्री रुके हुए हैं। इन यात्रियों की निगाहें अब सड़क खुलने और यात्रा मार्ग सामान्य होने पर टिकी हैं।
ILP जारी करने पर प्रशासन ने लगाई रोक
आदि कैलाश और ओम पर्वत यात्रा के लिए इनर लाइन परमिट यानी ILP जरूरी होता है। लेकिन लगातार बारिश, भूस्खलन और सड़क बंद होने की स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने रविवार को भी नए परमिट जारी नहीं किए।
यात्रा मार्ग की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन ने यात्रियों से फिलहाल इंतजार करने की अपील की है। प्रशासन का कहना है कि यात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और जब तक मार्ग सुरक्षित नहीं हो जाता, तब तक यात्रा शुरू कराना उचित नहीं होगा।
धारचूला के एसडीएम आशीष जोशी ने बताया कि यात्रा मार्ग को सुचारू करने और सड़क व्यवस्था बहाल करने का काम संबंधित विभागों की ओर से तेजी से किया जा रहा है। मौसम और सड़क की स्थिति की लगातार समीक्षा की जा रही है। परिस्थितियां अनुकूल होने के बाद ही इनर लाइन परमिट जारी करने के संबंध में निर्णय लिया जाएगा।
इसका मतलब साफ है कि फिलहाल प्रशासन यात्रियों को जोखिम वाले रास्ते पर आगे बढ़ने की अनुमति देने के बजाय सड़क और मौसम की स्थिति सामान्य होने का इंतजार कर रहा है।
तीन दिन बाद खुला पिथौरागढ़-घाट-टनकपुर हाईवे
पिथौरागढ़ जिले में बारिश और भूस्खलन का असर केवल आदि कैलाश यात्रा मार्ग तक सीमित नहीं रहा। पिथौरागढ़-घाट-टनकपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर भी मुन्ना बैंड के पास सड़क कई दिनों तक बाधित रही।
मुन्ना बैंड में पहाड़ी से लगातार पत्थर और मलबा गिरने के कारण शुक्रवार शाम यातायात पूरी तरह रोकना पड़ा था। सड़क बंद होने से दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई और 800 से अधिक वाहन फंस गए।
बारिश और पत्थर गिरने की वजह से कई वाहन चालक और यात्री सड़क पर ही फंसकर रह गए। स्थिति ऐसी रही कि कुछ लोगों को जरूरी सामान और भोजन की कमी का सामना करना पड़ा। कई वाहन चालकों ने रात सड़क पर ही गुजारी।
शनिवार को भी बारिश जारी रहने के कारण सड़क खोलने का काम प्रभावित हुआ। रविवार को बारिश कुछ थमने के बाद मलबा और पत्थर हटाने का काम तेज किया गया। इसके बाद देर शाम यातायात धीरे-धीरे सामान्य होने लगा।
हालांकि सड़क खुलने के बाद भी मुन्ना बैंड में खतरा पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। पहाड़ी से पत्थर गिरने की आशंका अभी भी बनी हुई है। ऐसे में प्रशासन और संबंधित विभाग लगातार निगरानी कर रहे हैं।
मुन्ना बैंड का डीएम ने किया स्थलीय निरीक्षण
मुन्ना बैंड की संवेदनशीलता को देखते हुए जिलाधिकारी आशीष कुमार भटगांई ने मौके पर पहुंचकर स्थलीय निरीक्षण किया। उन्होंने पहाड़ी से गिर रहे पत्थरों और मलबे की स्थिति का जायजा लिया और सड़क को सुरक्षित बनाए रखने के लिए किए जा रहे कार्यों की जानकारी ली।
डीएम ने राष्ट्रीय राजमार्ग से जुड़े अधिकारियों से सड़क की स्थायी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी जानकारी मांगी। उन्होंने यह भी पूछा कि मुन्ना बैंड के स्थायी उपचार के लिए तैयार की गई योजना और डीपीआर की स्थिति क्या है।
अधिकारियों ने डीएम को बताया कि मुन्ना बैंड के स्थायी उपचार के लिए उच्च स्तर से स्वीकृति मिल चुकी है और अब टेंडर प्रक्रिया चल रही है। स्थायी कार्य पूरा होने के बाद बार-बार मलबा और पत्थर गिरने के कारण सड़क बंद होने की समस्या को कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
डीएम ने दिए सुरक्षा के कड़े निर्देश
डीएम आशीष कुमार भटगाईं ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि मुन्ना बैंड जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में यात्रियों और वाहन चालकों की सुरक्षा के साथ किसी भी तरह का समझौता न किया जाए।
उन्होंने कहा कि जब भी पहाड़ी से पत्थर गिरने की स्थिति बने, यात्रियों को सुरक्षित तरीके से संवेदनशील क्षेत्र से बाहर निकाला जाए। सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित किए बिना किसी भी वाहन को जोखिम वाले हिस्से से आगे नहीं बढ़ने दिया जाए।
इसके साथ ही मार्ग की लगातार निगरानी करने और मौसम तथा सड़क की स्थिति के अनुसार यातायात संचालित करने के निर्देश भी दिए गए हैं। संवेदनशीलता को देखते हुए एसडीआरएफ की टीम को भी तैनात रखा जाएगा।
बारिश ने बढ़ाई चुनौती, यात्रियों की सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता
पिथौरागढ़ के ऊंचाई वाले और सीमांत क्षेत्रों में मौसम तेजी से बदलता है। बारिश के दौरान पहाड़ी से अचानक मलबा, बोल्डर और पत्थर गिरने का खतरा बढ़ जाता है। यही वजह है कि प्रशासन और बीआरओ के सामने एक ओर सड़क खोलने की चुनौती है, तो दूसरी ओर यात्रियों और स्थानीय लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी भी है।
आदि कैलाश यात्रा देश ही नहीं, बल्कि विदेशों से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र है। ऐसे में यात्रा मार्ग बंद होने से बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हुए हैं। फिलहाल करीब 550 यात्री अलग-अलग स्थानों पर रुके हुए हैं और मार्ग खुलने का इंतजार कर रहे हैं।
प्रशासन और बीआरओ की कोशिश है कि मौसम ने साथ दिया तो सड़क को जल्द से जल्द यातायात के लिए बहाल किया जाए। लेकिन पहाड़ी क्षेत्रों में सड़क खोलने के बाद भी उसकी सुरक्षा और स्थिरता की जांच जरूरी होगी।
फिलहाल यात्रियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण संदेश यही है कि सड़क और मौसम की स्थिति सामान्य होने तक प्रशासन के निर्देशों का पालन करें और जोखिम वाले क्षेत्रों में आगे बढ़ने से बचें।
