सावन के साथ शुरू हुई आस्था की सबसे बड़ी यात्रा, हर-हर महादेव और बोल बम के जयघोष से गूंज उठी धर्मनगरी; सुरक्षा, ट्रैफिक और सुविधाओं को लेकर प्रशासन पूरी तरह अलर्ट
हरिद्वार। सावन माह के शुभारंभ के साथ ही उत्तराखंड की धर्मनगरी हरिद्वार एक बार फिर भगवान शिव की भक्ति में पूरी तरह रंग गई है। गुरुवार से विश्व प्रसिद्ध कांवड़ मेले 2026 का विधिवत शुभारंभ हो गया। हरकी पैड़ी पर सुबह से ही हजारों शिवभक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी। गंगा स्नान के बाद श्रद्धालुओं ने पवित्र गंगाजल अपनी कांवड़ में भरकर “हर-हर महादेव” और “बोल बम” के जयघोष के साथ अपने-अपने गंतव्य की ओर प्रस्थान किया। पूरे शहर का वातावरण शिवमय हो चुका है और हर सड़क पर भगवा वस्त्रों में नजर आ रहे कांवड़िए भक्ति और उत्साह का अद्भुत दृश्य प्रस्तुत कर रहे हैं।
इस बार उत्तराखंड सरकार और प्रशासन को उम्मीद है कि पूरे मेले के दौरान करीब 5 करोड़ श्रद्धालु हरिद्वार पहुंच सकते हैं। इतनी बड़ी संख्या को देखते हुए सुरक्षा, ट्रैफिक, स्वास्थ्य, पेयजल, स्वच्छता और आपदा प्रबंधन के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। प्रशासन का दावा है कि इस बार कांवड़ यात्रा को पहले से अधिक सुरक्षित, व्यवस्थित और सुविधाजनक बनाया गया है।
हरिद्वार में हर ओर दिख रहा शिवभक्ति का उत्साह
कांवड़ मेले की शुरुआत के साथ ही हरिद्वार की गलियां, घाट, मंदिर और मुख्य मार्ग पूरी तरह शिवभक्तों से भर गए हैं। हरकी पैड़ी, भीमगौड़ा, ऋषिकुल, ज्वालापुर और कांवड़ पटरी मार्ग पर सुबह से देर रात तक श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी हुई है।
देश के अलग-अलग राज्यों से आए कांवड़िए गंगा जल लेकर अपने-अपने गांव और शहरों की ओर रवाना हो रहे हैं। कई श्रद्धालु पैदल यात्रा कर रहे हैं, जबकि आने वाले दिनों में डाक कांवड़ और वाहन आधारित कांवड़ यात्रा भी शुरू होगी। प्रशासन का अनुमान है कि महाशिवरात्रि के नजदीक पहुंचते-पहुंचते श्रद्धालुओं की संख्या कई गुना बढ़ जाएगी।
18 सुपर जोन, 40 जोन और 141 सेक्टर में बांटा गया मेला क्षेत्र
इतने विशाल धार्मिक आयोजन को व्यवस्थित ढंग से संचालित करने के लिए पूरे मेला क्षेत्र को प्रशासन ने विशेष सुरक्षा ढांचे में विभाजित किया है। पूरे क्षेत्र को 18 सुपर जोन, 40 जोन और 141 सेक्टरों में बांटा गया है, जहां वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस अधिकारियों की तैनाती की गई है।
प्रत्येक सेक्टर में अलग-अलग टीमें लगातार निगरानी कर रही हैं ताकि किसी भी प्रकार की अव्यवस्था या आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके। जिला प्रशासन, पुलिस, स्वास्थ्य विभाग, नगर निगम, विद्युत विभाग, जल संस्थान, परिवहन विभाग और आपदा प्रबंधन की टीमें आपसी समन्वय के साथ काम कर रही हैं।
6000 पुलिसकर्मी, पैरामिलिट्री और पीएसी संभाल रही सुरक्षा की कमान
कांवड़ मेले को शांतिपूर्ण और सुरक्षित बनाने के लिए इस बार सुरक्षा व्यवस्था को अभूतपूर्व स्तर पर मजबूत किया गया है।
पूरे मेले में करीब 6000 पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं। इसके अलावा 13 कंपनियां पैरामिलिट्री फोर्स और पीएसी भी सुरक्षा व्यवस्था संभाल रही हैं। संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त पुलिस बल लगाया गया है।
हरकी पैड़ी, प्रमुख मंदिरों, रेलवे स्टेशन, बस अड्डों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में विशेष निगरानी रखी जा रही है। डॉग स्क्वॉड और बम निरोधक दस्ते (बीडीएस) लगातार चेकिंग कर रहे हैं ताकि किसी भी प्रकार की संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत कार्रवाई की जा सके।
