चमोली। उत्तराखंड के सीमांत और दूरस्थ इलाकों में संचार व्यवस्था आज भी ग्रामीणों के लिए किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है। ऐसे में अगर किसी क्षेत्र में उपलब्ध एकमात्र मोबाइल टावर भी बंद हो जाए, तो वहां रहने वाले हजारों लोगों के लिए मुश्किलें कितनी बढ़ सकती हैं, इसका अंदाजा चमोली जिले की निजमूला घाटी की मौजूदा स्थिति से लगाया जा सकता है। यहां बिजली का बकाया बिल जमा नहीं होने के कारण विद्युत विभाग ने BSNL मोबाइल टावर का बिजली कनेक्शन काट दिया, जिसके बाद घाटी की करीब 15 ग्राम सभाओं में मोबाइल नेटवर्क पूरी तरह ठप हो गया है।
नेटवर्क बंद होने से ग्रामीणों के मोबाइल फोन में सिग्नल गायब हो गए हैं। फोन कॉल, इंटरनेट और अन्य संचार सेवाएं प्रभावित होने के कारण लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सबसे बड़ी चिंता यह है कि दूरस्थ और पहाड़ी क्षेत्र में किसी आपात स्थिति के दौरान परिजनों, पुलिस, अस्पताल या प्रशासन से संपर्क करना भी मुश्किल हो सकता है।
मामला सिर्फ एक बिजली कनेक्शन कटने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसने सरकारी विभागों के बीच समन्वय और समय पर बिल भुगतान की व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। एक तरफ आम उपभोक्ता के बिजली बिल का भुगतान नहीं करने पर कनेक्शन काटने की कार्रवाई की जाती है, वहीं दूसरी तरफ एक सरकारी दूरसंचार कंपनी का बिजली बिल वर्षों तक लंबित रहने और उसके बाद कार्रवाई होने से ग्रामीणों को इसका सीधा खामियाजा भुगतना पड़ रहा है।
निजमूला घाटी में BSNL टावर ही था संचार का बड़ा सहारा
निजमूला घाटी जैसे दुर्गम क्षेत्र में मोबाइल नेटवर्क केवल सुविधा नहीं, बल्कि जरूरत है। घाटी की करीब 15 ग्राम सभाओं के लिए BSNL का यह मोबाइल टावर लंबे समय से संचार व्यवस्था का महत्वपूर्ण माध्यम बना हुआ था। ग्रामीण इसी नेटवर्क के जरिए अपने रिश्तेदारों से बातचीत करने के साथ-साथ जरूरी ऑनलाइन काम भी करते थे।
लेकिन बिजली कनेक्शन कटते ही पूरा नेटवर्क प्रभावित हो गया। ग्रामीणों के मुताबिक अब मोबाइल फोन में सिग्नल नहीं आ रहे हैं और लोग एक-दूसरे से संपर्क करने के लिए परेशान हैं।
दूरस्थ पहाड़ी इलाकों में कई बार मोबाइल फोन ही किसी आपात स्थिति में मदद मांगने का सबसे तेज माध्यम होता है। ऐसे में नेटवर्क का पूरी तरह बंद हो जाना ग्रामीणों के लिए गंभीर समस्या बन गया है।
10 लाख 7 हजार 280 रुपये से ज्यादा का बिजली बिल बकाया
विद्युत विभाग के जेई दीपक राणा के मुताबिक BSNL पर कई वर्षों से बिजली बिल की बड़ी राशि बकाया थी। विभाग के अनुसार BSNL पर 10 लाख 7 हजार 280 रुपये का बिजली बिल लंबित था।
जेई दीपक राणा ने बताया कि विभाग की ओर से BSNL को कई बार बकाया बिल जमा करने के लिए सूचित किया गया था। इसके बावजूद भुगतान नहीं होने पर उच्चाधिकारियों के निर्देश पर BSNL मोबाइल टावर का विद्युत कनेक्शन काट दिया गया।
उनके अनुसार, कार्रवाई अचानक नहीं की गई, बल्कि बकाया राशि जमा करने के लिए विभाग की ओर से पहले सूचना दी गई थी। भुगतान नहीं होने के बाद नियमों के तहत बिजली आपूर्ति बंद की गई।
यहीं से सबसे बड़ा सवाल भी खड़ा होता है कि आखिर इतने वर्षों तक एक सरकारी दूरसंचार कंपनी का बिजली बिल लंबित क्यों रहा? अगर बकाया राशि को लेकर लगातार सूचनाएं दी जा रही थीं, तो समय रहते भुगतान की व्यवस्था क्यों नहीं की गई?
