काठमांडू: नेपाल और चीन-नेपाल सीमा से लगे इलाकों में आई विनाशकारी बाढ़ ने भारी तबाही मचा दी है। लगातार सामने आ रही जानकारी के मुताबिक इस प्राकृतिक आपदा में अब तक 586 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 2400 से अधिक लोग लापता बताए जा रहे हैं। लापता लोगों में बड़ी संख्या में विदेशी नागरिकों के साथ भारतीय नागरिक भी शामिल हैं। करीब 320 भारतीय नागरिकों के या तो लापता होने या उनसे संपर्क नहीं हो पाने की जानकारी सामने आई है। हालात की गंभीरता को देखते हुए नेपाल में बड़े पैमाने पर राहत और बचाव अभियान चलाया जा रहा है।
नेपाल-तिब्बत सीमा के आसपास के पहाड़ी क्षेत्रों में आई अचानक बाढ़ और उसके बाद मची तबाही ने कई गांवों, सड़कों और महत्वपूर्ण संपर्क मार्गों को प्रभावित किया है। कई स्थानों पर बाढ़ का पानी और मलबा इतनी तेजी से आया कि लोगों को संभलने तक का मौका नहीं मिला। कई इलाकों में घर और अन्य निर्माण पानी के तेज बहाव में बह गए। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में बड़ी संख्या में लोग फंसे हुए हैं और राहत एजेंसियां लगातार उन्हें सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने में जुटी हैं।
न्यूज एजेंसी एएफपी के अनुसार, नेपाल-तिब्बत बॉर्डर के आसपास हुई इस त्रासदी में कई गांवों के बह जाने के बाद 2400 से अधिक लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। वहीं, अब तक 586 लोगों की मौत की पुष्टि की जा चुकी है। द हिमालयन टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, लापता लोगों में बड़ी संख्या में विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। आपदा के कारण कई क्षेत्रों में संचार व्यवस्था प्रभावित होने से लापता लोगों के बारे में सही जानकारी जुटाना भी बचाव एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।
नेपाल की नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी (NDRRMA) ने राहत और बचाव अभियान को तेज कर दिया है। शुक्रवार शाम सात बजे तक उपलब्ध जानकारी के अनुसार, रेस्क्यू ऑपरेशन में 15,431 सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया है। इनमें नेपाल आर्मी के 6,755 जवान, नेपाल पुलिस के 4,473 जवान और आर्म्ड पुलिस फोर्स के 4,203 जवान शामिल हैं। ये जवान प्रभावित इलाकों में फंसे लोगों को निकालने, शवों की तलाश करने, राहत सामग्री पहुंचाने और संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने का काम कर रहे हैं।
बाढ़ की भयावहता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि अलग-अलग जिलों से बड़ी संख्या में शव बरामद किए गए हैं। NDRRMA के आंकड़ों के मुताबिक, चितवन में सबसे ज्यादा 233 शव बरामद हुए हैं। इसके बाद नवलपरासी ईस्ट में 154, गोरखा में 46, धाडिंग में 40, नुवाकोट में 37, तनहुन में 30, नवलपरासी वेस्ट में 27 और रसुवा में 12 शव बरामद किए गए हैं। राहत एवं बचाव टीमें अभी भी कई इलाकों में तलाशी अभियान चला रही हैं, इसलिए मृतकों और लापता लोगों की संख्या में आगे और बदलाव होने की आशंका बनी हुई है।
1,924 लोगों की तलाश जारी
NDRRMA के अनुसार, एक आंकड़े में 1,924 लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। लापता लोगों में आम नागरिकों के अलावा हाइड्रोपावर परियोजनाओं में काम करने वाले कर्मचारी, विदेशी नागरिक, सुरक्षा बलों के जवान और सरकारी कर्मचारी भी शामिल हैं। अकेले हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट्स में काम करने वाले 933 कर्मचारी लापता बताए गए हैं। इसके अलावा 517 विदेशी नागरिकों का भी अभी तक पता नहीं चल पाया है।
लापता लोगों की सूची में नेपाल आर्मी के 45 जवान, नेपाल पुलिस के 28 जवान और आर्म्ड पुलिस फोर्स के 13 जवान शामिल हैं। इसके अलावा कस्टम ऑफिस के 15 कर्मचारी और इमिग्रेशन ऑफिस के 15 कर्मचारी भी लापता बताए गए हैं। लांगटांग नेशनल पार्क से भी तीन लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। इससे स्पष्ट है कि बाढ़ ने केवल आम आबादी को ही नहीं, बल्कि सरकारी और सुरक्षा तंत्र से जुड़े लोगों को भी प्रभावित किया है।
