बेंगलुरु/हल्द्वानी। उत्तराखंड के हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की जनसभा के बाद हुए कथित ‘शुद्धिकरण अनुष्ठान’ का मामला अब कर्नाटक तक पहुंच गया है। इस मामले में बेंगलुरु पुलिस ने एक शिकायत के आधार पर जीरो एफआईआर दर्ज की है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि हल्द्वानी के रामलीला मैदान में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की जनसभा के बाद कथित तौर पर शुद्धिकरण पूजा की गई। इस घटना को लेकर राजनीतिक विवाद पहले ही तेज हो चुका था और अब बेंगलुरु में एफआईआर दर्ज होने के बाद मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है।
जानकारी के मुताबिक, हल्द्वानी के रामलीला मैदान में 8 अगस्त 2026 को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की जनसभा आयोजित हुई थी। आरोप है कि जनसभा के बाद 10 अगस्त को स्थानीय भाजपा नेताओं की ओर से मैदान में शुद्धिकरण पूजा की गई। शिकायत में दावा किया गया कि यह अनुष्ठान खड़गे के अनुसूचित जाति से होने के कारण मैदान के कथित रूप से ‘अपवित्र’ होने की धारणा के आधार पर किया गया। हालांकि, इस आरोप को लेकर भाजपा की ओर से अलग पक्ष सामने रखा गया है और अनुष्ठान को सामान्य धार्मिक आयोजन बताया गया है।
बेंगलुरु में दर्ज हुई जीरो एफआईआर
बेंगलुरु के विधान सौधा पुलिस स्टेशन में कांग्रेस की अनुसूचित जनजाति इकाई के पूर्व उपाध्यक्ष टी.आर. रामप्पा की शिकायत के आधार पर जीरो एफआईआर दर्ज की गई। उन्होंने 31 अगस्त को पुलिस में शिकायत दी थी। पुलिस के मुताबिक शिकायत और कानूनी सलाह लेने के बाद 4 सितंबर को मामला दर्ज किया गया।
एफआईआर में नागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1955 की संबंधित धाराओं, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम, 1989 की धारा 3(1)(u) और भारतीय न्याय संहिता की धारा 196(1)(b) का उल्लेख किया गया है। भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धारा अलग-अलग समूहों के बीच वैमनस्य या दुश्मनी की भावना को बढ़ावा देने से जुड़े मामलों पर लागू होती है।
चूंकि कथित घटना उत्तराखंड के हल्द्वानी में हुई थी, इसलिए बेंगलुरु में दर्ज एफआईआर को जीरो एफआईआर के तौर पर दर्ज किया गया है। आगे मामले को संबंधित क्षेत्र के पुलिस थाने को स्थानांतरित किए जाने की प्रक्रिया हो सकती है।
शिकायत में क्या आरोप लगाए गए?
शिकायतकर्ता टी.आर. रामप्पा ने आरोप लगाया कि खड़गे की जनसभा के बाद स्थानीय भाजपा नेताओं ने मैदान में शुद्धिकरण पूजा की। शिकायत में यह दावा भी किया गया कि ऐसा इसलिए किया गया क्योंकि खड़गे अनुसूचित जाति समुदाय से आते हैं। शिकायतकर्ता ने इसे जाति आधारित भेदभाव और सामाजिक समानता के मूल सिद्धांतों के खिलाफ बताया है।
शिकायत में उत्तराखंड भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट का भी उल्लेख किया गया है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि उन्होंने मीडिया के सामने इस कार्रवाई को उचित ठहराया था। हालांकि, मामले में लगाए गए सभी आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
यह विवाद सामने आने के बाद कांग्रेस ने इसे सामाजिक भेदभाव और संविधान की भावना से जुड़ा मुद्दा बताया, जबकि भाजपा की ओर से इसे अलग तरीके से प्रस्तुत किया गया।
राज्यसभा में खड़गे ने उठाया था मामला
