कुत्ते को इंसान का सबसे वफादार साथी माना जाता है, लेकिन जब किसी कुत्ते में रेबीज का संक्रमण हो जाए तो उसका व्यवहार अचानक और असामान्य रूप से बदल सकता है। ऐसे में वह इंसानों या दूसरे जानवरों के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। खासतौर पर सड़क पर घूमने वाले ऐसे कुत्ते जो अचानक आक्रामक हो जाएं, असामान्य तरीके से दौड़ें, अत्यधिक लार छोड़ें या चलने में लड़खड़ाने लगें, उनसे दूरी बनाए रखना बेहद जरूरी है। हालांकि, केवल किसी एक लक्षण के आधार पर यह तय नहीं किया जा सकता कि कुत्ते को रेबीज है। इसके लिए पशु चिकित्सकीय जांच जरूरी होती है।
रेबीज एक वायरल बीमारी है जो संक्रमित जानवर की लार के संपर्क में आने, खासकर काटने या खरोंच के जरिए इंसानों तक पहुंच सकती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, इंसानों में रेबीज के लगभग 99 प्रतिशत मामले संक्रमित कुत्तों से जुड़े होते हैं। बीमारी के लक्षण दिखाई देने के बाद रेबीज लगभग हमेशा घातक होती है, लेकिन समय पर घाव की सफाई और उचित पोस्ट-एक्सपोजर प्रोफिलैक्सिस यानी PEP से बीमारी को रोका जा सकता है।
इन 10 संकेतों से सतर्क हो जाएं
1. अचानक बेहद आक्रामक होना:
अगर सामान्य रूप से शांत रहने वाला कुत्ता अचानक बिना किसी स्पष्ट कारण के लोगों या दूसरे जानवरों पर हमला करने लगे या काटने की कोशिश करे, तो यह गंभीर चेतावनी हो सकती है। ऐसे कुत्ते के करीब जाने या उसे छेड़ने से बचें।
2. व्यवहार में अचानक बदलाव:
कुत्ता अचानक बहुत बेचैन, चिड़चिड़ा, डरा हुआ या असामान्य रूप से उत्तेजित दिखाई दे सकता है। उसके सामान्य व्यवहार में अचानक बदलाव को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
3. बिना वजह लगातार दौड़ना या घूमना:
रेबीज से प्रभावित जानवर असामान्य गतिविधियां कर सकता है। वह बिना किसी स्पष्ट कारण के लगातार इधर-उधर दौड़ सकता है या सामान्य व्यवहार से बिल्कुल अलग नजर आ सकता है।
4. मुंह से अत्यधिक लार या झाग:
मुंह से ज्यादा लार निकलना रेबीज के संभावित संकेतों में शामिल है। हालांकि, केवल झाग या लार देखकर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि कुत्ता रेबीज से संक्रमित है, क्योंकि इसके दूसरे कारण भी हो सकते हैं।
5. आवाज में असामान्य बदलाव:
कुत्ते के भौंकने या गुर्राने की आवाज अचानक बदल सकती है। आवाज भारी, कर्कश या असामान्य हो सकती है और कुछ मामलों में जानवर के लिए आवाज निकालना भी मुश्किल हो सकता है।
6. निगलने में परेशानी:
रेबीज तंत्रिका तंत्र को प्रभावित कर सकता है। ऐसे में संक्रमित जानवर को निगलने में कठिनाई हो सकती है और वह खाने-पीने के दौरान असामान्य व्यवहार कर सकता है।
7. असामान्य चीजें चबाना:
कुछ मामलों में संक्रमित कुत्ता ऐसी वस्तुओं को चबाने या खाने की कोशिश कर सकता है जिन्हें वह सामान्य तौर पर नहीं खाता। लकड़ी या दूसरी गैर-खाद्य चीजों के प्रति असामान्य व्यवहार भी चेतावनी का संकेत हो सकता है।
