वंदे मातरम को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच सियासी घमासान तेज हो गया है। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर कांग्रेस मुख्यालय में राष्ट्रगीत को बीच में रोके जाने को लेकर उठे विवाद के बीच कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भाजपा पर जोरदार पलटवार किया है। खरगे ने कहा कि कांग्रेस ने कोई गलत काम नहीं किया है और जिस वंदे मातरम को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं, वही गीत महात्मा गांधी, पंडित जवाहरलाल नेहरू और सरदार वल्लभभाई पटेल भी गाते थे। भाजपा की ओर से शिकायत या FIR की बात पर खरगे ने सवाल किया कि अगर इसे अपराध माना जाता है तो क्या महात्मा गांधी, नेहरू और पटेल के खिलाफ भी केस दर्ज किया जाएगा?
स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर कांग्रेस मुख्यालय में वंदे मातरम को लेकर शुरू हुआ विवाद अब राजनीतिक बयानबाजी में बदल गया है। भाजपा की ओर से कांग्रेस पर राष्ट्रगीत के कथित अपमान का आरोप लगाए जाने के बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने इसे लेकर भाजपा को सीधे चुनौती दी है। खरगे ने कहा कि कांग्रेस ने वही वंदे मातरम गाया, जिसे देश के स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान बड़े नेताओं ने गाया था।
खरगे ने अपने बयान में कहा कि आखिर भाजपा किस आधार पर शिकायत दर्ज कराएगी। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि उन्होंने वही वंदे मातरम गाया है, जिसे महात्मा गांधी गाते थे। उन्होंने कहा कि पंडित जवाहरलाल नेहरू और सरदार वल्लभभाई पटेल ने भी यही वंदे मातरम गाया था। ऐसे में कांग्रेस को इस मुद्दे पर ज्ञान देने से पहले भाजपा को इतिहास को समझना चाहिए।
‘अगर अपराध है तो गांधी, नेहरू और पटेल पर भी केस करिए’
मल्लिकार्जुन खरगे ने भाजपा की ओर से शिकायत दर्ज कराने की बात पर तीखा पलटवार करते हुए कहा कि अगर वंदे मातरम को इस तरह गाना अपराध है, तो फिर उन नेताओं के खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए जिन्होंने इसी तरह इसे गाया था।
खरगे ने कहा कि अगर ऐसा करना अपराध है तो क्या 18 साल तक सत्ता में रही सरकारों ने भी अपराध किया? उन्होंने यह तर्क उस राजनीतिक बहस के संदर्भ में दिया जिसमें भाजपा कांग्रेस के कार्यक्रम में वंदे मातरम को लेकर सवाल उठा रही है।
कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि बीते कई वर्षों से अलग-अलग सरकारों और राजनीतिक दलों के कार्यक्रमों में वंदे मातरम इसी तरह गाया जाता रहा है। उनका कहना है कि आज अचानक इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस को कटघरे में खड़ा करना राजनीतिक रूप से उचित नहीं है।
‘हम वही वंदे मातरम गाते आए हैं’
खरगे ने कहा कि कांग्रेस पिछले करीब 90 वर्षों से वंदे मातरम गाती आ रही है। उनके मुताबिक, कांग्रेस ने स्वतंत्रता आंदोलन के दौर में भी वंदे मातरम को महत्वपूर्ण स्थान दिया था। उन्होंने दावा किया कि जब आज के कई राजनीतिक नेता पैदा भी नहीं हुए थे, तब कांग्रेस वंदे मातरम को लेकर अपनी भूमिका स्पष्ट कर चुकी थी।
कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि कांग्रेस ने वंदे मातरम को राष्ट्रीय गीत के रूप में स्वीकार किए जाने को लेकर प्रस्ताव पारित किया था। इसलिए भाजपा को कांग्रेस को राष्ट्रगीत के बारे में ज्ञान देने की जरूरत नहीं है।
खरगे ने भाजपा पर इतिहास को अपनी सुविधा के हिसाब से देखने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि इतिहास की सही जानकारी के बिना किसी राजनीतिक दल या नेता को इस मुद्दे पर टिप्पणी नहीं करनी चाहिए।
कांग्रेस मुख्यालय में क्या हुआ था?