इसके अलावा सीसीटीवी कैमरों और आधुनिक निगरानी प्रणाली के माध्यम से पूरे मेला क्षेत्र पर चौबीसों घंटे नजर रखी जा रही है।
श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए व्यापक इंतजाम
इस बार प्रशासन ने केवल सुरक्षा पर ही नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं की सुविधाओं पर भी विशेष ध्यान दिया है।
पूरे कांवड़ मार्ग पर जगह-जगह पेयजल केंद्र, अस्थायी शौचालय, मेडिकल कैंप, विश्राम स्थल और सफाई व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। स्वास्थ्य विभाग की एम्बुलेंस और मेडिकल टीमें चौबीसों घंटे तैनात रहेंगी ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत सहायता उपलब्ध कराई जा सके।
नगर निगम ने सफाई व्यवस्था को लेकर विशेष अभियान शुरू किया है ताकि लाखों श्रद्धालुओं के आने के बावजूद शहर स्वच्छ बना रहे।
परिवहन मंत्री प्रदीप बत्रा बोले— हर शिवभक्त की सुरक्षा हमारी जिम्मेदारी
उत्तराखंड के परिवहन मंत्री प्रदीप बत्रा ने कहा कि सरकार ने कांवड़ मेले की सभी तैयारियां समय रहते पूरी कर ली हैं।
उन्होंने कहा कि “देवभूमि उत्तराखंड ‘अतिथि देवो भवः’ की भावना के साथ सभी शिवभक्तों का स्वागत करने के लिए तैयार है। हमारा प्रयास है कि प्रत्येक श्रद्धालु सुरक्षित, सुगम और सुविधाजनक यात्रा का अनुभव करे। प्रत्येक कांवड़िए को सकुशल उसके गंतव्य तक पहुंचाना हमारी प्राथमिक जिम्मेदारी है।”
उन्होंने यह भी बताया कि कांवड़ मार्गों की मरम्मत, हाईवे के गड्ढों को भरने और आवश्यक निर्माण कार्य समय पर पूरे कर लिए गए हैं ताकि यात्रा के दौरान किसी प्रकार की असुविधा न हो।
संत समाज ने की व्यसन मुक्त कांवड़ यात्रा की अपील
कांवड़ मेले को लेकर संत समाज में भी उत्साह का माहौल है।
जूना अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि महाराज ने श्रद्धालुओं से अपील की कि कांवड़ यात्रा पूरी श्रद्धा, अनुशासन और संयम के साथ करें।
उन्होंने कहा कि भगवान शिव के भक्तों को नशे से दूर रहना चाहिए और यात्रा के दौरान डीजे या अत्यधिक ध्वनि प्रदूषण फैलाने वाले उपकरणों का प्रयोग नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि कांवड़ यात्रा केवल धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि आत्मसंयम और भक्ति का पर्व है।
संतों ने श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि वे यात्रा के दौरान अनुशासन बनाए रखें और प्रशासन के निर्देशों का पालन करें ताकि यह विशाल धार्मिक आयोजन सफल और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके।
हरिद्वार के स्कूलों और आंगनबाड़ियों में 11 अगस्त तक अवकाश
कांवड़ मेले के दौरान भारी भीड़ और ट्रैफिक डायवर्जन को देखते हुए हरिद्वार के जिलाधिकारी ने बड़ा फैसला लिया है।
जिले के सभी सरकारी एवं निजी विद्यालयों, उच्च शिक्षण संस्थानों, तकनीकी संस्थानों तथा सभी आंगनबाड़ी केंद्रों में 30 जुलाई से 11 अगस्त 2026 तक अवकाश घोषित किया गया है।
हालांकि छात्रों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए सभी शिक्षण संस्थानों को ऑनलाइन कक्षाएं संचालित करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन का कहना है कि यह फैसला विद्यार्थियों की सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के उद्देश्य से लिया गया है।
ट्रैफिक प्लान पूरी तरह बदला, श्रद्धालुओं और आम लोगों के लिए अलग-अलग व्यवस्था
