उत्तराखंड में वर्षों से नियमितीकरण की मांग कर रहे लगभग 22 हजार उपनल कर्मचारियों के लिए एक बार फिर उम्मीद की किरण जगी है। नैनीताल हाईकोर्ट में अवमानना याचिका की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अपना पहले से दाखिल शपथ पत्र वापस लेते हुए नया हलफनामा दाखिल करने के लिए समय मांगा है। हाईकोर्ट ने सरकार को 27 अगस्त तक नया शपथ पत्र दाखिल करने की अनुमति दी है, जबकि मामले की अगली सुनवाई 10 सितंबर को होगी। सबसे अहम बात यह है कि उस दिन राज्य सरकार के तीन वरिष्ठ सचिवों को स्वयं अदालत में उपस्थित होना होगा।
देहरादून: उत्तराखंड पूर्व सैनिक कल्याण निगम लिमिटेड (उपनल) कर्मचारियों के नियमितीकरण का बहुचर्चित मामला अब निर्णायक मोड़ की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। गुरुवार को नैनीताल हाईकोर्ट में उपनल कर्मचारी संघ द्वारा दायर अवमानना याचिका पर हुई सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए अपना पूर्व में दाखिल शपथ पत्र वापस ले लिया। यह शपथ पत्र अभी न्यायालय के रिकॉर्ड का हिस्सा नहीं बना था, इसलिए सरकार ने नया शपथ पत्र दाखिल करने की अनुमति मांगी, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया।
हाईकोर्ट ने सरकार को 27 अगस्त तक नया शपथ पत्र दाखिल करने का समय दिया है, जबकि मामले की अगली सुनवाई 10 सितंबर को निर्धारित की गई है। अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि उस दिन सचिव कार्मिक एवं सतर्कता शैलेश बगौली, सचिव वित्त दिलीप जावलकर तथा सचिव सैनिक कल्याण बोर्ड युगल पंत को व्यक्तिगत रूप से न्यायालय में उपस्थित होना होगा।
कोर्ट ने सरकार के रवैये पर जताई नाराजगी
सुनवाई के दौरान उपनल कर्मचारी संघ की ओर से यह मुद्दा जोरदार तरीके से उठाया गया कि सरकार हाईकोर्ट के पूर्व आदेशों के विपरीत उपनल कर्मचारियों से नए अनुबंध भरवा रही है। संघ ने इसे न्यायालय के आदेशों की अवहेलना बताते हुए कड़ी आपत्ति दर्ज कराई।
मामले की सुनवाई कर रहे न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल ने भी सरकार के रवैये पर सख्त टिप्पणी करते हुए पूछा कि आखिर कोर्ट के आदेशों का बार-बार पालन क्यों नहीं किया जा रहा है। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि सरकार को कई बार सुधार का अवसर दिया जा चुका है, लेकिन अब आदेशों के अनुपालन में लगातार हो रही देरी पर गंभीरता से विचार किया जाएगा।
सरकार की ओर से तुषार मेहता ने रखी दलील
राज्य सरकार की ओर से भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता हाईकोर्ट में पेश हुए। उन्होंने अदालत से अनुरोध किया कि सरकार को नया शपथ पत्र दाखिल करने के लिए कुछ समय दिया जाए। अदालत ने इस अनुरोध को स्वीकार करते हुए 27 अगस्त तक का समय प्रदान किया और अगली सुनवाई 10 सितंबर तय कर दी।
एक साल से लंबित है आदेश का पालन
उपनल कर्मचारी संघ का कहना है कि पिछले लगभग एक वर्ष से सरकार लगातार अतिरिक्त समय मांगकर मामले को आगे बढ़ाती रही है। इससे प्रदेशभर के हजारों उपनल कर्मचारियों में भारी नाराजगी है। कर्मचारियों का आरोप है कि अदालत के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद सरकार नियमितीकरण की प्रक्रिया को लागू करने के बजाय नए अनुबंधों के जरिए मामले को टालने का प्रयास कर रही है।
2018 से चल रही है कानूनी लड़ाई
यह मामला वर्ष 2018 से न्यायालय में चल रहा है। उस समय उत्तराखंड हाईकोर्ट ने उपनल के संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण के पक्ष में महत्वपूर्ण आदेश दिया था। इसके बाद राज्य सरकार इस फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट पहुंची, लेकिन 2024 में सुप्रीम कोर्ट से भी सरकार को राहत नहीं मिली और कर्मचारियों के पक्ष में फैसला आया।
इसके बावजूद कर्मचारियों का आरोप है कि सरकार ने अब तक अदालत के आदेशों का पूर्ण अनुपालन नहीं किया, जिसके चलते हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर करनी पड़ी।
22 हजार कर्मचारियों की निगाहें 10 सितंबर पर
प्रदेश के लगभग 22 हजार उपनल कर्मचारी अब 10 सितंबर की सुनवाई को बेहद महत्वपूर्ण मान रहे हैं। चूंकि हाईकोर्ट ने तीन वरिष्ठ सचिवों की व्यक्तिगत उपस्थिति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं और सरकार से नया शपथ पत्र भी मांगा है, इसलिए माना जा रहा है कि इस तारीख पर मामले में कोई महत्वपूर्ण दिशा या निर्णायक प्रगति देखने को मिल सकती है।
यदि सरकार अदालत के समक्ष स्पष्ट कार्ययोजना प्रस्तुत करती है, तो लंबे समय से नियमितीकरण की मांग कर रहे हजारों कर्मचारियों को राहत मिलने की उम्मीद और मजबूत हो सकती है। वहीं, यदि आदेशों के अनुपालन में फिर देरी होती है, तो सरकार को न्यायालय की कड़ी टिप्पणी या आगे की सख्त कार्रवाई का भी सामना करना पड़ सकता है। फिलहाल पूरे उत्तराखंड के उपनल कर्मचारियों की निगाहें 10 सितंबर की सुनवाई पर टिकी हुई हैं, जहां इस बहुप्रतीक्षित मामले की अगली दिशा तय होगी।
