USS Abraham Lincoln पर तैनात करीब 5,000 सैनिकों के परिवारों ने अमेरिकी नौसेना के वरिष्ठ अधिकारियों के सामने उठाए गंभीर सवाल; लंबी तैनाती, खराब सुविधाओं और बार-बार बढ़ाए गए मिशन को लेकर बढ़ी चिंता
नई दिल्ली: अमेरिका के विमानवाहक पोत USS Abraham Lincoln पर लंबे समय से तैनात अमेरिकी नौसैनिकों को लेकर गंभीर चिंताएं सामने आई हैं। मीडिया रिपोर्टों और सैनिकों के परिवारों के दावों के मुताबिक, लंबे समय तक समुद्र में रहने, बार-बार बढ़ाई गई तैनाती और जहाज पर कथित खराब बुनियादी सुविधाओं के कारण कुछ सैनिकों पर मानसिक दबाव बढ़ गया है। परिवारों ने यहां तक दावा किया है कि कुछ सैनिकों ने समुद्र में कूदने की कोशिश की या आत्महत्या जैसे विचार व्यक्त किए।
रिपोर्टों के मुताबिक, USS Abraham Lincoln पर करीब 5,000 नौसैनिक और मरीन तैनात हैं। परिवारों का कहना है कि सैनिकों की तैनाती लगातार बढ़ती जा रही है और उन्हें लंबे समय तक जमीन पर लौटने का पर्याप्त अवसर नहीं मिल रहा। इस स्थिति ने सैनिकों के मानसिक स्वास्थ्य, उनके परिवारों और पूरी सैन्य व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
यह मामला उस समय और ज्यादा चर्चा में आया जब सैनिकों के परिवार सैन डिएगो में अमेरिकी नौसेना के वरिष्ठ अधिकारियों के सामने पहुंचे और उन्होंने जहाज पर मौजूद परिस्थितियों को लेकर अपनी चिंताएं साझा कीं।
250 दिन तक समुद्र में रहने का दावा
रिपोर्ट के अनुसार USS Abraham Lincoln लंबे समय से समुद्र में तैनात है और सैनिकों को लगातार लंबे मिशन का सामना करना पड़ रहा है। परिवारों का दावा है कि कई सैनिक करीब 250 दिनों तक जमीन पर पैर नहीं रख सके।
इतनी लंबी समुद्री तैनाती किसी भी सैनिक के लिए शारीरिक और मानसिक रूप से बेहद चुनौतीपूर्ण हो सकती है। युद्धपोत पर लगातार सीमित जगह में रहना, परिवार से दूरी, मिशन का दबाव, नींद और आराम की समस्या तथा भविष्य को लेकर अनिश्चितता तनाव को बढ़ा सकती है।
परिवारों का कहना है कि सैनिकों को पहले एक निश्चित समय सीमा के भीतर घर लौटने की उम्मीद थी, लेकिन परिस्थितियों और सैन्य अभियानों के कारण तैनाती को बार-बार बढ़ाया गया। इससे जवानों के बीच थकान और निराशा बढ़ने की बात सामने आई है।
परिवारों ने अधिकारियों के सामने सुनाई दर्दनाक बातें
सैन डिएगो में हुई एक बैठक के दौरान करीब 200 सैनिकों के परिवार के सदस्यों के अमेरिकी नौसेना के वरिष्ठ अधिकारियों के सामने पहुंचने की बात रिपोर्टों में कही गई है।
बैठक में परिवारों ने अधिकारियों से सैनिकों की मानसिक स्थिति और लंबी तैनाती को लेकर सवाल किए। एक परिवार की महिला ने कथित तौर पर बताया कि उनके पति ने उन्हें ऐसा संदेश भेजा था, जिससे उन्हें उनकी मानसिक स्थिति को लेकर गंभीर चिंता हुई।
एक अन्य परिवार के सदस्य ने नेतृत्व और सैनिकों के बीच भरोसे में कमी की शिकायत की। परिवारों का आरोप है कि उन्हें लगातार बदलती परिस्थितियों और तैनाती की अवधि के बारे में पर्याप्त स्पष्टता नहीं मिल रही।
इन दावों ने अमेरिकी नौसेना के सामने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि लंबे समय तक चलने वाले सैन्य मिशन में सैनिकों के मानसिक स्वास्थ्य और उनके परिवारों की चिंताओं को किस तरह संभाला जा रहा है।
समुद्र में कूदने की कोशिश के दावे ने बढ़ाई चिंता