कांवड़ मेले के दौरान हरिद्वार और आसपास के क्षेत्रों में भारी भीड़ को देखते हुए इस बार प्रशासन ने व्यापक ट्रैफिक प्लान लागू किया है। पुलिस और परिवहन विभाग ने पहले से ही कई मार्गों को डायवर्ट कर दिया है ताकि कांवड़ियों की यात्रा सुरक्षित और सुचारु बनी रहे तथा आम नागरिकों को भी कम से कम परेशानी का सामना करना पड़े।
प्रशासन के अनुसार, सावन माह के चारों सोमवार और विशेष रूप से 11 अगस्त को महाशिवरात्रि के अवसर पर श्रद्धालुओं की संख्या सबसे अधिक रहने की संभावना है। इसी कारण चरणबद्ध तरीके से ट्रैफिक व्यवस्था लागू की जाएगी। भारी वाहनों के लिए वैकल्पिक मार्ग निर्धारित किए गए हैं, जबकि कांवड़ मार्गों पर केवल श्रद्धालुओं की आवाजाही को प्राथमिकता दी जाएगी।
हरिद्वार पुलिस ने लोगों से अपील की है कि यात्रा पर निकलने से पहले ट्रैफिक एडवाइजरी अवश्य देखें और प्रशासन द्वारा तय किए गए मार्गों का ही उपयोग करें।
दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर कांवड़ियों की एंट्री पूरी तरह प्रतिबंधित
इस वर्ष की सबसे महत्वपूर्ण व्यवस्था दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर (एक्सप्रेसवे) को लेकर की गई है। उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश पुलिस ने संयुक्त रणनीति बनाते हुए स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी कांवड़िये को एक्सप्रेसवे पर प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा।
भगवानपुर सीमा से ही श्रद्धालुओं को वैकल्पिक मार्गों की ओर भेजा जाएगा। प्रशासन का कहना है कि एक्सप्रेसवे तेज गति वाले यातायात के लिए बनाया गया है। यदि यहां कांवड़ियों की आवाजाही शुरू हो गई तो दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ सकता है और दिल्ली-देहरादून के बीच सामान्य यातायात भी पूरी तरह प्रभावित हो जाएगा।
इसलिए एक्सप्रेसवे केवल सामान्य वाहनों, एम्बुलेंस, दमकल और अन्य आपातकालीन सेवाओं के लिए खुला रहेगा। हर प्रवेश बिंदु पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है।
सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने वालों पर रहेगी कड़ी नजर
पिछले कुछ वर्षों में कांवड़ यात्रा के दौरान सोशल मीडिया पर कई बार भ्रामक वीडियो और अफवाहें वायरल होने से कानून-व्यवस्था प्रभावित हुई है। इसी को ध्यान में रखते हुए इस बार पुलिस ने विशेष साइबर मॉनिटरिंग की व्यवस्था की है।
मेला कंट्रोल रूम में विशेष साइबर सेल स्थापित किया गया है, जहां प्रशिक्षित साइबर कमांडो चौबीसों घंटे फेसबुक, इंस्टाग्राम, एक्स (ट्विटर), यूट्यूब और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर नजर रखेंगे।
यदि कोई व्यक्ति फर्जी वीडियो, सांप्रदायिक या भड़काऊ पोस्ट अथवा अफवाह फैलाने वाली सामग्री साझा करता पाया गया, तो उसके खिलाफ तत्काल कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अपुष्ट सूचना को साझा न करें और केवल प्रशासन की आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करें।
आईजी और एडीजी ने अधिकारियों को दिए विशेष निर्देश
गढ़वाल रेंज के आईजी राजीव स्वरूप ने सभी पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि मेले के दौरान छोटी से छोटी घटना पर भी तुरंत कार्रवाई की जाए।
उन्होंने कहा कि धार्मिक भावनाओं को भड़काने वाले तत्वों, डीजे पर आपत्तिजनक गीत बजाने, सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने और असामाजिक गतिविधियों पर विशेष निगरानी रखी जाए।
