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Reading: ‘मिशन यूपी’ पर कांग्रेस का बड़ा दांव! 7 सितंबर से मुजफ्फरनगर में किसान यात्रा का आगाज, पश्चिम से पूर्वांचल तक गूंजेंगे किसानों के मुद्दे
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The Hill India > Blog > उत्तर प्रदेश > ‘मिशन यूपी’ पर कांग्रेस का बड़ा दांव! 7 सितंबर से मुजफ्फरनगर में किसान यात्रा का आगाज, पश्चिम से पूर्वांचल तक गूंजेंगे किसानों के मुद्दे
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‘मिशन यूपी’ पर कांग्रेस का बड़ा दांव! 7 सितंबर से मुजफ्फरनगर में किसान यात्रा का आगाज, पश्चिम से पूर्वांचल तक गूंजेंगे किसानों के मुद्दे

The Hill India News
Last updated: September 2, 2026 11:46 am
The Hill India News
Published: September 2, 2026
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लखनऊ। उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी गतिविधियां धीरे-धीरे तेज होने लगी हैं। चुनावी तैयारियों के बीच कांग्रेस ने किसानों को केंद्र में रखकर प्रदेश की राजनीति में अपनी सक्रियता बढ़ाने की रणनीति तैयार की है। पार्टी की किसान इकाई की ओर से 7 सितंबर को पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर से राज्यव्यापी किसान यात्रा शुरू करने की तैयारी है। यह यात्रा पश्चिमी यूपी से शुरू होकर प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से गुजरते हुए पूर्वांचल तक पहुंचने की योजना के साथ आगे बढ़ेगी।

Contents
मुजफ्फरनगर से शुरू होगा अभियानएमएसपी की कानूनी गारंटी बनेगा बड़ा मुद्दागन्ना किसानों के बकाया भुगतान पर सरकार को घेरेगी कांग्रेसडीएपी, बीज और बिजली की बढ़ती लागत पर भी हमलाछुट्टा पशु भी बनेंगे चुनावी मुद्दागांव-गांव लगेंगी किसान चौपाल2027 से पहले संगठन मजबूत करने की कोशिश

कांग्रेस का दावा है कि किसान यात्रा के माध्यम से खेती-किसानी से जुड़े जमीनी मुद्दों को प्रमुखता से उठाया जाएगा और गांव-गांव जाकर किसानों से सीधा संवाद किया जाएगा। पार्टी नेताओं का कहना है कि उत्तर प्रदेश जैसे बड़े कृषि प्रधान राज्य में किसानों की समस्याओं को नजरअंदाज करके कोई भी राजनीतिक रणनीति पूरी नहीं हो सकती। ऐसे में कांग्रेस अब किसानों के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने और संगठन को गांवों तक पहुंचाने की कोशिश में जुट गई है।

मुजफ्फरनगर से शुरू होगा अभियान

किसान यात्रा के लिए मुजफ्फरनगर को शुरुआती स्थान के तौर पर चुना जाना राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश लंबे समय से गन्ना किसानों, फसल के दाम, बकाया भुगतान और कृषि लागत जैसे मुद्दों को लेकर चर्चा में रहा है। कांग्रेस इसी क्षेत्र से अभियान की शुरुआत कर किसानों के बीच अपनी मौजूदगी मजबूत करने का संदेश देना चाहती है।

यात्रा के दौरान पार्टी के नेता किसानों से मुलाकात करेंगे और उनकी स्थानीय समस्याओं को समझने का प्रयास करेंगे। इसके बाद अभियान को प्रदेश के दूसरे हिस्सों तक ले जाने की तैयारी है। कांग्रेस की कोशिश है कि किसान यात्रा केवल एक राजनीतिक कार्यक्रम बनकर न रह जाए, बल्कि इसे गांवों और खेतों तक पहुंचने वाले जनसंपर्क अभियान के रूप में आगे बढ़ाया जाए।

एमएसपी की कानूनी गारंटी बनेगा बड़ा मुद्दा

कांग्रेस किसान यात्रा के दौरान न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी एमएसपी की कानूनी गारंटी के मुद्दे को प्रमुखता से उठाने की तैयारी में है। पार्टी का कहना है कि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिलना चाहिए और फसल बेचने के बाद उन्हें आर्थिक अनिश्चितता का सामना नहीं करना चाहिए।

कांग्रेस नेताओं के मुताबिक किसानों की आय, फसल का उचित मूल्य और बाजार में उनकी स्थिति जैसे सवालों पर गांवों में व्यापक चर्चा की जाएगी। पार्टी इन मुद्दों को प्रदेश की राजनीतिक बहस का हिस्सा बनाने की कोशिश करेगी।