BSNL ने कहा- बिल उपलब्ध कराए बिना काट दिया कनेक्शन
वहीं, दूसरी तरफ BSNL ने विद्युत विभाग की कार्रवाई पर आपत्ति जताई है। BSNL के SDO राजेश सैनी का कहना है कि विद्युत विभाग की ओर से बिल उपलब्ध कराए बिना ही कनेक्शन काट दिया गया।
राजेश सैनी के मुताबिक टावर की बिजली कटने के कारण पूरे क्षेत्र की संचार व्यवस्था प्रभावित हुई है। उनका कहना है कि यदि बकाया राशि को लेकर विभाग की ओर से बिल उपलब्ध कराया जाता और प्रक्रिया के तहत जानकारी दी जाती, तो मामले को समय रहते सुलझाने का प्रयास किया जा सकता था।
इस तरह एक ही मामले में दोनों विभागों के अलग-अलग पक्ष सामने आ रहे हैं। विद्युत विभाग का कहना है कि लंबे समय से भुगतान नहीं किया गया और कई बार सूचना देने के बाद कनेक्शन काटा गया, जबकि BSNL की ओर से बिल उपलब्ध कराए बिना कार्रवाई किए जाने पर सवाल उठाया जा रहा है।
एक टावर बंद हुआ और 15 ग्राम सभाएं नेटवर्क से बाहर
निजमूला घाटी के ग्रामीणों की परेशानी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एक मोबाइल टावर बंद होने से करीब 15 ग्राम सभाओं की संचार व्यवस्था प्रभावित हो गई है।
ब्यारा के पूर्व प्रधान बृजलाल ने बताया कि निजमूला घाटी में BSNL का यही प्रमुख मोबाइल टावर है। इसके बंद होने के बाद ग्रामीण मोबाइल नेटवर्क से पूरी तरह कट गए हैं।
उन्होंने कहा कि घाटी के कई परिवारों के सदस्य नौकरी और काम के सिलसिले में दूसरे शहरों और राज्यों में रहते हैं। ऐसे में फोन पर उनसे संपर्क करना बेहद जरूरी होता है। नेटवर्क बंद होने से परिवारों को अपने परिजनों से बात करने में परेशानी हो रही है।
सबसे गंभीर स्थिति आपातकाल को लेकर है। अगर किसी ग्रामीण की तबीयत अचानक खराब हो जाए, दुर्घटना हो जाए या किसी अन्य तरह की आपात स्थिति पैदा हो जाए, तो मदद के लिए फोन करना मुश्किल हो सकता है।
ग्रामीणों का कहना है कि मोबाइल फोन उनके लिए सिर्फ मनोरंजन का साधन नहीं है, बल्कि आज के समय में यह शिक्षा, रोजगार, बैंकिंग, सरकारी योजनाओं, ऑनलाइन सेवाओं और आपातकालीन संपर्क का महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है। ऐसे में नेटवर्क बंद होने का असर जीवन के कई हिस्सों पर पड़ रहा है।
‘फोन अब गाना सुनने और फोटो खींचने तक सीमित’
ग्रामीणों की परेशानी का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि नेटवर्क नहीं होने के कारण महंगे स्मार्टफोन भी उनके लिए लगभग बेकार हो गए हैं।
स्थानीय लोगों के मुताबिक फोन में सिग्नल नहीं होने से न कॉल हो पा रही है और न इंटरनेट चल रहा है। ग्रामीणों ने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा कि नेटवर्क गायब होने के बाद मोबाइल फोन अब सिर्फ गाना सुनने और फोटो खींचने तक सीमित रह गए हैं।
हालांकि यह स्थिति ग्रामीणों के लिए किसी मजाक से अधिक गंभीर समस्या है। आज के डिजिटल दौर में मोबाइल नेटवर्क का सीधा संबंध बैंकिंग, डिजिटल भुगतान, ऑनलाइन दस्तावेज, सरकारी सेवाओं और शिक्षा से भी जुड़ चुका है।
दूरस्थ क्षेत्र में संचार व्यवस्था क्यों है इतनी महत्वपूर्ण?