4,451 लोगों को सुरक्षित निकाला गया
भीषण परिस्थितियों के बीच राहत एवं बचाव टीमों ने अब तक 4,451 लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने में सफलता हासिल की है। इनमें शुक्रवार को हाइड्रोइलेक्ट्रिक टनल से सुरक्षित निकाले गए 191 लोग भी शामिल हैं। इसके अलावा हवाई रास्ते से 517 लोगों को सुरक्षित निकाला गया। बचाए गए लोगों में 129 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं।
बचाव अभियान के दौरान सुरक्षाकर्मियों को कई मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। कई इलाकों में सड़कें टूट गई हैं और पहाड़ी रास्तों पर भारी मात्रा में मलबा जमा है। ऐसे में प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचना आसान नहीं है। कई स्थानों पर बचाव दलों को पैदल या विशेष उपकरणों की मदद से आगे बढ़ना पड़ रहा है। हवाई बचाव अभियान भी चलाया जा रहा है ताकि उन लोगों तक जल्द पहुंचा जा सके जहां जमीनी रास्तों से पहुंचना संभव नहीं है।
शवों को सुरक्षित रखने की चुनौती बढ़ी
बाढ़ के बाद एक और गंभीर समस्या शवों के प्रबंधन की सामने आ रही है। कास्की के मुख्य जिला अधिकारी कुमन सिंह गुरुंग के अनुसार, कास्की अस्पताल की कुल क्षमता 88 शवों की है, जबकि अलग-अलग जिलों से लगातार शव यहां लाए जा रहे हैं। अब तक 47 शव वहां पहुंच चुके हैं और अभी भी अन्य शव मिलने का सिलसिला जारी है।
अधिकारी के मुताबिक, यदि बड़ी संख्या में अज्ञात शव लगातार आते रहे तो उन्हें लंबे समय तक सुरक्षित रखना मुश्किल हो सकता है। प्रशासन फिलहाल ‘अज्ञात और लावारिस शवों के प्रबंधन के लिए दिशानिर्देश, 2021’ के तहत शवों का प्रबंधन कर रहा है। इसके लिए जिला पुलिस प्रमुख की अध्यक्षता वाली समिति जिम्मेदार है। शवों की पहचान कराने के लिए भी प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि उन्हें उनके परिवारों तक पहुंचाया जा सके।
असम के 12 लोग भी लापता
नेपाल में आई बाढ़ के बाद भारत के अलग-अलग राज्यों के लोगों के लापता होने की खबरें लगातार सामने आ रही हैं। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने बताया कि राज्य के 12 लोगों का अभी तक पता नहीं चल पाया है। राज्य सरकार और प्रशासन इन लोगों से संपर्क स्थापित करने और उनके ठिकाने का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया के माध्यम से बताया कि लापता लोगों की सूची तैयार की गई है। इनमें असम के अलग-अलग जिलों के लोग शामिल हैं। सूची में कार्बी आंगलोंग, गोलाघाट, होजई, कामरूप मेट्रोपॉलिटन और नलबाड़ी जैसे जिलों से संबंधित लोग बताए गए हैं।
लापता लोगों के परिवार लगातार प्रशासन के संपर्क में हैं और उन्हें उम्मीद है कि बचाव अभियान के जरिए उनके परिजनों को जल्द सुरक्षित खोज लिया जाएगा। अधिकारियों की कोशिश है कि नेपाल में मौजूद संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित कर इन लोगों के बारे में जल्द से जल्द जानकारी हासिल की जाए।
ईशा फाउंडेशन के 77 तीर्थयात्रियों का भी पता नहीं
बाढ़ की इस त्रासदी के बीच ईशा फाउंडेशन से जुड़े 77 तीर्थयात्रियों को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। चीन-नेपाल सीमा के पास आई बाढ़ के बाद से इस समूह से संपर्क नहीं हो पाया है। समूह में 19 देशों के लोग शामिल बताए जा रहे हैं।
समूह की समन्वयक मा गंभीरी ने बताया कि पिछले दो दिनों से इन 77 तीर्थयात्रियों के संबंध में कोई नई जानकारी नहीं मिली है। उन्होंने बताया कि आध्यात्मिक गुरु जग्गी वासुदेव, जिन्हें सद्गुरु के नाम से जाना जाता है, मदद के लिए ग्यिरोंग जाने की इच्छा रखते थे, लेकिन उन्हें इसकी अनुमति नहीं मिली।
