इस्लामाबाद: भारत और पाकिस्तान के बीच दशकों पुरानी सिंधु जल संधि को लेकर तनाव एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत की ओर से सिंधु जल संधि को स्थगित करने के फैसले के बाद पाकिस्तान में लगातार चिंता और बयानबाजी देखने को मिल रही है। अब पाकिस्तान के योजना मंत्री अहसान इकबाल ने खुद यह आशंका जताई है कि भारत जरूरत पड़ने पर पानी को एक तरह के “हथियार” के रूप में इस्तेमाल कर सकता है।
एशिया सोसाइटी के एक कार्यक्रम में बोलते हुए अहसान इकबाल ने सिंधु जल संधि को लेकर पाकिस्तान की चिंताओं को खुलकर सामने रखा। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत द्वारा संधि को एकतरफा स्थगित किए जाने से पाकिस्तान के सामने एक नया संकट खड़ा हो गया है। उनके अनुसार, पाकिस्तान को इस बात की चिंता है कि भारत जल प्रवाह को नियंत्रित कर उसकी कृषि और जल सुरक्षा को प्रभावित कर सकता है।
अहसान इकबाल ने कहा कि पाकिस्तान की सबसे बड़ी चिंता यह है कि यदि पानी की उपलब्धता में किसी प्रकार का बदलाव होता है तो उसका सीधा असर देश की खेती पर पड़ सकता है। पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा कृषि पर निर्भर है और सिंधु नदी प्रणाली वहां के किसानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। ऐसे में जल प्रवाह में कमी या अनिश्चितता पाकिस्तान के लिए गंभीर चुनौती बन सकती है।
पाकिस्तानी मंत्री ने यह भी आशंका जताई कि भारत फसलों के लिए पानी की सबसे अधिक जरूरत वाले समय में जल प्रवाह को प्रभावित कर सकता है। वहीं, जरूरत न होने पर अधिक पानी छोड़े जाने की स्थिति में बाढ़ जैसी समस्याएं पैदा होने का खतरा भी पैदा हो सकता है। हालांकि, इस पूरे मुद्दे पर भारत का रुख स्पष्ट रहा है कि पाकिस्तान के साथ संबंधों और समझौतों को आतंकवाद के मुद्दे से अलग करके नहीं देखा जा सकता।
सिंधु जल संधि भारत और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से चली आ रही महत्वपूर्ण जल संधियों में से एक है। दोनों देशों के बीच राजनीतिक और सैन्य तनाव के बावजूद यह संधि वर्षों तक बनी रही। लेकिन पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत द्वारा इसे स्थगित करने के फैसले ने दोनों देशों के बीच एक नए विवाद को जन्म दे दिया।
भारत लगातार पाकिस्तान पर सीमा पार आतंकवाद को समर्थन देने का आरोप लगाता रहा है। भारत का कहना है कि जब तक पाकिस्तान आतंकवाद के खिलाफ प्रभावी और ठोस कार्रवाई नहीं करता, तब तक सामान्य संबंधों की उम्मीद नहीं की जा सकती। इसी पृष्ठभूमि में सिंधु जल संधि का मुद्दा भी दोनों देशों के बीच तनाव का एक बड़ा कारण बन गया है।
अहसान इकबाल के बयान से यह साफ है कि पाकिस्तान अब जल सुरक्षा को लेकर अपनी रणनीति पर नए सिरे से विचार कर रहा है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान द्वारा बनाए जा रहे नए बांध भविष्य में किसी भी संभावित जल संकट से निपटने के लिए एक “बफर” की तरह काम कर सकते हैं। पाकिस्तान का मानना है कि अतिरिक्त जल भंडारण क्षमता विकसित कर वह भविष्य में पानी की कमी या अनिश्चित जल प्रवाह से होने वाले नुकसान को कम कर सकता है।
इस बीच पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ भी इस मुद्दे पर कड़ा बयान दे चुके हैं। उन्होंने कहा था कि पाकिस्तान के पानी की “एक-एक बूंद” उसके लिए रेड लाइन है। शहबाज शरीफ ने चेतावनी भरे लहजे में कहा था कि यदि पाकिस्तान के जल अधिकारों या उसकी संप्रभुता को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई तो इसका जवाब दिया जाएगा।
हालांकि, भारत की ओर से पाकिस्तान को लगातार यह संदेश दिया जाता रहा है कि आतंकवाद और सामान्य संबंध एक साथ नहीं चल सकते। भारत का मानना है कि पाकिस्तान को पहले सीमा पार आतंकवाद और आतंकी गतिविधियों पर ठोस कार्रवाई करनी होगी। इसी कारण सिंधु जल संधि को लेकर दोनों देशों के बीच बयानबाजी लगातार तेज होती जा रही है।
पाकिस्तान के मंत्री का यह बयान ऐसे समय में सामने आया है जब इस्लामाबाद जल सुरक्षा और कृषि उत्पादन को लेकर अपनी चिंताओं को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी उठाने की कोशिश कर रहा है। पाकिस्तान के लिए सिंधु नदी प्रणाली केवल पानी का स्रोत नहीं, बल्कि उसकी कृषि, खाद्य सुरक्षा और करोड़ों लोगों की जरूरतों से जुड़ा अहम मुद्दा है।
वहीं, भारत के फैसले के बाद पाकिस्तान की बढ़ती चिंता यह संकेत देती है कि सिंधु जल संधि का मुद्दा आने वाले समय में दोनों देशों के बीच कूटनीतिक तनाव का एक बड़ा केंद्र बना रह सकता है। भारत जहां आतंकवाद के खिलाफ अपनी सख्त नीति पर कायम है, वहीं पाकिस्तान जल सुरक्षा और कृषि पर संभावित प्रभाव को लेकर लगातार अपनी चिंता जता रहा है।
अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि आने वाले दिनों में सिंधु जल संधि को लेकर दोनों देशों का रुख क्या रहता है। फिलहाल इतना तय है कि पानी का यह मुद्दा केवल दो देशों के बीच संसाधनों के बंटवारे तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह भारत-पाकिस्तान के व्यापक राजनीतिक और सुरक्षा संबंधों से भी जुड़ गया है। पाकिस्तान के मंत्री की आशंका और भारत के सख्त रुख ने इस विवाद को और अधिक गंभीर बना दिया है।
