श्रीनगर परिसर में जय हो, छात्रम् और NSUI का दबदबा; अध्यक्ष पद पर हिमांशु ने ABVP प्रत्याशी को 1505 वोट से हराया, पौड़ी में भी NSUI का जलवा
श्रीनगर (पौड़ी गढ़वाल)। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय के सबसे बड़े बिड़ला परिसर श्रीनगर में छात्रसंघ चुनाव के नतीजों ने विश्वविद्यालय की छात्र राजनीति में बड़े बदलाव का संकेत दिया है। लंबे समय से ABVP के मजबूत प्रभाव वाले माने जाने वाले इस परिसर में इस बार विरोधी छात्र संगठनों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कई प्रमुख पदों पर कब्जा जमा लिया। अध्यक्ष पद पर जय हो छात्र संगठन के हिमांशु भंडारी ने ABVP के भुवन चमोली को 1505 मतों के बड़े अंतर से हराकर सबसे बड़ी जीत दर्ज की।
हिमांशु भंडारी को कुल 3301 वोट मिले, जबकि उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी ABVP के भुवन चमोली को 1796 वोट प्राप्त हुए। इस तरह हिमांशु ने 1505 वोटों के अंतर से अध्यक्ष पद अपने नाम किया। खास बात यह रही कि सिर्फ जीत ही नहीं, बल्कि जीत का इतना बड़ा अंतर भी श्रीनगर परिसर की छात्र राजनीति में चर्चा का विषय बन गया है।
मुख्य चुनाव अधिकारी प्रो. एमसी सती ने चुनाव परिणाम घोषित किए। चुनाव के दौरान सुरक्षा और व्यवस्थाओं के बीच मतदान और मतगणना की प्रक्रिया शांतिपूर्ण ढंग से पूरी हुई।
अध्यक्ष पद पर हिमांशु की बड़ी जीत, ABVP को करारा झटका
श्रीनगर बिड़ला परिसर के अध्यक्ष पद का मुकाबला इस बार खासा महत्वपूर्ण माना जा रहा था। एक तरफ ABVP के भुवन चमोली मैदान में थे, तो दूसरी तरफ जय हो छात्र संगठन ने हिमांशु भंडारी को प्रत्याशी बनाया था। परिणाम सामने आया तो हिमांशु ने 3301 मत हासिल कर शानदार जीत दर्ज की।
भुवन चमोली को 1796 वोट मिले। दोनों के बीच 1505 मतों का अंतर रहा। यह अंतर इस बात का संकेत माना जा रहा है कि इस बार छात्र मतदाताओं का एक बड़ा वर्ग ABVP के बजाय दूसरे विकल्पों की ओर गया।
इसी वजह से चुनाव परिणाम के बाद श्रीनगर परिसर को लेकर राजनीतिक और छात्र संगठनों के बीच चर्चा तेज हो गई है। हालांकि छात्रसंघ चुनाव सीधे तौर पर विधानसभा या लोकसभा चुनाव का परिणाम नहीं होते, लेकिन उत्तराखंड की छात्र राजनीति में विश्वविद्यालय परिसरों के नतीजों को भविष्य की राजनीतिक दिशा के संकेत के तौर पर जरूर देखा जाता रहा है।
उपाध्यक्ष पद पर छात्रम् के पुलकित अग्रवाल की जीत
अध्यक्ष पद के बाद उपाध्यक्ष पद पर भी ABVP को सफलता नहीं मिली। छात्रम् संगठन के पुलकित अग्रवाल ने शानदार प्रदर्शन करते हुए जीत दर्ज की।
पुलकित अग्रवाल को 2991 वोट प्राप्त हुए। उन्होंने अपनी निकटतम प्रतिद्वंद्वी प्रीति वर्मा को 945 मतों के अंतर से हराया। उपाध्यक्ष पद पर भी जीत का बड़ा अंतर छात्र मतदाताओं के रुझान को लेकर कई सवाल खड़े करता है।
छात्रम् की इस जीत ने श्रीनगर परिसर में संगठन की स्थिति को मजबूत किया है और आने वाले समय में छात्र राजनीति में इसकी सक्रियता बढ़ने के संकेत भी दिखाई दे रहे हैं।
सचिव पद पर मयंक बहुगुणा ने दर्ज की जीत
सचिव पद का मुकाबला भी काफी दिलचस्प रहा। यहां एसएसयूसीआई छात्र संगठन के मयंक बहुगुणा ने बाजी मारी। मयंक बहुगुणा को कुल 2708 वोट मिले।
उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी आर्यन छात्र संगठन के पंकज को 333 मतों से पराजित किया। सचिव पद का यह परिणाम भी बताता है कि इस बार श्रीनगर परिसर के छात्रों ने अलग-अलग संगठनों और प्रत्याशियों को समर्थन दिया।
