देहरादून: उत्तराखंड में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां अब तेज होती दिखाई दे रही हैं। भारत निर्वाचन आयोग की ओर से चुनाव कार्यक्रम की घोषणा अभी नहीं की गई है, लेकिन निर्वाचन मशीनरी ने चुनावी तैयारियों को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाना शुरू कर दिया है। इसी क्रम में मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने सभी जिलों को मतदान केंद्रों से लेकर कार्मिकों, वाहनों और इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों तक की तैयारियां समय रहते पूरी करने के निर्देश दिए हैं।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बीवीआरसी पुरुषोत्तम ने गुरुवार को सभी जिलों के जिलाधिकारियों और जिला निर्वाचन अधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक की। बैठक में आगामी विधानसभा सामान्य निर्वाचन की तैयारियों की समीक्षा की गई। अधिकारियों को भारत निर्वाचन आयोग की गाइडलाइन और इलेक्शन प्लानर के अनुसार चरणबद्ध तरीके से तैयारियां पूरी करने को कहा गया है।
इस बीच, चुनावी तैयारियों के लिहाज से सबसे महत्वपूर्ण गतिविधियों में से एक EVM की फर्स्ट लेवल चेकिंग यानी FLC भी होने जा रही है। जानकारी के अनुसार अक्टूबर के पहले सप्ताह में भारत निर्वाचन आयोग के विशेषज्ञों की टीम उत्तराखंड पहुंच सकती है और राज्य में उपलब्ध EVM की FLC की जाएगी।
अक्टूबर के पहले सप्ताह में EVM की FLC
आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए उत्तराखंड में मौजूद EVM की तकनीकी और भौतिक जांच की जाएगी। राज्य में करीब 23 हजार EVM उपलब्ध होने की जानकारी दी गई है। FLC के दौरान मशीनों की कार्यप्रणाली की जांच की जाएगी और जो मशीनें निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं पाई जाएंगी, उन्हें अलग किया जाएगा।
भारत निर्वाचन आयोग के अनुसार First Level Checking चुनाव से पहले EVM और VVPAT की जांच की एक निर्धारित प्रक्रिया है। इसमें मशीनों का भौतिक निरीक्षण और उनकी कार्यक्षमता की जांच की जाती है। यह प्रक्रिया मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में की जाती है।
FLC के दौरान यह भी देखा जाता है कि मशीनों के सभी आवश्यक हिस्से ठीक प्रकार से काम कर रहे हैं या नहीं। चुनाव प्रक्रिया में इस्तेमाल होने से पहले मशीनों की तकनीकी स्थिति सुनिश्चित करना इस प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के सामने होगी जांच
EVM की FLC केवल तकनीकी प्रक्रिया नहीं है, बल्कि इसमें राजनीतिक दलों की भागीदारी भी रहती है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार उत्तराखंड में भी जांच प्रक्रिया के दौरान राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को शामिल किया जाएगा।
मशीनों में डमी वोट डालकर उनकी कार्यप्रणाली की जांच की जाएगी। इसका उद्देश्य यह देखना होगा कि EVM निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार वोट रिकॉर्ड कर रही है या नहीं। जांच के दौरान जिन मशीनों में तकनीकी खामी सामने आएगी, उन्हें अलग किया जा सकता है।
ECI के आधिकारिक विवरण के मुताबिक FLC में पुराने चुनाव का डेटा साफ किया जाता है और मशीनों की विस्तृत जांच की जाती है। प्रशिक्षण और जागरूकता गतिविधियों के लिए भी केवल FLC में सही पाई गई मशीनों का इस्तेमाल किया जाता है।
जिलों को मतदान केंद्रों की व्यवस्थाएं दुरुस्त करने के निर्देश
EVM की FLC से पहले मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने जिलों को मतदान केंद्रों की व्यवस्थाओं को भी दुरुस्त करने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों से कहा गया है कि सभी मतदान केंद्रों का स्थलीय निरीक्षण कराया जाए।
निरीक्षण के दौरान मतदान केंद्र के भवन की स्थिति, बिजली की उपलब्धता, पेयजल, शौचालय और अन्य आवश्यक सुविधाओं की स्थिति की जांच की जाएगी। जहां किसी सुविधा की कमी है, वहां समय रहते उसे पूरा कराने को कहा गया है।
मतदान केंद्र चुनाव प्रक्रिया का सबसे महत्वपूर्ण स्थानीय स्तर का हिस्सा होते हैं। इसलिए आयोग की गाइडलाइन के अनुसार यहां मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिक तैयारियों में शामिल है।
DEO, RO और मास्टर ट्रेनर का प्रशिक्षण भी अहम
चुनाव की तैयारियों के तहत जिला निर्वाचन अधिकारियों, रिटर्निंग अधिकारियों और स्टेट लेवल मास्टर ट्रेनरों के प्रशिक्षण पर भी जोर दिया गया है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने जिलों को आयोग द्वारा निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को प्रशिक्षण में शामिल कराने के निर्देश दिए हैं।
इसके साथ ही बूथ और विधानसभा स्तर पर चुनाव ड्यूटी में लगाए जाने वाले कार्मिकों का विवरण तैयार करने को कहा गया है। चुनाव के दौरान बड़ी संख्या में सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों की तैनाती होती है। इसलिए उनकी उपलब्धता और जिम्मेदारियों का पूर्व निर्धारण चुनाव प्रबंधन का अहम हिस्सा माना जाता है।