दरअसल, स्वतंत्रता दिवस के मौके पर कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम का एक वीडियो सामने आने के बाद विवाद खड़ा हुआ था। वीडियो में वंदे मातरम को दो छंदों के बाद रोक दिए जाने को लेकर सवाल उठाए गए। भाजपा नेताओं और समर्थकों ने इसे राष्ट्रगीत के कथित अपमान से जोड़ते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा।
वहीं कांग्रेस की ओर से इस पूरे विवाद को अलग तरीके से देखा जा रहा है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि पार्टी लंबे समय से जिस परंपरा के तहत वंदे मातरम का गायन करती रही है, उसी के अनुसार कार्यक्रम में गीत प्रस्तुत किया गया।
इसी विवाद के बीच भाजपा की ओर से शिकायत दर्ज कराने की बात कही गई, जिसके बाद मामला और ज्यादा राजनीतिक हो गया। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने अब इसी मुद्दे पर भाजपा को जवाब दिया है।
‘जो भाजपा कह दे, वह कानून नहीं हो जाता’
खरगे ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि किसी राजनीतिक दल के नेता के कह देने मात्र से कोई बात कानून नहीं बन जाती। उन्होंने कहा कि अगर आज कोई सरकार किसी विषय पर एक बात कहती है और कल दूसरी सरकार आकर कुछ अलग कहती है, तो हर बयान को कानून नहीं माना जा सकता।
कांग्रेस अध्यक्ष ने सवाल किया कि क्या सिर्फ यह कह देना पर्याप्त है कि कोई काम गलत है? उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में कानून और नियमों की अपनी प्रक्रिया होती है और राजनीतिक बयान को कानून का दर्जा नहीं दिया जा सकता।
खरगे ने कहा कि कांग्रेस ऐसा कोई काम नहीं कर रही है जिसे अपराध कहा जा सके। उनका दावा है कि पार्टी दशकों से वंदे मातरम का गायन करती आई है और आज भी उसी परंपरा को आगे बढ़ाया जा रहा है।
वंदे मातरम पर क्यों गरमाई राजनीति?
वंदे मातरम देश के स्वतंत्रता आंदोलन से गहराई से जुड़ा हुआ गीत है और इसे भारत के राष्ट्रीय गीत का दर्जा प्राप्त है। यही वजह है कि इसके गायन को लेकर होने वाला कोई भी विवाद तुरंत राजनीतिक और सार्वजनिक चर्चा का विषय बन जाता है।
इस बार विवाद स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रम से जुड़ा है। कांग्रेस मुख्यालय के कार्यक्रम का वीडियो सामने आने के बाद भाजपा ने कांग्रेस पर निशाना साधा। दूसरी ओर कांग्रेस ने भाजपा के आरोपों को राजनीतिक विवाद बताया।
मल्लिकार्जुन खरगे के ताजा बयान ने इस बहस को और तीखा कर दिया है। उन्होंने सीधे तौर पर महात्मा गांधी, नेहरू और सरदार पटेल का नाम लेकर भाजपा से सवाल किया है कि अगर कांग्रेस का तरीका गलत है तो क्या इतिहास के इन नेताओं के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी?
फिलहाल वंदे मातरम को लेकर कांग्रेस और भाजपा आमने-सामने हैं। एक तरफ भाजपा कांग्रेस से स्पष्टीकरण और कार्रवाई की मांग कर रही है, तो दूसरी तरफ कांग्रेस अध्यक्ष खरगे अपने संगठन के बचाव में मजबूती से खड़े हैं। आने वाले दिनों में यह विवाद संसद और राजनीतिक मंचों पर भी और गरमाने की संभावना है। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि राष्ट्रगीत के गायन की परंपरा, उसके निर्धारित स्वरूप और राजनीतिक दलों द्वारा उसके इस्तेमाल को किस नजरिए से देखा जाना चाहिए।