एक तरफ अध्यक्ष पद जय हो संगठन के खाते में गया, तो उपाध्यक्ष छात्रम् और सचिव पद एसएसयूसीआई के प्रत्याशी ने जीत लिया। यानी प्रमुख पदों पर किसी एक संगठन का एकतरफा कब्जा नहीं रहा।
सह-सचिव पद पर निर्दलीय अमन कुनियाल की जीत
इस चुनाव में सबसे दिलचस्प परिणामों में से एक सह-सचिव पद का रहा। यहां किसी बड़े छात्र संगठन के प्रत्याशी के बजाय निर्दलीय उम्मीदवार अमन कुनियाल ने जीत दर्ज की।
अमन की जीत यह भी दर्शाती है कि छात्र मतदाताओं ने संगठनात्मक पहचान के बजाय व्यक्तिगत छवि, मुद्दों और प्रत्याशी की स्वीकार्यता को भी महत्व दिया। विश्वविद्यालय की छात्र राजनीति में निर्दलीय उम्मीदवार की जीत को महत्वपूर्ण संदेश के रूप में देखा जा रहा है।
कोषाध्यक्ष और कार्यकारिणी में भी जय हो का प्रभाव
कोषाध्यक्ष पद पर जय हो छात्र संगठन के रामरूप गुर्जर निर्विरोध निर्वाचित हुए। इसके अलावा कार्यकारिणी सदस्य पद पर ऋतु राज, अंकुर यादव, नवनीत कुमार और अभिराज नेगी भी निर्विरोध निर्वाचित हुए।
इस तरह अध्यक्ष पद के साथ कोषाध्यक्ष पद पर भी जय हो संगठन को सफलता मिली। चुनाव परिणामों में जय हो का प्रदर्शन इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि अध्यक्ष पद पर हिमांशु की बड़ी जीत ने संगठन को श्रीनगर परिसर की छात्र राजनीति में मजबूत स्थिति प्रदान की है।
यूआर पद पर आइसा के युवराज सिंह की जीत
विश्वविद्यालय प्रतिनिधि यानी यूआर पद पर आइसा के युवराज सिंह ने भी जीत दर्ज की। युवराज सिंह को 2979 वोट मिले, जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी अंशुमान कुमार श्रीवास्तव को 1826 वोट प्राप्त हुए।
इस तरह युवराज ने 1153 मतों के अंतर से जीत हासिल की। छात्रा प्रतिनिधि पद पर जय हो की सुनिधि सिंह विजयी रहीं। उन्हें 2105 वोट मिले और उन्होंने विद्यार्थी परिषद की प्रत्याशी गौतमी भट्ट को 91 वोट से हराया।
8776 मतदाता, 5208 ने किया मतदान
इस बार केंद्रीय गढ़वाल विश्वविद्यालय में कुल 8776 मतदाता थे, जिनमें से 5208 छात्र-छात्राओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया। मतदान सुबह आठ बजे शुरू हुआ और दोपहर दो बजे तक चला।
मतदान समाप्त होने के बाद सात टेबलों पर दो राउंड में मतगणना की गई। मतगणना की प्रक्रिया शाम करीब आठ बजे पूरी हुई, जिसके बाद परिणाम घोषित किए गए।
चुनाव शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न होने के बाद विजयी प्रत्याशियों और उनके समर्थकों में उत्साह देखने को मिला।
पौड़ी परिसर में NSUI का दबदबा
श्रीनगर परिसर के नतीजों के साथ ही विश्वविद्यालय के पौड़ी परिसर से भी कांग्रेस के छात्र संगठन NSUI के लिए अच्छी खबर सामने आई। पौड़ी परिसर में NSUI ने प्रमुख पदों पर शानदार प्रदर्शन किया।
अध्यक्ष पद पर NSUI के आयुष थपलियाल, सचिव पद पर NSUI के ऋषभ कुमार और कोषाध्यक्ष पद पर NSUI की अनीशा ने जीत दर्ज की।
इस तरह श्रीनगर और पौड़ी परिसर के चुनाव परिणामों को एक साथ देखा जाए तो छात्र राजनीति में अलग-अलग संगठनों की मजबूत मौजूदगी दिखाई देती है। श्रीनगर में जहां जय हो, छात्रम्, एसएसयूसीआई, निर्दलीय और आइसा ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई, वहीं पौड़ी परिसर में NSUI ने प्रमुख पदों पर कब्जा जमाया।
क्या गढ़वाल में बदल रहा है छात्र राजनीति का रुख?
गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय की छात्र राजनीति को लंबे समय से उत्तराखंड की व्यापक राजनीतिक परिस्थितियों की झलक के तौर पर देखा जाता रहा है। विश्वविद्यालय के छात्रसंघ चुनाव केवल कैंपस तक सीमित नहीं रहते, बल्कि इनका असर छात्र संगठनों की आगामी रणनीति और क्षेत्रीय राजनीति में भी चर्चा का विषय बनता है।
इस बार श्रीनगर परिसर में ABVP के प्रत्याशी की अध्यक्ष पद पर हार और वह भी 1505 वोटों के बड़े अंतर से, निश्चित रूप से संगठन के लिए बड़ा झटका है। वहीं पौड़ी परिसर में NSUI की सफलता ने कांग्रेस के छात्र संगठन के लिए उत्साह बढ़ाया है।
हालांकि इन परिणामों को सीधे तौर पर आगामी विधानसभा चुनाव का जनादेश मानना सही नहीं होगा, लेकिन यह जरूर कहा जा सकता है कि गढ़वाल के युवा मतदाताओं के बीच छात्र राजनीति में नए समीकरण उभरते दिखाई दे रहे हैं।
सरकार और राजनीतिक दलों के लिए भी विश्वविद्यालयों के यह परिणाम इसलिए महत्वपूर्ण हो सकते हैं, क्योंकि छात्र राजनीति अक्सर युवाओं के मुद्दों, रोजगार, शिक्षा, भर्ती परीक्षाओं, फीस, कैंपस सुविधाओं और स्थानीय समस्याओं के साथ सीधे जुड़ी रहती है।
ABVP के सामने नई चुनौती, विरोधी संगठनों को मिला बड़ा मनोबल
श्रीनगर परिसर में ABVP का प्रभाव लंबे समय से चर्चा में रहा है। ऐसे में अध्यक्ष पद पर 1505 वोटों की हार ने संगठन के सामने आत्ममंथन की चुनौती खड़ी कर दी है। दूसरी ओर जय हो, छात्रम्, NSUI, आइसा और अन्य छात्र संगठनों को इन परिणामों से निश्चित तौर पर नया मनोबल मिला है।
सबसे अहम बात यह है कि इस बार छात्रों ने किसी एक संगठन को सभी प्रमुख पद नहीं दिए। परिणामों में अलग-अलग संगठनों की जीत से साफ है कि छात्र मतदाताओं ने प्रत्याशियों और मुद्दों के आधार पर भी मतदान किया।
अब देखना यह होगा कि इन चुनाव परिणामों के बाद ABVP अपनी रणनीति में क्या बदलाव करता है और दूसरी ओर जीत हासिल करने वाले छात्र संगठन अपने चुनावी वादों को जमीन पर किस तरह लागू करते हैं।
गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय के इस छात्रसंघ चुनाव ने फिलहाल इतना जरूर स्पष्ट कर दिया है कि श्रीनगर परिसर की छात्र राजनीति में समीकरण बदल रहे हैं। ABVP के मजबूत गढ़ में विरोधी संगठनों की सेंध और अध्यक्ष पद पर 1505 वोटों की बड़ी जीत ने पूरे चुनाव परिणाम को खास बना दिया है। अब इन नतीजों को गढ़वाल की बदलती युवा राजनीति के संकेत के तौर पर कितना देखा जाए, यह आने वाले समय में तय होगा।
