मुर्शिदाबाद के किशोर की कहानी ने झकझोर दिया, वर्षों से त्वचा में तेज जलन और दर्द से परेशान; आर्थिक तंगी के कारण इलाज से दूर परिवार ने प्रशासन से मदद की गुहार लगाई
मुर्शिदाबाद: पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद से सामने आई 17 वर्षीय किशोर की कहानी बेहद मार्मिक है। जिस उम्र में बच्चे पढ़ाई, खेलकूद और दोस्तों के साथ समय बिताकर अपने भविष्य के सपने देखते हैं, उसी उम्र में इकबाल हुसैन का अधिकांश समय पानी के भीतर गुजर रहा है। परिवार के मुताबिक, उसके शरीर में इतनी तेज जलन और दर्द होता है कि पानी से बाहर निकलना उसके लिए बेहद मुश्किल हो जाता है। तालाब का पानी ही फिलहाल उसे कुछ राहत देता है। यही वजह है कि वह कई-कई दिनों तक तालाब में डूबा रहने को मजबूर है।
इकबाल की यह स्थिति केवल एक बीमारी की कहानी नहीं है, बल्कि गरीबी, इलाज की कमी और लंबे समय से चली आ रही परेशानी की भी कहानी है। परिवार का कहना है कि पिछले करीब पांच-छह वर्षों से वह इस समस्या से जूझ रहा है। शुरुआत में शरीर में जलन और वजन बढ़ने की समस्या सामने आई। धीरे-धीरे परेशानी इतनी बढ़ गई कि सामान्य जीवन जीना उसके लिए मुश्किल हो गया। परिवार ने अपनी क्षमता के अनुसार घरेलू उपाय किए, लेकिन स्थायी राहत नहीं मिल सकी।
पानी में उतरते ही क्यों मिलती है राहत?
इकबाल के परिवार के अनुसार, जब वह पानी में रहता है तो उसके शरीर की जलन कुछ समय के लिए कम हो जाती है। इसी अस्थायी राहत ने तालाब को उसकी मजबूरी बना दिया। अब स्थिति यह है कि वह लंबे समय तक पानी में पड़ा रहता है और बाहर निकलने पर फिर शरीर में तेज जलन और दर्द महसूस होने लगता है।
परिवार का कहना है कि कई बार इकबाल पांच से छह दिनों तक लगभग लगातार तालाब के पानी में रहने की कोशिश करता है। हालांकि, लगातार पानी में रहने से उसकी परेशानियां कम होने के बजाय और बढ़ती जा रही हैं। उसकी त्वचा पर असर दिखाई देने लगा है और शरीर की सामान्य स्थिति भी खराब होती जा रही है।
यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि उपलब्ध जानकारी के आधार पर इकबाल की बीमारी का सटीक चिकित्सकीय कारण या अंतिम निदान सामने नहीं आया है। इसलिए उसकी परेशानी को किसी विशेष बीमारी का नाम देना उचित नहीं होगा। उसकी स्थिति का सही कारण विशेषज्ञ चिकित्सकीय जांच और आवश्यक परीक्षणों के बाद ही पता चल सकता है।
पहले बढ़ा वजन, फिर शुरू हुई जलन और दर्द
परिवार के मुताबिक, इकबाल की परेशानी किशोरावस्था के दौरान बढ़नी शुरू हुई। उसका वजन तेजी से बढ़ा और उसके हाथ-पैरों में सूजन जैसी समस्या दिखाई देने लगी। इसके बाद शरीर में दर्द और जलन की शिकायत बढ़ती चली गई।
धीरे-धीरे समस्या इतनी गंभीर हो गई कि इकबाल सामान्य तरीके से अपने दैनिक काम भी नहीं कर पाता। परिवार के लिए सबसे बड़ी चिंता यह है कि आखिर उसके शरीर में ऐसा क्या हो रहा है, जिसकी वजह से उसे हर समय जलन और दर्द का सामना करना पड़ रहा है।
परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण महंगे अस्पतालों में इलाज कराना भी उनके लिए आसान नहीं रहा। यही वजह है कि बीमारी का कारण जानने और उसका उचित इलाज कराने के बजाय परिवार घरेलू स्तर पर ही राहत तलाशता रहा।
तालाब बना सहारा, लेकिन अब पानी ही बन रहा परेशानी का कारण
शुरुआत में इकबाल जब जलन से परेशान होता था, तब परिवार ने उसे पानी में नहाने के लिए कहा। पानी में कुछ समय रहने के बाद उसे राहत महसूस हुई। इसके बाद उसने ज्यादा समय पानी में बिताना शुरू कर दिया।
धीरे-धीरे यह राहत उसकी आदत और फिर मजबूरी बन गई। आज स्थिति यह है कि वह लंबे समय तक तालाब के पानी में डूबा रहता है। लेकिन लगातार पानी में रहने का शरीर पर विपरीत असर पड़ रहा है। त्वचा पर सफेदी और गलने जैसी स्थिति दिखाई देने लगी है। इसके अलावा परिवार के मुताबिक, उसे खांसी और जुकाम की भी गंभीर शिकायत है।
लगातार पानी में रहने के कारण संक्रमण और शरीर के तापमान से जुड़ी समस्याओं का खतरा भी बढ़ सकता है। खासकर बरसात के मौसम में तालाब का पानी साफ न होने पर त्वचा संबंधी संक्रमण का खतरा और बढ़ सकता है। ऐसे में इकबाल के लिए तालाब में लंबे समय तक रहना राहत देने के बजाय एक नई स्वास्थ्य समस्या पैदा कर सकता है।
सीने में दर्द और सांस से जुड़ी परेशानी ने बढ़ाई चिंता
परिवार के अनुसार, इकबाल को शरीर में तेज दर्द के अलावा सीने में दर्द और खांसी की समस्या भी है। परिजनों ने उसमें निमोनिया जैसे लक्षण होने की बात कही है। हालांकि, इन लक्षणों की चिकित्सकीय पुष्टि जरूरी है और बिना डॉक्टर की जांच के किसी बीमारी का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
लेकिन इतना जरूर है कि एक किशोर का लगातार पानी में डूबे रहना और उसके बाद खांसी, जुकाम तथा सीने में दर्द जैसी शिकायतें चिंता का विषय हैं। परिवार को डर है कि यदि समय रहते उसे विशेषज्ञ डॉक्टरों तक नहीं पहुंचाया गया तो उसकी स्थिति और गंभीर हो सकती है।
सर्दियों में सबसे बड़ी चुनौती
इकबाल की समस्या गर्मियों में किसी तरह पानी के सहारे संभल जाती है, लेकिन सर्दियों को लेकर परिवार की चिंता और बढ़ जाती है। आखिर जिस किशोर को जलन से राहत के लिए पानी में रहना पड़ता है, वह ठंड के मौसम में कैसे अपना जीवन गुजारेगा?
