बांकीपुर की सियासी जंग हुई और भी दिलचस्प, एक ओर भाजपा ने चुनाव आयोग से की सख्त कार्रवाई की मांग, दूसरी ओर जन सुराज ने नेताओं की अवैध हिरासत का लगाया आरोप
पटना: बिहार की राजनीति का केंद्र बने बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में मतदान के दिन माहौल बेहद गर्म दिखाई दिया। सुबह सात बजे मतदान शुरू होने के साथ ही राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने चुनाव आयोग से फर्जी मतदान की आशंका जताते हुए मतदान प्रक्रिया को और सख्त बनाने की मांग की, वहीं जन सुराज पार्टी ने पुलिस पर पक्षपातपूर्ण कार्रवाई का आरोप लगाया। इस पूरे घटनाक्रम के बीच जन सुराज के संस्थापक और उम्मीदवार प्रशांत किशोर (पीके) की पुलिस अधिकारियों के साथ तीखी बहस भी चर्चा का विषय बन गई।
बांकीपुर उपचुनाव पहले से ही राज्य की सबसे चर्चित चुनावी लड़ाइयों में शामिल था, लेकिन मतदान के दिन हुए घटनाक्रम ने इसे और भी हाई-प्रोफाइल बना दिया। राजनीतिक दलों के आरोपों और पुलिस की कार्रवाई को लेकर पूरे दिन चुनावी माहौल गरमाया रहा।
भाजपा ने चुनाव आयोग को लिखा पत्र
मतदान शुरू होने के कुछ ही समय बाद भाजपा ने चुनाव आयोग को लिखित शिकायत देकर चुनाव की निष्पक्षता पर चिंता जताई। भाजपा के राज्य महासचिव नितिन अभिषेक ने रिटर्निंग ऑफिसर को दिए पत्र में कहा कि जन सुराज पार्टी से जुड़े कुछ लोग कथित तौर पर फर्जी मतदान कराने की कोशिश कर सकते हैं।
भाजपा ने मांग की कि प्रत्येक मतदाता की पहचान का सख्ती से सत्यापन किया जाए। पार्टी ने विशेष रूप से इलेक्टोरल फोटो आइडेंटिटी कार्ड (EPIC) और आधिकारिक मतदाता सूची में दर्ज नाम का मिलान अनिवार्य रूप से कराने की अपील की। भाजपा का कहना है कि यदि पहचान सत्यापन में किसी तरह की ढिलाई बरती गई तो मतदान की पारदर्शिता प्रभावित हो सकती है।
पार्टी नेताओं का कहना है कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए हर मतदाता की पहचान का सही तरीके से सत्यापन होना आवश्यक है, ताकि किसी भी प्रकार की अनियमितता की गुंजाइश न रहे।
जन सुराज का पलटवार
भाजपा के आरोपों के तुरंत बाद जन सुराज ने भी प्रशासन पर गंभीर सवाल उठाए। पार्टी का आरोप है कि मतदान से ठीक पहले उसके 16 से अधिक नेताओं और कार्यकर्ताओं को बिना उचित कानूनी प्रक्रिया के हिरासत में लिया गया।
जन सुराज का कहना है कि यह कार्रवाई चुनाव को प्रभावित करने और पार्टी के चुनावी प्रबंधन को कमजोर करने के उद्देश्य से की गई। पार्टी नेताओं का आरोप है कि कई लोगों को अलग-अलग थानों में ले जाया गया, जिससे उनके परिजनों और सहयोगियों को काफी देर तक उनकी सही जानकारी नहीं मिल सकी।
रातभर थानों के चक्कर लगाते रहे प्रशांत किशोर
जन सुराज के संस्थापक और बांकीपुर से उम्मीदवार प्रशांत किशोर ने दावा किया कि मतदान से पहले पूरी रात वे अपने नेताओं की तलाश में अलग-अलग थानों के चक्कर लगाते रहे। उन्होंने आरोप लगाया कि हिरासत में लिए गए लोगों को पहले एक थाने में रखा गया और बाद में दूसरी जगह भेज दिया गया, जिससे उनकी लोकेशन का पता लगाने में काफी समय लगा।
प्रशांत किशोर ने कहा कि यदि उनके नेताओं ने कोई कानून तोड़ा है तो उनके खिलाफ विधिसम्मत कार्रवाई की जाए, लेकिन केवल चुनावी गतिविधियों को रोकने के लिए लोगों को हिरासत में रखना लोकतांत्रिक प्रक्रिया के खिलाफ है।
जक्कनपुर थाने में पुलिस से तीखी बहस