रिपोर्ट में एक सैनिक की पत्नी के हवाले से दावा किया गया है कि उनके पति ने लगातार बढ़ती तैनाती के बाद समुद्र में कूदने की कोशिश की थी। परिवार का कहना है कि सैनिक मानसिक और शारीरिक रूप से बेहद थक चुके थे।
एक अन्य घटना के बारे में भी दावा किया गया कि एक नौसैनिक ने अपने साथी को समुद्र में कूदने से रोक लिया और उसे पकड़कर वापस जहाज के डेक पर खींच लिया।
हालांकि, ऐसी घटनाओं से जुड़े दावों की स्वतंत्र पुष्टि और उनका पूरा आधिकारिक विवरण अलग-अलग रिपोर्टों में स्पष्ट नहीं है। लेकिन यदि इन दावों में सच्चाई है, तो यह लंबे समय तक चलने वाली तैनाती के दौरान सैनिकों के मानसिक स्वास्थ्य की गंभीर स्थिति की ओर संकेत करता है।
मिशन की अवधि बढ़ना बना बड़ी परेशानी
USS Abraham Lincoln के सैनिकों की परेशानी का एक बड़ा कारण मिशन की लगातार बढ़ती अवधि बताई जा रही है।
रिपोर्टों के अनुसार, यह विमानवाहक पोत 21 नवंबर को सैन डिएगो से रवाना हुआ था। शुरुआत में इसके मिशन की दिशा अलग थी, लेकिन मध्य पूर्व की बदलती सुरक्षा परिस्थितियों के बीच इसे इस क्षेत्र की ओर भेजे जाने की बात कही गई।
इसके बाद सैनिकों की तैनाती लंबी होती चली गई। परिवारों के अनुसार, मिशन के दौरान उन्हें जमीन पर बहुत सीमित समय मिला। एक बार दिसंबर में गुआम और दूसरी बार जुलाई में ओमान में रुकने का जिक्र किया गया है।
यानी लंबे समुद्री मिशन के दौरान सैनिकों को सामान्य जीवन, परिवार और जमीन पर आराम करने का पर्याप्त अवसर नहीं मिल सका।
जहाज की सुविधाओं पर भी उठे सवाल
सिर्फ लंबी तैनाती ही नहीं, बल्कि USS Abraham Lincoln पर कथित बुनियादी सुविधाओं को लेकर भी शिकायतें सामने आई हैं।
कैलिफोर्निया के डेमोक्रेट सांसद माइक लेविन ने सोशल मीडिया पर जहाज पर सैनिकों के सामने आने वाली कथित समस्याओं का मुद्दा उठाया। उनके मुताबिक, सैनिकों ने फफूंद लगे शॉवर, खराब टॉयलेट, लंबे समय तक बंद लॉन्ड्री मशीनें और गर्म पानी की समस्या जैसी शिकायतें की हैं।
खाने को लेकर भी शिकायतें सामने आने की बात कही गई। आरोप है कि कई मौकों पर सैनिकों को पर्याप्त और गुणवत्तापूर्ण भोजन नहीं मिला।
इसके अलावा साबुन, डियोड्रेंट और टूथपेस्ट जैसी रोजमर्रा की जरूरी चीजों की उपलब्धता को लेकर भी सवाल उठाए गए।
यदि लंबे समय तक समुद्र में रहने वाले सैनिकों को बुनियादी सुविधाओं की कमी का सामना करना पड़ता है, तो इसका असर उनकी शारीरिक स्थिति के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ सकता है।
खाने और पानी को लेकर पहले भी उठे थे सवाल
रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल में भी USS Abraham Lincoln पर भोजन और अन्य सुविधाओं को लेकर सवाल उठे थे। जहाज पर उपलब्ध भोजन की तस्वीरें और सैनिकों की शिकायतें सामने आने के बाद यह मामला चर्चा में आया था।
इसके अलावा पानी की उपलब्धता, शॉवर में फफूंद और लॉन्ड्री से जुड़ी समस्याओं का भी जिक्र हुआ था।
उस समय अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने ऐसी खबरों को खारिज करते हुए उन्हें फर्जी खबर बताया था। लेकिन अब सैनिकों के परिवारों और कुछ अमेरिकी सांसदों की ओर से दोबारा सवाल उठाए जाने के बाद मामला फिर चर्चा में आ गया है।
सैनिकों के परिवारों की सबसे बड़ी चिंता क्या है?