8. शरीर का संतुलन बिगड़ना:
बीमारी बढ़ने पर कमजोरी, लड़खड़ाना, चलने में परेशानी और शरीर का संतुलन बिगड़ने जैसे न्यूरोलॉजिकल लक्षण दिखाई दे सकते हैं।
9. कमजोरी और लकवे के लक्षण:
रेबीज का एक रूप धीरे-धीरे होने वाले लकवे से जुड़ा होता है। इसमें जानवर की कमजोरी बढ़ सकती है और शरीर के कुछ हिस्सों में पैरालिसिस जैसी स्थिति विकसित हो सकती है। WHO भी रेबीज में लकवे और तंत्रिका तंत्र से जुड़े लक्षणों का उल्लेख करता है।
10. दौरे और बेहद असामान्य व्यवहार:
गंभीर अवस्था में कुत्ते को दौरे पड़ सकते हैं, वह भ्रमित दिखाई दे सकता है और उसकी गतिविधियां सामान्य व्यवहार से पूरी तरह अलग हो सकती हैं।
सिर्फ लक्षण देखकर न करें फैसला
यह समझना जरूरी है कि ऊपर बताए गए लक्षणों में से एक या कई लक्षण दिखाई देने का मतलब यह नहीं है कि कुत्ता निश्चित रूप से रेबीज से संक्रमित है। WHO की गाइडलाइन में भी संदिग्ध जानवर के व्यवहार, संपर्क की स्थिति और उपलब्ध जांच/निगरानी के आधार पर जोखिम का आकलन करने की बात कही गई है। इसलिए ऐसे कुत्ते को पकड़ने, भगाने या खुद जांचने की कोशिश न करें। सुरक्षित दूरी बनाए रखें और जरूरत पड़ने पर स्थानीय पशु चिकित्सा या संबंधित प्रशासन को सूचना दें।
कुत्ता काट ले तो 15 मिनट वाला नियम याद रखें
अगर किसी कुत्ते ने काट लिया या खरोंच दिया है तो सबसे जरूरी बात है कि लक्षण आने का इंतजार न करें। घाव को तुरंत साबुन या डिटर्जेंट और बहते पानी से कम से कम 15 मिनट तक अच्छी तरह धोएं और फ्लश करें। भारत के National Rabies Control Programme और WHO दोनों घाव की तत्काल और अच्छी तरह सफाई को रेबीज से बचाव की महत्वपूर्ण प्राथमिक कार्रवाई बताते हैं।
घाव धोने के बाद जल्द से जल्द स्वास्थ्य केंद्र या डॉक्टर से संपर्क करें। संपर्क की प्रकृति के आधार पर डॉक्टर रेबीज वैक्सीन और जरूरत पड़ने पर रेबीज इम्युनोग्लोबुलिन या अन्य उचित उपचार की सलाह दे सकते हैं। WHO के अनुसार, त्वचा को पार करने वाले काटने या खरोंच और टूटी त्वचा पर संक्रमित जानवर की लार लगने जैसी गंभीर स्थितियों में तत्काल चिकित्सा मूल्यांकन और PEP की जरूरत हो सकती है।
घाव पर मिर्च, तेजाब, क्षार या किसी तरह की जलन पैदा करने वाली चीज लगाने से बचना चाहिए। इसी तरह घरेलू नुस्खों के भरोसे इलाज में देरी करना खतरनाक हो सकता है।
सबसे जरूरी बात
रेबीज से बचाव में सावधानी ही सबसे बड़ा हथियार है। संदिग्ध या असामान्य व्यवहार करने वाले कुत्ते से दूरी बनाए रखें और बच्चों को ऐसे जानवरों के पास बिल्कुल न जाने दें। अगर काटने या खरोंच की घटना हो जाए, तो 15 मिनट तक घाव धोना और बिना देरी के डॉक्टर से संपर्क करना सबसे जरूरी कदम है। समय पर सही PEP मिलने से रेबीज को रोका जा सकता है।
