देहरादून। उत्तराखंड में मतदाता सूची को अधिक पारदर्शी, सटीक और त्रुटिरहित बनाने के उद्देश्य से चलाए जा रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision-SIR) अभियान ने अब दूसरा चरण शुरू कर दिया है। इस चरण में जिन मतदाताओं के दस्तावेजों या व्यक्तिगत विवरण में किसी प्रकार की कमी अथवा विसंगति पाई गई है, उन्हें नोटिस जारी कर आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए बुलाया जा रहा है। राज्यभर में लगभग 19.04 लाख मतदाताओं को नोटिस जारी किए जाने की प्रक्रिया जारी है, जिससे यह अभियान अब अपने सबसे महत्वपूर्ण चरण में प्रवेश कर चुका है।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बीवीआरसी पुरुषोत्तम ने सचिवालय में विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कर दस्तावेजों के समयबद्ध सत्यापन के लिए विस्तृत रणनीति तैयार की। बैठक में शिक्षा, स्वास्थ्य, राजस्व, पंचायती राज, शहरी विकास और आईटीडीए समेत कई विभागों के निदेशकों एवं वरिष्ठ अधिकारियों को राज्य स्तरीय नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया, ताकि मतदाताओं द्वारा प्रस्तुत किए जाने वाले दस्तावेजों का शीघ्र और निष्पक्ष सत्यापन सुनिश्चित किया जा सके।
सुनवाई के दौरान प्रस्तुत करने होंगे आवश्यक दस्तावेज
निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार जिन मतदाताओं को नोटिस प्राप्त हो रहा है, उन्हें निर्धारित तिथि पर उपस्थित होकर आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे। आयोग ने सत्यापन के लिए 11 प्रकार के दस्तावेजों को मान्यता दी है। इनमें मुख्य रूप से मैट्रिक अथवा अन्य शैक्षिक प्रमाणपत्र, जन्म प्रमाणपत्र, स्थायी निवास प्रमाणपत्र, जाति प्रमाणपत्र, परिवार रजिस्टर, भवन आवंटन प्रमाणपत्र सहित अन्य आवश्यक अभिलेख शामिल हैं।
इन दस्तावेजों की जांच पूरी पारदर्शिता और निर्धारित समय सीमा के भीतर हो, इसके लिए सभी संबंधित विभागों को स्पष्ट जिम्मेदारियां सौंप दी गई हैं।
विभागवार नोडल अधिकारियों को मिली अहम जिम्मेदारी
दस्तावेजों के सत्यापन को सुचारु रूप से संचालित करने के लिए विभिन्न विभागों को अलग-अलग जिम्मेदारी दी गई है।
- शैक्षिक प्रमाणपत्रों के सत्यापन के लिए माध्यमिक शिक्षा एवं उच्च शिक्षा विभाग के निदेशक नोडल अधिकारी बनाए गए हैं।
- स्थायी निवास, जाति प्रमाणपत्र और भवन आवंटन प्रमाणपत्र के सत्यापन की जिम्मेदारी राजस्व परिषद को सौंपी गई है।
- जन्म प्रमाणपत्रों की जांच के लिए शहरी विकास विभाग एवं स्वास्थ्य विभाग के निदेशकों को जिम्मेदारी दी गई है।
- परिवार रजिस्टर के सत्यापन के लिए पंचायती राज विभाग को नोडल बनाया गया है।
- विभिन्न विभागों की ऑनलाइन सेवाओं और डिजिटल रिकॉर्ड के समन्वय की जिम्मेदारी आईटीडीए के निदेशक को दी गई है।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने निर्देश दिए हैं कि राज्य स्तर पर नियुक्त सभी नोडल अधिकारी जिलों में तैनात अधिकारियों के साथ लगातार समन्वय बनाए रखें और सत्यापन प्रक्रिया की नियमित निगरानी करें, ताकि किसी भी स्तर पर अनावश्यक देरी न हो।
बीएलओ की मौजूदगी में होगा दस्तावेजों का सत्यापन
अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी विजय कुमार जोगदंडे ने बताया कि जिन मतदाताओं के रिकॉर्ड में किसी प्रकार की कमी या त्रुटि पाई गई है, उन्हें नोटिस जारी कर दस्तावेज प्रस्तुत करने का पूरा अवसर दिया जा रहा है। सत्यापन प्रक्रिया के दौरान बूथ लेवल अधिकारी (BLO) की मौजूदगी में संबंधित विभागों के अधिकारी दस्तावेजों की जांच करेंगे।
उन्होंने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य, राजस्व, पंचायती राज और अन्य विभागों के अधिकारी संयुक्त रूप से इस प्रक्रिया को पूरा करेंगे ताकि प्रत्येक दस्तावेज का निष्पक्ष और प्रमाणिक सत्यापन किया जा सके।
एक जिले से दूसरे जिले तक होगी समन्वित निगरानी
कई ऐसे मामले सामने आते हैं, जिनमें मतदाता का रिकॉर्ड एक जिले में होता है जबकि संबंधित दस्तावेज किसी अन्य जिले में जारी किए गए होते हैं। ऐसे मामलों को देखते हुए राज्य स्तर पर विशेष नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की गई है, ताकि विभिन्न जिलों के बीच समन्वय बनाकर सत्यापन प्रक्रिया को तेज किया जा सके।
निर्वाचन विभाग का उद्देश्य है कि अधिकतर मामलों का निस्तारण बूथ स्तर या तहसील स्तर पर ही कर दिया जाए। हालांकि जिन मामलों में विस्तृत जांच की आवश्यकता होगी, वहां दस्तावेजों के सत्यापन के लिए 48 घंटे तक का अतिरिक्त समय निर्धारित किया गया है।
पारदर्शी और त्रुटिरहित मतदाता सूची पर जोर
निर्वाचन आयोग का मानना है कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए शुद्ध और अद्यतन मतदाता सूची अत्यंत आवश्यक है। यदि मतदाता सूची में किसी प्रकार की त्रुटि रहती है तो चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता प्रभावित हो सकती है। इसी उद्देश्य से विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान चलाया जा रहा है, ताकि प्रत्येक पात्र नागरिक का नाम सही विवरण के साथ मतदाता सूची में दर्ज रहे और अपात्र अथवा त्रुटिपूर्ण प्रविष्टियों को समय रहते सुधारा जा सके।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यह अभियान किसी भी मतदाता को अनावश्यक रूप से परेशान करने के लिए नहीं, बल्कि मतदाता सूची को अधिक विश्वसनीय और सटीक बनाने के लिए संचालित किया जा रहा है। जिन मतदाताओं को नोटिस प्राप्त हुआ है, वे निर्धारित तिथि पर अपने मूल दस्तावेजों के साथ उपस्थित होकर सत्यापन प्रक्रिया पूरी करें।
समयबद्ध कार्रवाई के निर्देश
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने सभी विभागों को निर्देश दिए हैं कि दस्तावेजों के सत्यापन में किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए। सभी नोडल अधिकारी नियमित रूप से प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे और जिला प्रशासन के साथ समन्वय बनाकर कार्य करेंगे। यदि किसी दस्तावेज के सत्यापन में अतिरिक्त जांच की आवश्यकता होगी, तो उसे निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा किया जाएगा।
उत्तराखंड में चल रहा यह विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान आने वाले समय में राज्य की मतदाता सूची को अधिक पारदर्शी, सटीक और विश्वसनीय बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। निर्वाचन विभाग का लक्ष्य है कि प्रत्येक पात्र मतदाता बिना किसी परेशानी के अपने मतदान अधिकार का प्रयोग कर सके और चुनाव प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष एवं पारदर्शी बनी रहे।