गन्ना किसानों के बकाया भुगतान पर सरकार को घेरेगी कांग्रेस

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में गन्ना किसानों के भुगतान का मुद्दा भी कांग्रेस के अभियान का अहम हिस्सा रहने वाला है। पार्टी का आरोप है कि कई किसानों को समय पर गन्ने का भुगतान नहीं मिलने के कारण आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

कांग्रेस इस मुद्दे को किसान यात्रा के दौरान जोरदार तरीके से उठाने की तैयारी में है। पार्टी नेताओं का कहना है कि किसान को अपनी फसल का भुगतान समय पर मिलना चाहिए, क्योंकि खेती की अगली फसल, परिवार की जरूरतों और अन्य खर्चों के लिए किसान इसी आय पर निर्भर रहता है।

डीएपी, बीज और बिजली की बढ़ती लागत पर भी हमला

किसान यात्रा में केवल फसल के दाम और भुगतान का मुद्दा ही नहीं रहेगा। कांग्रेस खेती की बढ़ती लागत को भी प्रमुख राजनीतिक विषय बनाने की तैयारी में है। पार्टी का कहना है कि डीएपी खाद, बीज, कीटनाशक, सिंचाई और बिजली समेत कृषि से जुड़े कई खर्च लगातार किसानों पर दबाव बढ़ा रहे हैं।

कांग्रेस का तर्क है कि जब खेती में लागत बढ़ती है और किसानों को उपज का अपेक्षित मूल्य नहीं मिलता, तो उनकी आर्थिक स्थिति प्रभावित होती है। ऐसे में पार्टी खेती की लागत कम करने और किसानों को बेहतर आर्थिक सुरक्षा देने से जुड़े सवालों को यात्रा के दौरान उठाएगी।

छुट्टा पशु भी बनेंगे चुनावी मुद्दा

उत्तर प्रदेश के कई ग्रामीण इलाकों में छुट्टा पशुओं की समस्या किसानों के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है। कांग्रेस इस मुद्दे को भी किसान यात्रा में प्रमुखता से उठाने वाली है।

पार्टी का कहना है कि किसानों को अपनी फसल बचाने के लिए रात-रातभर खेतों की रखवाली करनी पड़ती है। छुट्टा पशुओं से फसल को नुकसान होने की स्थिति में किसान को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। कांग्रेस इस समस्या को गांवों में किसानों से सीधे बातचीत के जरिए समझने और इसे सरकार के सामने मजबूती से रखने की योजना बना रही है।

गांव-गांव लगेंगी किसान चौपाल

कांग्रेस की रणनीति में किसान चौपालों को भी विशेष स्थान दिया गया है। यात्रा के दौरान गांवों, कस्बों और अन्य ग्रामीण क्षेत्रों में किसान चौपाल आयोजित करने की योजना है। इन चौपालों में पार्टी नेता किसानों से सीधे संवाद करेंगे और उनकी समस्याओं को सुनेंगे।

कांग्रेस का उद्देश्य केवल बड़े मंचों से भाषण देना नहीं, बल्कि किसानों के बीच जाकर उनकी स्थानीय समस्याओं को समझना बताया जा रहा है। इसके जरिए पार्टी अपने जमीनी संगठन को भी मजबूत करना चाहती है।

2027 से पहले संगठन मजबूत करने की कोशिश

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले कांग्रेस के लिए यह अभियान राजनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पार्टी लंबे समय से प्रदेश में अपने संगठन को मजबूत करने और मतदाताओं के बीच अपनी राजनीतिक जमीन बढ़ाने की कोशिश कर रही है।

किसान यात्रा के जरिए कांग्रेस एक तरफ किसानों के मुद्दों को उठाएगी, वहीं दूसरी तरफ गांवों में अपने कार्यकर्ताओं की सक्रियता बढ़ाने का प्रयास करेगी। पार्टी की रणनीति किसानों के साथ सीधे संपर्क को चुनावी तैयारी से जोड़ने की दिखाई दे रही है।

कांग्रेस अब किसानों और अन्य सामाजिक मुद्दों को साथ लेकर प्रदेश में अपना राजनीतिक आधार मजबूत करने की कोशिश कर रही है। ऐसे में 7 सितंबर को मुजफ्फरनगर से शुरू होने वाली किसान यात्रा आने वाले दिनों में उत्तर प्रदेश की राजनीति में नई हलचल पैदा कर सकती है। पश्चिमी यूपी से लेकर पूर्वांचल तक अगर यह अभियान प्रभावी तरीके से पहुंचता है, तो किसानों से जुड़े मुद्दे 2027 के विधानसभा चुनाव की राजनीतिक बहस में महत्वपूर्ण स्थान हासिल कर सकते हैं।

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