एडीजी लॉ एंड ऑर्डर वी. मुरुगेशन ने कांवड़ यात्रा को उत्तराखंड के सबसे चुनौतीपूर्ण आयोजनों में से एक बताते हुए कहा कि सभी अधिकारी पूरी सतर्कता और समन्वय के साथ कार्य करें। वहीं एसटीएफ आईजी नीलेश आनंद भरणे ने ट्रैफिक व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू करने और हरकी पैड़ी सहित संवेदनशील स्थानों पर विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिए।
श्रद्धालुओं के लिए जारी हुई नई गाइडलाइन
हरिद्वार पुलिस ने इस बार श्रद्धालुओं के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इनके अनुसार किसी भी प्रकार के जुगाड़ वाहन, रेट्रो साइलेंसर, तलवार, त्रिशूल, भाले या अन्य हथियार लेकर आने की अनुमति नहीं होगी।
पैदल कांवड़ की ऊंचाई अधिकतम 6 फीट तथा झांकी की ऊंचाई 10 फीट निर्धारित की गई है, ताकि बिजली की लाइनों से दुर्घटनाओं की संभावना न रहे।
नशे की हालत में किसी भी श्रद्धालु को हरिद्वार में प्रवेश नहीं दिया जाएगा। प्रत्येक कांवड़िए को अपने साथ वैध पहचान पत्र रखना अनिवार्य होगा। चलती ट्रेन की छत या अन्य असुरक्षित स्थानों पर यात्रा करने वालों के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासन ने सभी श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे नियमों का पालन करें और यात्रा को सुरक्षित एवं अनुशासित बनाए रखें।
रेलवे ने चलाई विशेष कांवड़ मेला स्पेशल ट्रेनें
श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए भारतीय रेलवे ने भी विशेष तैयारियां की हैं। रेलवे प्रशासन ने मेले के दौरान कई कांवड़ मेला स्पेशल ट्रेनें चलाने का निर्णय लिया है।
हरिद्वार से दिल्ली शाहदरा, योगनगरी ऋषिकेश से दिल्ली शाहदरा और योगनगरी ऋषिकेश से आलमनगर तक विशेष ट्रेनें संचालित होंगी। इसके अलावा दिल्ली-शामली डीएमयू और दिल्ली-सहारनपुर मेमू ट्रेनों का हरिद्वार तक विस्तार किया गया है।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार आवश्यकता पड़ने पर नियमित ट्रेनों में अतिरिक्त कोच भी लगाए जाएंगे, ताकि श्रद्धालुओं को यात्रा के दौरान किसी प्रकार की परेशानी न हो।
हरिद्वार के निकट स्थित ज्वालापुर और मोतीचूर रेलवे स्टेशनों पर भी कई ट्रेनों का अस्थायी ठहराव किया गया है। इससे यात्रियों को भीड़ से राहत मिलेगी और स्टेशन पर दबाव कम होगा।
प्रशासन का लक्ष्य— सुरक्षित, स्वच्छ और व्यवस्थित कांवड़ यात्रा
जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने कहा कि सभी विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया गया है। स्वास्थ्य, नगर निगम, बिजली, जल संस्थान, परिवहन और पुलिस विभाग संयुक्त रूप से कार्य कर रहे हैं।
एसएसपी नवनीत सिंह ने पुलिसकर्मियों को निर्देश दिए हैं कि लगातार बारिश की संभावना को देखते हुए सभी अपने साथ रेनकोट, टॉर्च और आवश्यक सुरक्षा उपकरण रखें। उन्होंने कहा कि ड्यूटी के दौरान धैर्य, विनम्रता और संवेदनशीलता बनाए रखना बेहद जरूरी है।
श्रद्धालुओं की आस्था और प्रशासन की जिम्मेदारी का सबसे बड़ा संगम
कांवड़ यात्रा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था, विश्वास और सांस्कृतिक परंपरा का प्रतीक है। हर वर्ष लाखों शिवभक्त कठिन यात्रा कर पवित्र गंगाजल अपने-अपने शिवालयों तक पहुंचाते हैं। इस दौरान उत्तराखंड सरकार, प्रशासन, पुलिस, स्वास्थ्य विभाग, स्वयंसेवी संस्थाएं और स्थानीय नागरिक मिलकर श्रद्धालुओं की सेवा में जुटे रहते हैं।
इस बार पांच करोड़ श्रद्धालुओं के आगमन का अनुमान प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती भी है और जिम्मेदारी भी। सुरक्षा व्यवस्था, ट्रैफिक प्रबंधन, स्वास्थ्य सेवाएं, स्वच्छता, साइबर निगरानी और परिवहन की व्यापक तैयारियां इस बात का संकेत हैं कि सरकार किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है।