अगर वह पानी से बाहर नहीं रह सकता और पानी में लंबे समय तक रहने से उसके शरीर को नुकसान पहुंच रहा है, तो यह स्थिति बेहद जटिल हो जाती है। इसलिए परिवार को तत्काल विशेषज्ञ चिकित्सकीय सहायता की जरूरत है, ताकि बीमारी का वास्तविक कारण सामने आ सके और पानी में डूबे रहने की मजबूरी खत्म हो सके।
गरीबी बनी इलाज की राह में सबसे बड़ी बाधा
इकबाल की कहानी का सबसे दुखद पहलू यह भी है कि परिवार आर्थिक रूप से कमजोर है। बीमारी की शुरुआत से ही अगर उसे विशेषज्ञ डॉक्टरों की सुविधा मिल जाती तो शायद समस्या का कारण पहले ही पता चल सकता था। लेकिन इलाज का खर्च और अस्पताल तक पहुंच परिवार के लिए बड़ी चुनौती बना रहा।
कई गरीब परिवारों की तरह इकबाल का परिवार भी बीमारी और आर्थिक परेशानी के बीच फंस गया है। एक तरफ बेटे की हालत लगातार बिगड़ रही है, दूसरी तरफ उसके इलाज का खर्च उठाना परिवार के लिए मुश्किल है।
इसी कारण स्थानीय लोगों ने प्रशासन और संबंधित अधिकारियों से हस्तक्षेप की मांग की है। लोगों की अपील है कि इकबाल को किसी सरकारी या विशेषज्ञ चिकित्सा संस्थान में ले जाकर उसकी पूरी जांच कराई जाए और यदि किसी लंबे इलाज की जरूरत हो तो परिवार को सरकारी सहायता उपलब्ध कराई जाए।
स्थानीय लोगों ने भी उठाई मदद की आवाज
इकबाल की हालत देखकर आसपास के लोग भी चिंतित हैं। लोगों का कहना है कि एक 17 वर्षीय किशोर का इस तरह पानी में जीवन बिताना सामान्य स्थिति नहीं है। वह दूसरे बच्चों की तरह स्कूल, खेल और सामाजिक जीवन से जुड़ने के बजाय बीमारी से जूझ रहा है।
स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेते हुए उसके इलाज की व्यवस्था करेगा। यदि विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम उसकी जांच करती है तो बीमारी के कारण का पता लगाया जा सकता है और उसके लिए उचित उपचार की दिशा तय की जा सकती है।
इकबाल को तालाब नहीं, इलाज की जरूरत
इकबाल की कहानी समाज और प्रशासन दोनों के सामने एक बड़ा सवाल खड़ा करती है। किसी किशोर को बीमारी से राहत पाने के लिए वर्षों तक तालाब के पानी में रहने की नौबत क्यों आई? अगर परिवार आर्थिक रूप से कमजोर है तो क्या उसे समय पर सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच नहीं मिलनी चाहिए?
तालाब का पानी इकबाल को कुछ समय के लिए राहत जरूर देता है, लेकिन यह उसकी बीमारी का इलाज नहीं है। लंबे समय तक पानी में रहना उसकी त्वचा और स्वास्थ्य के लिए नई मुश्किलें पैदा कर सकता है। इसलिए सबसे जरूरी है कि उसे जल्द से जल्द योग्य चिकित्सकों की देखरेख में लाया जाए।
17 साल की उम्र जिंदगी के सपने देखने की होती है, तालाब में डूबकर दिन गुजारने की नहीं। इकबाल के लिए अब सबसे बड़ी जरूरत किसी चमत्कार की नहीं, बल्कि सही चिकित्सकीय जांच, विशेषज्ञ इलाज और आर्थिक मदद की है। यदि प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग समय पर आगे आते हैं, तो शायद यह किशोर फिर से पानी के सहारे नहीं, बल्कि सामान्य जिंदगी के सहारे अपने भविष्य की ओर बढ़ सके।