परिवारों की सबसे बड़ी चिंता केवल यह नहीं है कि सैनिक कितने दिनों से समुद्र में हैं। असली चिंता यह है कि लगातार बढ़ती तैनाती उनके मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर कितना असर डाल रही है।
एक सैनिक के लिए परिवार से महीनों दूर रहना अपने आप में कठिन होता है। यदि इसके साथ युद्ध जैसे तनावपूर्ण माहौल, सीमित व्यक्तिगत स्थान, लगातार ड्यूटी और भविष्य की अनिश्चितता जुड़ जाए, तो दबाव और बढ़ सकता है।
परिवारों का कहना है कि सैनिकों को केवल मिशन पूरा करने वाली ताकत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि उनकी व्यक्तिगत और मानसिक जरूरतों का भी ध्यान रखा जाना चाहिए।
अमेरिकी नौसेना के सामने अब बड़ी चुनौती
USS Abraham Lincoln से जुड़ी शिकायतें अमेरिकी नौसेना के लिए गंभीर चुनौती बन सकती हैं। अमेरिका दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में अपने युद्धपोतों और सैनिकों की लंबी अवधि की तैनाती करता रहा है, लेकिन लंबे मिशन के दौरान सैनिकों की क्षमता और मानसिक स्वास्थ्य बनाए रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
यदि किसी मिशन की अवधि लगातार बढ़ती है, तो सैनिकों के लिए पर्याप्त आराम, मानसिक स्वास्थ्य सहायता, परिवार से संपर्क और बेहतर रहने की व्यवस्था सुनिश्चित करना जरूरी हो जाता है।
इस पूरे मामले में सबसे अहम बात यह है कि सामने आए आत्महत्या के प्रयासों और समुद्र में कूदने की घटनाओं के दावों की आधिकारिक जांच और स्पष्ट जानकारी सामने आए। यदि ऐसे दावे सही साबित होते हैं, तो यह अमेरिकी सैन्य व्यवस्था के लिए बेहद गंभीर चेतावनी होगी।
लंबी तैनाती ने खड़ा किया बड़ा सवाल
USS Abraham Lincoln पर मौजूद सैनिकों की स्थिति को लेकर सामने आई खबरों ने एक अहम सवाल खड़ा कर दिया है—क्या किसी सैन्य मिशन को लंबे समय तक जारी रखने की कीमत सैनिकों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य से नहीं चुकाई जा रही?
करीब 5,000 सैनिकों वाली इस तैनाती में यदि परिवारों की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं, तो अमेरिकी नौसेना को केवल मिशन की रणनीतिक जरूरतों पर ही नहीं, बल्कि अपने जवानों की सुरक्षा और कल्याण पर भी उतना ही ध्यान देना होगा।
क्योंकि युद्धपोत की ताकत सिर्फ उसके विमान, हथियार और तकनीक नहीं होते—उसकी सबसे बड़ी ताकत उस पर तैनात सैनिक होते हैं। अगर वही सैनिक अत्यधिक थकान, मानसिक दबाव और लगातार बढ़ती अनिश्चितता से जूझने लगें, तो यह किसी भी सैन्य अभियान के लिए गंभीर चिंता का विषय बन जाता है।