निजमूला घाटी भौगोलिक रूप से दुर्गम क्षेत्र में स्थित है। ऐसे इलाकों में सड़क, स्वास्थ्य और संचार जैसी मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता पहले से ही चुनौतीपूर्ण रहती है।
ऐसे में मोबाइल नेटवर्क का बंद होना किसी बड़े संकट की स्थिति पैदा कर सकता है। कई बार पहाड़ी क्षेत्रों में लोग घंटों पैदल चलकर या लंबी दूरी तय करके मुख्य सड़क या ऐसे स्थान तक पहुंचते हैं, जहां मोबाइल सिग्नल मिल सके।
अगर किसी बुजुर्ग, गर्भवती महिला, बीमार व्यक्ति या दुर्घटना के शिकार व्यक्ति को तत्काल चिकित्सा सहायता की जरूरत पड़े, तो परिजनों के लिए मदद मांगना मुश्किल हो सकता है।
इसीलिए स्थानीय लोग चाहते हैं कि विभाग आपसी विवाद को जल्द खत्म करें और टावर की बिजली आपूर्ति बहाल की जाए।
बीजेपी नेता ने दोनों विभागों से जल्द समाधान की मांग की
मामले को लेकर बीजेपी नेता बीरेंद्र फर्स्वाण ने भी विद्युत विभाग और BSNL से जल्द समाधान निकालने की मांग की है।
उन्होंने कहा कि दूरस्थ क्षेत्र में संचार व्यवस्था बेहद महत्वपूर्ण है और विभागों के बीच जो भी भुगतान या बिल को लेकर विवाद है, उसे आपसी समन्वय से जल्द सुलझाया जाना चाहिए।
उनका कहना है कि विभागों के विवाद का असर सीधे ग्रामीणों पर नहीं पड़ना चाहिए। टावर की बिजली आपूर्ति बहाल कर क्षेत्र में संचार व्यवस्था को सामान्य किया जाना जरूरी है।
सवाल सिर्फ बिजली बिल का नहीं, जवाबदेही का भी है
निजमूला घाटी की मौजूदा स्थिति ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है—अगर BSNL पर वर्षों से लाखों रुपये का बिजली बिल बकाया था, तो समय रहते इसका भुगतान क्यों नहीं किया गया?
दूसरा सवाल यह है कि अगर विद्युत विभाग को लंबे समय से भुगतान नहीं मिला था, तो क्या ऐसी स्थिति आने से पहले BSNL और विद्युत विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच समन्वय नहीं किया जा सकता था?
तीसरा और सबसे महत्वपूर्ण सवाल ग्रामीणों की परेशानी से जुड़ा है। जब दोनों सरकारी संस्थाओं के बीच बिल और भुगतान का मामला चल रहा था, तब क्या यह सुनिश्चित नहीं किया जा सकता था कि दूरस्थ क्षेत्र की संचार सेवा पूरी तरह बंद न हो?
एक ओर बिजली विभाग का कहना है कि बकाया भुगतान के लिए कई बार सूचना दी गई, वहीं BSNL का आरोप है कि बिल उपलब्ध कराए बिना कनेक्शन काट दिया गया। ऐसे में दोनों पक्षों को अपना-अपना पक्ष रखने के बजाय अब समाधान की दिशा में तेजी से आगे बढ़ने की जरूरत है।
ग्रामीणों को इंतजार है नेटवर्क लौटने का
फिलहाल निजमूला घाटी के ग्रामीणों की सबसे बड़ी मांग यही है कि BSNL टावर की बिजली जल्द बहाल की जाए और मोबाइल नेटवर्क दोबारा शुरू हो।
बिजली बिल किसका बकाया है, भुगतान में देरी क्यों हुई और कार्रवाई की प्रक्रिया में किस स्तर पर चूक हुई—इन सवालों का जवाब संबंधित विभागों को देना होगा। लेकिन इस पूरे विवाद में सबसे ज्यादा प्रभावित वे ग्रामीण हैं, जिनका इस पूरे मामले में कोई प्रत्यक्ष दोष नहीं है।
बिजली बिल का विवाद विभागों के बीच है, लेकिन उसकी कीमत 15 ग्राम सभाओं के ग्रामीण चुका रहे हैं। यही इस पूरे मामले का सबसे बड़ा सवाल है। जब एक मोबाइल टावर बंद होने से पूरा क्षेत्र संचार से कट सकता है, तो ऐसे संवेदनशील और दूरस्थ इलाकों में विभागों के बीच बेहतर समन्वय और वैकल्पिक संचार व्यवस्था सुनिश्चित करना बेहद जरूरी हो जाता है।
अब देखना यह होगा कि विद्युत विभाग और BSNL के बीच बकाया भुगतान का विवाद कब सुलझता है और निजमूला घाटी के 15 ग्राम सभाओं में मोबाइल नेटवर्क कब वापस लौटता है।