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने 13 अगस्त को राज्यसभा में इस मुद्दे को उठाया था। इसके बाद उन्होंने राज्यसभा में सदन के नेता जेपी नड्डा को पत्र लिखकर घटना पर चिंता जताई और एफआईआर दर्ज करने में हुई देरी पर सवाल उठाए।
खड़गे ने अपने पत्र में कथित शुद्धिकरण प्रक्रिया को संविधान की भावना और मानवीय मूल्यों के विपरीत बताया था। उन्होंने इस घटना को छुआछूत की प्रथा से जोड़ते हुए इसे सामाजिक समानता के लिए गंभीर सवाल बताया।
खड़गे ने इस संदर्भ में डॉ. भीमराव अंबेडकर के 1927 के महाड सत्याग्रह का भी उल्लेख किया। महाड सत्याग्रह सार्वजनिक चावदार तालाब से दलितों को पानी लेने के अधिकार और सामाजिक समानता के संघर्ष से जुड़ा ऐतिहासिक आंदोलन था। खड़गे ने कथित घटना की तुलना उस ऐतिहासिक संघर्ष से करते हुए सामाजिक भेदभाव के खिलाफ अपनी बात रखी।
राहुल गांधी के खिलाफ भी एफआईआर
इसी विवाद के बीच हल्द्वानी पुलिस ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज की है। यह मामला एक शिकायत के आधार पर दर्ज किए जाने की बात सामने आई है। शिकायत में आरोप लगाया गया कि राहुल गांधी ने कथित शुद्धिकरण अनुष्ठान की घटना को जातिवादी रंग दिया।
दूसरी ओर, कांग्रेस ने राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज एफआईआर को राजनीतिक मुद्दे से ध्यान भटकाने की कोशिश बताया है। कांग्रेस का कहना है कि मूल सवाल कथित शुद्धिकरण अनुष्ठान को लेकर उठे आरोपों का है और इस मुद्दे पर कार्रवाई की जानी चाहिए।
भाजपा की ओर से हालांकि कथित अनुष्ठान को सामान्य धार्मिक प्रक्रिया बताया गया है। ऐसे में दोनों राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है।
कई राज्यों में सामने आई शिकायतें
इस घटना को लेकर देश के अलग-अलग हिस्सों में भी शिकायतें और एफआईआर दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। बताया गया है कि इसी घटना से संबंधित मामलों में देशभर में कम से कम आठ स्थानों पर एफआईआर दर्ज की गई हैं। इससे स्पष्ट है कि हल्द्वानी का यह स्थानीय विवाद अब व्यापक राजनीतिक और कानूनी मुद्दे का रूप ले चुका है।
फिलहाल बेंगलुरु में दर्ज जीरो एफआईआर के बाद मामले की जांच संबंधित क्षेत्र में आगे बढ़ने की संभावना है। पुलिस शिकायत में लगाए गए आरोपों, संबंधित लोगों की भूमिका और कथित धार्मिक अनुष्ठान की परिस्थितियों की जांच करेगी।
अब जांच और राजनीतिक प्रतिक्रियाओं पर नजर
हल्द्वानी के रामलीला मैदान से शुरू हुआ यह विवाद अब राजनीतिक बयानबाजी से आगे बढ़कर कानूनी प्रक्रिया में पहुंच गया है। एक तरफ कांग्रेस इसे जातिगत भेदभाव और संवैधानिक मूल्यों से जोड़ रही है, तो दूसरी तरफ भाजपा इसे राजनीतिक रूप से पेश किए जा रहे विवाद के तौर पर देख रही है।
बेंगलुरु में जीरो एफआईआर दर्ज होने के बाद अब जांच की दिशा और आगे की कानूनी कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी। साथ ही, राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज एफआईआर भी इस विवाद को और राजनीतिक रूप दे रही है।
फिलहाल पूरे मामले में दोनों पक्षों के आरोप और दावे सामने हैं। कथित शुद्धिकरण अनुष्ठान वास्तव में किन परिस्थितियों में हुआ, उसका उद्देश्य क्या था और शिकायत में लगाए गए आरोप जांच में कितने सही पाए जाते हैं, इसका फैसला संबंधित जांच और कानूनी प्रक्रिया के बाद ही होगा। इस बीच हल्द्वानी की घटना को लेकर उत्तराखंड से लेकर कर्नाटक तक सियासी माहौल गरम बना हुआ है और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी और कानूनी कार्रवाई दोनों तेज होने की संभावना है।
