देहरादून: उत्तराखंड में वर्ष 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां लगातार तेज होती जा रही हैं। प्रमुख राजनीतिक दलों ने संगठन को मजबूत करने और संभावित उम्मीदवारों को लेकर तैयारियां शुरू कर दी हैं। इसी बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष डॉ. हरक सिंह रावत के एक बयान ने सहसपुर विधानसभा सीट को लेकर सियासी चर्चाओं को और तेज कर दिया है।
हरक सिंह रावत ने सहसपुर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने को लेकर अपनी दावेदारी के संकेत देते हुए बड़ा दावा किया है। उनके मुताबिक, यदि कांग्रेस हाईकमान उन्हें सहसपुर से चुनाव मैदान में उतारता है तो वह पार्टी को 20 हजार से अधिक वोटों के अंतर से जीत दिलाने का लक्ष्य लेकर मैदान में उतरेंगे। उन्होंने कहा कि वह क्षेत्र के राजनीतिक और सामाजिक समीकरणों को समझते हुए यह दावा कर रहे हैं।
हालांकि, अभी कांग्रेस की ओर से सहसपुर सीट पर हरक सिंह रावत की उम्मीदवारी को लेकर कोई अंतिम घोषणा नहीं हुई है। ऐसे में उनका बयान फिलहाल उनकी राजनीतिक इच्छा और संभावित दावेदारी के तौर पर देखा जा रहा है। कांग्रेस के भीतर टिकट को लेकर अंतिम निर्णय पार्टी नेतृत्व को करना है। फरवरी 2026 की एक रिपोर्ट में भी सहसपुर समेत हरक सिंह रावत की संभावित सीट को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं होने की बात सामने आई थी।
सहसपुर को लेकर क्यों बढ़ी हरक की सक्रियता?
सहसपुर विधानसभा सीट देहरादून जिले की महत्वपूर्ण सीटों में शामिल है। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में यहां भाजपा के सहदेव सिंह पुंडीर ने कांग्रेस के आर्येंद्र शर्मा को 8,355 वोटों के अंतर से हराया था। उपलब्ध चुनावी आंकड़ों के अनुसार पुंडीर को 64,008 और शर्मा को 55,653 वोट मिले थे।
2027 के चुनाव को देखते हुए सहसपुर में कांग्रेस की ओर से संभावित दावेदारों को लेकर चर्चा पहले से चल रही है। ऐसे में हरक सिंह रावत का नाम सामने आने से पार्टी के भीतर और क्षेत्र की राजनीति में नई चर्चा शुरू होना स्वाभाविक है। अगस्त 2026 में भी हरक सिंह रावत के सहसपुर से चुनाव लड़ने की संभावनाओं को लेकर राजनीतिक हलचल की रिपोर्ट सामने आई थी।
हरक सिंह रावत का राजनीतिक अनुभव और प्रदेश की अलग-अलग विधानसभा सीटों में सक्रियता उन्हें उत्तराखंड की राजनीति का जाना-पहचाना चेहरा बनाती है। ऐसे में यदि कांग्रेस उन्हें सहसपुर से चुनाव लड़ाने का फैसला करती है, तो इस सीट पर चुनावी मुकाबले का स्वरूप भी बदल सकता है।
‘सिर्फ एक सीट नहीं, आसपास की सीटों पर भी असर’
हरक सिंह रावत ने अपने दावे के साथ यह भी कहा है कि सहसपुर से चुनाव लड़ने का प्रभाव केवल एक विधानसभा क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा। उनके अनुसार सहसपुर से सटी देहरादून और हरिद्वार जिले की कुछ विधानसभा सीटों पर भी उनका राजनीतिक प्रभाव पड़ सकता है।
उनका तर्क है कि क्षेत्र के सामाजिक समीकरण, स्थानीय राजनीतिक संपर्क और आसपास के इलाकों में उनकी सक्रियता कांग्रेस के लिए अतिरिक्त लाभ का आधार बन सकती है। हालांकि, यह हरक सिंह रावत का राजनीतिक आकलन है और आगामी चुनाव में इसका वास्तविक प्रभाव मतदाताओं के फैसले पर निर्भर करेगा।