जिलों को आवश्यक वाहनों की सूची तैयार करने के निर्देश भी दिए गए हैं। मतदान सामग्री, EVM, कर्मचारियों और अन्य आवश्यक संसाधनों की आवाजाही के लिए पर्याप्त परिवहन व्यवस्था चुनाव के दौरान जरूरी होती है।
SWEEP प्लान तैयार करने के निर्देश
बैठक में मतदाता जागरूकता से जुड़ी गतिविधियों को लेकर भी दिशा-निर्देश दिए गए। जिलों को SWEEP प्लान तैयार करने को कहा गया है। SVEEP यानी Systematic Voters’ Education and Electoral Participation के तहत मतदाताओं को चुनाव प्रक्रिया, मतदान और मतदाता अधिकारों के बारे में जागरूक किया जाता है।
इसके तहत नए मतदाताओं को मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने, मतदान केंद्र की जानकारी प्राप्त करने और मतदान प्रक्रिया को समझने जैसी गतिविधियों पर जोर दिया जाता है।
उत्तराखंड में चुनावी तैयारियों के बीच मतदाता सूची से जुड़े कार्य भी महत्वपूर्ण हैं। मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय की वेबसाइट पर 2026 से संबंधित विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR की गतिविधियों और राजनीतिक दलों के साथ बैठकों की जानकारी भी उपलब्ध है।
अगले महीने ECI के वरिष्ठ अधिकारियों के दौरे की तैयारी
चुनावी तैयारियों की समीक्षा के लिए भारत निर्वाचन आयोग के वरिष्ठ अधिकारी उत्तराखंड का दौरा कर सकते हैं। इस दौरान राज्य के सभी जिलों में चुनावी तैयारियों की स्थिति की समीक्षा किए जाने की संभावना है।
इसी को देखते हुए मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों को अपने-अपने जिले की तैयारियां निर्धारित समय सीमा में पूरी करने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों को कहा गया है कि मतदान केंद्रों की स्थिति, कार्मिक, परिवहन, प्रशिक्षण और अन्य व्यवस्थाओं से संबंधित जानकारी व्यवस्थित रूप से तैयार रखी जाए।
ECI का चुनाव प्रबंधन सिस्टम चुनावी गतिविधियों की योजना और समयबद्ध निगरानी के लिए विभिन्न डिजिटल मॉड्यूल का इस्तेमाल करता है। आयोग के अनुसार Election Planning Portal के माध्यम से आगामी चुनावों से जुड़ी योजनाओं और लंबित गतिविधियों की निगरानी की जाती है।
उत्तराखंड में मार्च 2027 तक है विधानसभा का कार्यकाल
उत्तराखंड विधानसभा के मौजूदा कार्यकाल की समाप्ति 28 मार्च 2027 को निर्धारित है। चुनाव की आधिकारिक तारीखों की घोषणा भारत निर्वाचन आयोग द्वारा अलग से की जाएगी। ECI के हालिया दस्तावेज में उत्तराखंड को 2026-27 में होने वाले विधानसभा चुनावों वाले राज्यों में शामिल किया गया है।
इस लिहाज से चुनावी तैयारियों का प्रशासनिक स्तर पर तेज होना स्वाभाविक है। हालांकि, चुनाव कार्यक्रम की अंतिम घोषणा होने तक मतदान की तारीख, नामांकन, मतदान चरण या मतगणना की तारीख को लेकर कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।
EVM से लेकर मतदान केंद्र तक तैयारियों की होगी जांच
आने वाले दिनों में उत्तराखंड में चुनावी मशीनरी की गतिविधियां और बढ़ सकती हैं। एक तरफ EVM और VVPAT की जांच होगी, तो दूसरी तरफ मतदान केंद्रों का निरीक्षण, कार्मिकों का प्रशिक्षण और वाहनों की व्यवस्था जैसे कार्य भी आगे बढ़ेंगे।
EVM की FLC पूरी होने के बाद सही पाई गई मशीनों को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आगे की चुनावी तैयारियों में शामिल किया जाता है। ECI के अनुसार चुनाव से पहले EVM/VVPAT की जांच कई स्तरों वाली चुनावी प्रक्रिया का हिस्सा है।
क्या बोले उप मुख्य निर्वाचन अधिकारी?
उप मुख्य निर्वाचन अधिकारी किशन सिंह नेगी के अनुसार, आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों के साथ तैयारियों की समीक्षा की गई है। जिलों को मतदान केंद्रों का स्थलीय निरीक्षण करने, वहां जरूरी व्यवस्थाएं दुरुस्त करने और चुनाव में लगाए जाने वाले कार्मिकों की सूची तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।
उन्होंने बताया कि चुनाव में इस्तेमाल होने वाली EVM की भी FLC की जाएगी और इसके लिए भारत निर्वाचन आयोग के विशेषज्ञों की टीम उत्तराखंड आएगी।
इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य चुनाव से पहले प्रशासनिक और तकनीकी तैयारियों को व्यवस्थित करना है, ताकि चुनाव कार्यक्रम घोषित होने के बाद जिला स्तर पर किसी प्रकार की तैयारी संबंधी कमी सामने न आए।
फिलहाल उत्तराखंड में चुनाव की तारीखों का आधिकारिक ऐलान नहीं हुआ है, लेकिन EVM की FLC, मतदान केंद्रों का निरीक्षण, अधिकारियों-कर्मचारियों का प्रशिक्षण, वाहनों की व्यवस्था और मतदाता जागरूकता अभियान जैसे कामों ने चुनावी तैयारियों को गति दे दी है। अब अक्टूबर में प्रस्तावित EVM जांच और केंद्रीय निर्वाचन आयोग के अधिकारियों के संभावित दौरे पर निगाह रहेगी।