समूह की ओर से भारत, चीन और नेपाल में संबंधित दूतावासों से संपर्क किया गया है। इसके अलावा भारत और नेपाल के विभिन्न कार्यालयों और मंत्रालयों से भी मदद और जानकारी हासिल करने के प्रयास किए जा रहे हैं। बचाव दल प्रभावित इलाकों में सक्रिय हैं, लेकिन कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और संपर्क व्यवस्था प्रभावित होने के कारण अभी तक इस समूह के बारे में ठोस जानकारी सामने नहीं आ सकी है।
बंगाल के भी 39 लोग लापता, विशेष टीम भेजने की तैयारी
नेपाल और तिब्बत में फंसे भारतीय नागरिकों में पश्चिम बंगाल के लोग भी शामिल हैं। शुरुआती जानकारी में बंगाल के 32 लोगों के लापता होने की बात सामने आई थी, लेकिन बाद में यह संख्या बढ़कर 39 तक पहुंच गई। इनमें से दो लोगों का पता चल गया है। बताया गया है कि पोद्दार परिवार के दो सदस्य बीरगंज के पास सुरक्षित हैं और उन्हें ट्रेन के जरिए वापस लाने की व्यवस्था की जा रही है।
बाकी लोगों की तलाश के लिए पश्चिम बंगाल सरकार ने काठमांडू में विशेष टीम भेजने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री ने लापता लोगों के परिवारों से मुलाकात कर उन्हें हर संभव मदद का भरोसा दिया है। प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों ने भी परिवारों से जानकारी साझा की और नेपाल में चल रहे बचाव अभियान के संबंध में उन्हें अपडेट दिया।
कैलाश मानसरोवर यात्रा के दौरान कई पर्यटकों के कोसी नदी के आसपास फंसे होने की जानकारी भी सामने आई है। ऐसे में सरकार की प्राथमिकता लोगों को सुरक्षित निकालना और उनके परिवारों तक सही जानकारी पहुंचाना है।
चीन में करीब 400 भारतीय सुरक्षित
भारत सरकार भी स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि नेपाल-तिब्बत सीमा पर आई बाढ़ के बाद 320 भारतीय नागरिक या तो लापता हैं या उनसे संपर्क नहीं हो पाया है।
उन्होंने बताया कि अब तक 84 भारतीय नागरिकों को बचाया जा चुका है। इनमें तमिलनाडु के 21 लोग शामिल हैं, जबकि 63 लोग त्रिशूली-I प्रोजेक्ट से जुड़े हुए थे। इसके अलावा चीन में करीब 400 भारतीय नागरिक सुरक्षित बताए गए हैं। भारतीय दूतावास उनके संपर्क में है और उन्हें वहां से निकालने की प्रक्रिया जारी है।
भारत सरकार की ओर से नेपाल और चीन के संबंधित अधिकारियों के साथ संपर्क बनाए रखा जा रहा है। प्राथमिकता उन भारतीय नागरिकों का पता लगाना है जिनसे संपर्क टूट गया है और उन्हें सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाना है।
राहत और बचाव अभियान के बीच बढ़ी चुनौतियां
नेपाल में जारी यह आपदा राहत एजेंसियों के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण साबित हो रही है। पहाड़ी क्षेत्रों में अचानक आई बाढ़, सड़क संपर्क टूटने, मलबा जमा होने और कई क्षेत्रों में संचार व्यवस्था प्रभावित होने के कारण बचाव अभियान में मुश्किलें आ रही हैं। इसके बावजूद नेपाल की सेना, पुलिस और सशस्त्र पुलिस बल के हजारों जवान लगातार अभियान में जुटे हुए हैं।
रेस्क्यू टीमों का एक बड़ा हिस्सा फंसे हुए लोगों को निकालने के साथ-साथ शवों की तलाश और पहचान में लगा है। दूसरी ओर, प्रभावित लोगों तक भोजन, पानी, चिकित्सा सहायता और अन्य जरूरी सामग्री पहुंचाने के प्रयास भी किए जा रहे हैं।
सबसे बड़ी चुनौती अभी भी लापता लोगों का पता लगाना है। अलग-अलग सरकारी एजेंसियों के आंकड़ों में अंतर होने के कारण वास्तविक संख्या का आकलन करना भी कठिन हो रहा है। विदेशी नागरिकों और दूसरे देशों के पर्यटकों के लापता होने से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता बढ़ गई है।
फिलहाल नेपाल में राहत और बचाव अभियान युद्धस्तर पर जारी है। हजारों सुरक्षाकर्मी, स्थानीय प्रशासन और बचाव दल प्रभावित क्षेत्रों में लोगों की तलाश कर रहे हैं। भारत सहित कई देशों की सरकारें अपने नागरिकों की जानकारी जुटाने और उन्हें सुरक्षित वापस लाने के लिए नेपाल और चीन के अधिकारियों के संपर्क में हैं। आने वाले समय में जैसे-जैसे बचाव दल दुर्गम क्षेत्रों तक पहुंचेंगे, लापता लोगों और मृतकों की वास्तविक संख्या की तस्वीर और स्पष्ट होने की उम्मीद है।