हरक पहले भी कह चुके हैं—पार्टी जहां कहेगी, वहीं से लड़ूंगा
दिलचस्प बात यह है कि हरक सिंह रावत इससे पहले भी अपनी चुनावी सीट को लेकर बयान दे चुके हैं। मई 2026 में उन्होंने कहा था कि पार्टी यदि उन्हें सहसपुर, धर्मपुर या कोटद्वार में से किसी सीट से चुनाव लड़ने को कहती है तो वह तैयार हैं। उस समय उन्होंने कहा था कि अंतिम निर्णय पार्टी को लेना है।
वहीं अगस्त 2026 में उनके एक बयान में यह भी सामने आया कि चुनाव लड़ना उनका अंतिम उद्देश्य नहीं है और उनकी प्राथमिकता उत्तराखंड में कांग्रेस की सरकार बनाना है। उन्होंने यह भी कहा था कि यदि किसी अन्य दावेदार के जीतने की क्षमता अधिक मानी जाती है तो पार्टी उसे टिकट दे सकती है।
इन बयानों को देखते हुए सहसपुर को लेकर हरक सिंह रावत की सक्रियता जरूर दिखाई दे रही है, लेकिन अंतिम टिकट किसे मिलेगा, यह कांग्रेस नेतृत्व के निर्णय के बाद ही स्पष्ट होगा।
कांग्रेस ने चुनावी तैयारियां तेज कीं
उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर कांग्रेस संगठन स्तर पर भी सक्रिय है। जुलाई 2026 में कांग्रेस ने आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों के तहत राजनीतिक मामलों की समिति गठित की थी, जिसमें प्रदेश के कई वरिष्ठ नेताओं के साथ हरक सिंह रावत को भी चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष के रूप में जिम्मेदारी दी गई है।
हरक सिंह रावत लगातार पार्टी कार्यकर्ताओं को चुनाव की तैयारियों में जुटने और संगठन को मजबूत करने का संदेश देते रहे हैं। मई 2026 में भी उन्होंने कांग्रेस कार्यकर्ताओं से एकजुट होकर 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारी करने का आह्वान किया था।
ऐसे में सहसपुर को लेकर उनका ताजा दावा उनकी चुनावी रणनीति और क्षेत्र में बढ़ती राजनीतिक सक्रियता के संदर्भ में देखा जा रहा है।
अब हाईकमान के फैसले पर टिकी निगाहें
हरक सिंह रावत के 20 हजार से अधिक वोटों से जीत के दावे के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या कांग्रेस हाईकमान उन्हें सहसपुर से टिकट देगा? फिलहाल इसका कोई आधिकारिक जवाब सामने नहीं आया है। पार्टी के भीतर अन्य संभावित दावेदार भी सक्रिय हैं और टिकट वितरण में संगठनात्मक समीकरण, स्थानीय राजनीतिक स्थिति और उम्मीदवार की स्वीकार्यता जैसे कई पहलुओं पर विचार होना तय है।
दूसरी ओर, सहसपुर में भाजपा के मौजूदा विधायक सहदेव सिंह पुंडीर के साथ पार्टी के भीतर अन्य दावेदारों की चर्चा भी जारी है। ऐसे में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सहसपुर में दोनों प्रमुख दलों की तैयारियां और टिकट की राजनीति आने वाले महीनों में और अधिक चर्चा में रह सकती है।
फिलहाल हरक सिंह रावत ने अपना दावा जनता और पार्टी नेतृत्व के सामने रख दिया है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कांग्रेस हाईकमान सहसपुर को लेकर क्या फैसला करता है और यदि हरक सिंह रावत को यहां से मैदान में उतारा जाता है तो उनके 20 हजार से अधिक वोटों से जीत के दावे का चुनावी मैदान में क्या असर दिखाई देता है।
