दो दिन चली लंबी सुनवाई के बाद नैनीताल हाईकोर्ट का फैसला, उम्रकैद की सजा काट रहे तीनों आरोपी फिलहाल रहेंगे जेल में
नैनीताल: उत्तराखंड के बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में बुधवार को आरोपियों को नैनीताल हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। हाईकोर्ट ने मामले के तीनों दोषियों पुलकित आर्य, सौरभ भाष्कर और अंकित गुप्ता की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी हैं। दो दिन तक चली लंबी सुनवाई के बाद न्यायालय की खंडपीठ ने आरोपियों की ओर से रखे गए तर्कों को स्वीकार नहीं किया और उन्हें राहत देने से इनकार कर दिया। इस फैसले के बाद तीनों आरोपी फिलहाल जेल में ही रहेंगे।
मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति रवींद्र मैठाणी और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ शाह की खंडपीठ ने की। तीनों अभियुक्तों की ओर से जमानत के लिए अदालत के सामने अपना पक्ष रखा गया और विभिन्न कानूनी तर्क दिए गए। वहीं, मामले की गंभीरता, उपलब्ध साक्ष्यों और निचली अदालत के फैसले को देखते हुए अदालत ने आरोपियों को जमानत देने से इनकार कर दिया।
यह फैसला अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़े उस लंबे न्यायिक संघर्ष में एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है, जिसने वर्ष 2022 में पूरे उत्तराखंड ही नहीं बल्कि देशभर को झकझोर दिया था।
उम्रकैद की सजा के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंचे थे आरोपी
गौरतलब है कि कोटद्वार की तत्कालीन अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश रीना नेगी की अदालत ने 30 मई 2025 को इस मामले में तीनों अभियुक्तों को दोषी ठहराते हुए हत्या और साक्ष्य मिटाने के मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।
निचली अदालत के फैसले के बाद पुलकित आर्य, सौरभ भाष्कर और अंकित गुप्ता ने उत्तराखंड हाईकोर्ट का रुख किया था। उन्होंने सजा के खिलाफ अपील दाखिल करने के साथ ही जमानत पर रिहा किए जाने की मांग की थी। आरोपियों की दलीलों पर हाईकोर्ट में दो दिनों तक विस्तार से सुनवाई हुई।
हालांकि, लंबी बहस के बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने तीनों दोषियों को राहत देने से साफ इनकार कर दिया। अदालत के इस आदेश के बाद उम्रकैद की सजा काट रहे तीनों अभियुक्तों की जेल से बाहर आने की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा है।
2022 में सामने आया था दिल दहला देने वाला मामला
अंकिता भंडारी हत्याकांड उत्तराखंड के सबसे चर्चित आपराधिक मामलों में शामिल रहा है। पौड़ी गढ़वाल जिले की रहने वाली अंकिता भंडारी ऋषिकेश के पास स्थित वनंतरा रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के पद पर कार्यरत थीं। रिजॉर्ट का मालिक पुलकित आर्य था।
मामले के अनुसार, अंकिता 18 सितंबर 2022 को संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हो गई थीं। उनके अचानक गायब होने के बाद परिवार और स्थानीय लोगों में चिंता बढ़ गई थी। मामले ने धीरे-धीरे पूरे प्रदेश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।
इसके बाद 24 सितंबर 2022 को अंकिता का शव चीला बैराज से बरामद किया गया। शव मिलने के बाद मामले ने बेहद गंभीर रूप ले लिया और पुलिस जांच तेज कर दी गई। जांच के दौरान रिजॉर्ट मालिक पुलकित आर्य, प्रबंधक सौरभ भाष्कर और वहां काम करने वाले अंकित गुप्ता से पूछताछ की गई।
जांच के बाद पुलिस ने तीनों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया और उन्हें गिरफ्तार कर लिया। तब से तीनों आरोपी न्यायिक हिरासत में हैं और अब तक उन्हें इस मामले में कोई बड़ी राहत नहीं मिली है।
अदालत में साक्ष्यों को लेकर हुई लंबी बहस
हाईकोर्ट में जमानत याचिकाओं की सुनवाई के दौरान आरोपियों की ओर से अपना पक्ष रखा गया। बचाव पक्ष ने अदालत के सामने कई कानूनी दलीलें पेश कीं और जमानत दिए जाने की मांग की। दूसरी ओर, अभियोजन पक्ष और पीड़ित पक्ष की ओर से मामले की गंभीरता तथा उपलब्ध साक्ष्यों का हवाला दिया गया।
पीड़िता की ओर से अदालत में यह भी कहा गया कि घटना के समय जो साक्ष्य उपलब्ध थे, वे जांच और मुकदमे के दौरान महत्वपूर्ण साबित हुए। इन्हीं साक्ष्यों के आधार पर निचली अदालत ने तीनों आरोपियों को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।
हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद आखिरकार तीनों दोषियों की जमानत याचिकाओं को खारिज कर दिया।
उत्तराखंड में फिर चर्चा में आया अंकिता हत्याकांड
अंकिता भंडारी हत्याकांड ने उत्तराखंड की राजनीति, कानून-व्यवस्था और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर व्यापक बहस छेड़ दी थी। इस मामले के सामने आने के बाद प्रदेशभर में लोगों का गुस्सा देखने को मिला था और अंकिता को न्याय दिलाने की मांग को लेकर कई जगह प्रदर्शन हुए थे।
आज भी यह मामला उत्तराखंड के सबसे संवेदनशील और चर्चित मामलों में गिना जाता है। पीड़ित परिवार लगातार न्याय की लड़ाई लड़ रहा है और प्रदेश की जनता भी इस मामले से जुड़े हर न्यायिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है।
हाईकोर्ट का ताजा फैसला ऐसे समय आया है, जब निचली अदालत द्वारा सुनाई गई उम्रकैद की सजा के खिलाफ आरोपी उच्च न्यायालय से राहत की उम्मीद लगाए बैठे थे। लेकिन जमानत याचिकाएं खारिज होने के बाद यह साफ हो गया है कि फिलहाल तीनों दोषियों को जेल में ही रहना होगा।
पीड़ित परिवार के लिए महत्वपूर्ण न्यायिक घटनाक्रम
अंकिता भंडारी हत्याकांड में हाईकोर्ट द्वारा जमानत याचिकाएं खारिज किया जाना पीड़ित परिवार के लिए एक महत्वपूर्ण न्यायिक घटनाक्रम माना जा रहा है। हालांकि मामले में सजा के खिलाफ दायर अपील की कानूनी प्रक्रिया अलग से जारी रह सकती है, लेकिन फिलहाल जमानत के मोर्चे पर आरोपियों को कोई राहत नहीं मिली है।
उत्तराखंड की नजरें अब इस बहुचर्चित मामले में आगे होने वाली न्यायिक कार्रवाई पर टिकी रहेंगी। अंकिता भंडारी हत्याकांड एक बार फिर यह याद दिलाता है कि गंभीर आपराधिक मामलों में जांच, साक्ष्य और न्यायिक प्रक्रिया की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण होती है।
फिलहाल, नैनीताल हाईकोर्ट के फैसले ने पुलकित आर्य, सौरभ भाष्कर और अंकित गुप्ता की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। तीनों की जमानत याचिकाएं खारिज हो चुकी हैं और उन्हें उम्रकैद की सजा के दौरान जेल में ही रहना होगा।