मतदान से पहले की रात जक्कनपुर थाने में प्रशांत किशोर और पुलिस अधिकारियों के बीच तीखी बहस भी देखने को मिली। इस दौरान काफी देर तक दोनों पक्षों के बीच बातचीत चली। घटनास्थल पर मौजूद कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों की भीड़ के कारण माहौल तनावपूर्ण हो गया।
हालांकि पुलिस अधिकारियों ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने की आवश्यकता का हवाला दिया, जबकि जन सुराज नेताओं ने कार्रवाई को राजनीतिक दबाव में उठाया गया कदम बताया।
’10 नेता पटना के ही निवासी’
प्रशांत किशोर ने दावा किया कि हिरासत में लिए गए लोगों में से 10 नेता पटना के निवासी हैं। उन्होंने कहा कि इन्हें बाहरी व्यक्ति बताकर कार्रवाई को सही ठहराने की कोशिश की जा रही है, जबकि वास्तविकता इससे अलग है।
उनका आरोप है कि कई लोगों को उनके घरों से उठाया गया और उन्हें चुनावी प्रक्रिया से दूर रखने की कोशिश की गई।
भाजपा पर लगाए गंभीर आरोप
प्रशांत किशोर ने भाजपा पर भी कई राजनीतिक आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि चुनाव प्रचार के दौरान भाजपा ने अपने सभी प्रमुख नेताओं, मंत्रियों और गठबंधन सहयोगियों को मैदान में उतारा, लेकिन अपेक्षित जनसमर्थन नहीं मिला।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि चुनाव प्रचार के दौरान विभिन्न तरीके अपनाने के बाद अब प्रशासनिक मशीनरी का इस्तेमाल कर जन सुराज के नेताओं और कार्यकर्ताओं को परेशान किया जा रहा है। हालांकि भाजपा ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि वह केवल निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव चाहती है।
मतदान के बीच बढ़ी राजनीतिक सरगर्मी
बांकीपुर उपचुनाव की शुरुआत से ही इसे बिहार की प्रतिष्ठित राजनीतिक लड़ाइयों में गिना जा रहा है। भाजपा के लिए यह सीट अपनी राजनीतिक पकड़ बनाए रखने की चुनौती है, जबकि जन सुराज के लिए यह चुनाव अपनी राजनीतिक ताकत साबित करने का बड़ा अवसर माना जा रहा है।
इसी वजह से मतदान के दौरान हर छोटी-बड़ी घटना पर राजनीतिक दलों की पैनी नजर बनी रही। मतदान केंद्रों के बाहर सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी रखी गई ताकि किसी प्रकार की अप्रिय घटना न हो।
चुनाव आयोग की भूमिका पर नजर
भाजपा की शिकायत और जन सुराज के आरोपों के बाद अब सभी की निगाहें चुनाव आयोग की कार्रवाई पर हैं। आयोग के अधिकारी पूरे मतदान प्रक्रिया पर नजर बनाए हुए हैं। यदि किसी भी बूथ से अनियमितता की शिकायत मिलती है तो संबंधित अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी जा सकती है।
चुनाव आयोग लगातार यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहा है कि मतदान पूरी तरह स्वतंत्र, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो।
नतीजों पर टिकी पूरे बिहार की नजर
बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव केवल एक सीट का चुनाव नहीं रह गया है, बल्कि इसे बिहार की बदलती राजनीतिक तस्वीर का संकेतक भी माना जा रहा है। एक तरफ भाजपा अपनी मजबूत पकड़ बनाए रखने की कोशिश कर रही है, तो दूसरी ओर जन सुराज इस चुनाव के जरिए अपनी राजनीतिक स्वीकार्यता साबित करना चाहता है।
मतदान के दौरान सामने आए आरोप, पुलिस कार्रवाई और राजनीतिक बयानबाजी ने इस चुनाव को और भी दिलचस्प बना दिया है। अब सभी की निगाहें मतगणना और अंतिम परिणाम पर टिकी हैं। परिणाम यह तय करेंगे कि बांकीपुर की जनता ने किस राजनीतिक दल और किस नेतृत्व पर भरोसा जताया, लेकिन इतना तय है कि इस उपचुनाव ने बिहार की राजनीति में नई बहस और नई हलचल जरूर पैदा कर दी है।
