लोकसभा में बुधवार को एंटी-पेपर लीक बिल पर हुई चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी राजनीतिक नोकझोंक देखने को मिली। सदन में बिल पर चर्चा का जवाब देते हुए केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने राहुल गांधी के हालिया विरोध प्रदर्शन का जिक्र करते हुए मशहूर शायर मिर्जा गालिब का प्रसिद्ध शेर सुनाया और तंज कसते हुए कहा कि प्रधानमंत्री आवास में बैठने की उनकी इच्छा पूरी नहीं हुई, इसलिए वे उसके बाहर जाकर धरने पर बैठ गए।
लोकसभा में दिए गए अपने संबोधन में जितेंद्र सिंह ने न केवल राहुल गांधी बल्कि कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई और प्रियंका गांधी वाड्रा के आरोपों का भी विस्तार से जवाब दिया। साथ ही उन्होंने मोदी सरकार की शिक्षा नीति, मेडिकल शिक्षा, विश्वविद्यालयों की संख्या और पेपर लीक मामलों में की गई कार्रवाई का भी उल्लेख किया। इस दौरान सदन में कई बार सत्ता पक्ष और विपक्ष के सदस्यों के बीच तीखी बहस और हंगामे की स्थिति भी बनी रही।
राहुल गांधी पर गालिब के शेर से तंज
अपने भाषण के दौरान केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने 21 जुलाई की घटना का जिक्र करते हुए कहा कि नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी प्रधानमंत्री आवास 7, लोक कल्याण मार्ग के बाहर जाकर बैठ गए थे। उन्होंने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा कि शायद वर्षों से राहुल गांधी की इच्छा रही होगी कि देश उन्हें प्रधानमंत्री चुने और वे उसी आवास में रहें। जब यह सपना पूरा नहीं हुआ तो वे उसके बाहर जाकर बैठ गए।
उन्होंने कहा कि जब उन्हें समझाने की कोशिश की गई कि इस तरह का प्रदर्शन नेता प्रतिपक्ष की गरिमा के अनुरूप नहीं है, तब भी वे वहां से हटने को तैयार नहीं थे। इसके बाद पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा। इसी संदर्भ में जितेंद्र सिंह ने गालिब का मशहूर शेर पढ़ते हुए कहा—
“बड़े बेआबरू होकर तेरे कूचे से हम निकले,
बहुत निकले मेरे अरमान लेकिन फिर भी कम निकले।”
उन्होंने कहा कि यह शेर राहुल गांधी की उस कथित राजनीतिक इच्छा को दर्शाता है, जो प्रधानमंत्री आवास तक पहुंचने की रही है।
‘MIA’ और ‘FOMO’ का भी किया जिक्र
अपने भाषण में जितेंद्र सिंह ने युवाओं के बीच प्रचलित शब्दों का भी इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि शुरुआत में राहुल गांधी छात्र आंदोलन से दूरी बनाए हुए थे, लेकिन जब उन्हें लगा कि आंदोलन जोर पकड़ रहा है तो वे उसमें शामिल होने पहुंच गए।
उन्होंने कहा कि पहले वे “MIA (Missing in Action)” थे, लेकिन बाद में “FOMO (Fear of Missing Out)” की वजह से आंदोलन में शामिल हुए। मंत्री ने कहा कि यह केवल राजनीतिक उपस्थिति दर्ज कराने की कोशिश थी।
गौरव गोगोई के आरोपों का दिया जवाब
कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई द्वारा छात्रों के साथ कथित दुर्व्यवहार का मुद्दा उठाए जाने पर भी जितेंद्र सिंह ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेताओं को इतिहास भी याद रखना चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 1969 से 1984 के बीच असम में छात्र आंदोलनों के दौरान बड़ी संख्या में छात्रों की मौत हुई थी और उस समय राज्य तथा केंद्र में कांग्रेस की सरकारें थीं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस आज छात्रों के हितों की बात कर रही है, लेकिन इतिहास इसके विपरीत तस्वीर पेश करता है।
प्रियंका गांधी के आंकड़ों पर उठाए सवाल
प्रियंका गांधी वाड्रा द्वारा पेपर लीक मामलों को लेकर दिए गए आंकड़ों पर भी केंद्रीय मंत्री ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि प्रियंका गांधी ने दावा किया कि 152 पेपर लीक हुए और इससे 750 करोड़ बच्चे प्रभावित हुए।
जितेंद्र सिंह ने इस आंकड़े पर तंज कसते हुए कहा कि दुनिया की कुल आबादी ही लगभग 8 अरब के आसपास है, ऐसे में 750 करोड़ बच्चों के प्रभावित होने का दावा कैसे संभव है। उन्होंने कहा कि या तो यह आंकड़ा पूरी तरह गलत है, या फिर बिना तथ्य जांचे बयान दिया गया है।
उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष ने यह आरोप लगाया कि वर्ष 2024 के बाद सरकार ने कोई कार्रवाई नहीं की, जबकि वास्तविकता यह है कि 52 एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं और कई मामलों में जांच तेज गति से चल रही है।
शिक्षा क्षेत्र में सरकार की उपलब्धियां गिनाईं
लोकसभा में विपक्ष ने सरकार पर स्कूलों और शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करने का आरोप लगाया था। इसका जवाब देते हुए जितेंद्र सिंह ने कहा कि मोदी सरकार ने उच्च शिक्षा के क्षेत्र में अभूतपूर्व विस्तार किया है।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2014 के बाद देश में विश्वविद्यालयों की संख्या 762 से बढ़कर 1093 हो गई है। वहीं उच्च शिक्षा संस्थानों की संख्या 51,534 से बढ़कर 64,896 तक पहुंच गई है।
उन्होंने कहा कि सरकार ने आदिवासी छात्रों के लिए एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों का विस्तार किया है और नई शिक्षा नीति (NEP) लागू कर शिक्षा प्रणाली को अधिक लचीला और रोजगारोन्मुख बनाया है।
नई शिक्षा नीति का किया बचाव
जितेंद्र सिंह ने कहा कि पहले छात्रों के पास विषय बदलने या अपनी पढ़ाई का रास्ता बदलने की सुविधा सीमित थी। यदि कोई छात्र मेडिकल की पढ़ाई शुरू करता था लेकिन आगे उसे वह क्षेत्र उपयुक्त नहीं लगता था, तो उसके पास अन्य विकल्प कम होते थे।
उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति में मल्टीपल एंट्री और एग्जिट सिस्टम लागू किया गया है। इसके तहत छात्र अपनी पढ़ाई बीच में रोककर बाद में दोबारा शुरू कर सकते हैं या किसी अन्य क्षेत्र में आगे बढ़ सकते हैं। इससे विद्यार्थियों को अधिक लचीलापन और बेहतर करियर विकल्प मिलेंगे।
मेडिकल शिक्षा में बढ़ोतरी का दावा
केंद्रीय मंत्री ने मेडिकल शिक्षा के क्षेत्र में भी सरकार की उपलब्धियां गिनाईं। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार के कार्यकाल में देशभर में एम्स की संख्या 7 से बढ़ाकर 22 कर दी गई है।
इसके अलावा सरकारी मेडिकल कॉलेजों की संख्या 387 से बढ़कर 844 हो गई है। उन्होंने बताया कि एमबीबीएस सीटें 51,300 से बढ़कर लगभग 1.39 लाख तक पहुंच गई हैं, जबकि पोस्ट ग्रेजुएट (PG) सीटों की संख्या 31,100 से बढ़कर 86,300 हो चुकी है।
उन्होंने कहा कि इन कदमों का उद्देश्य देश में डॉक्टरों की संख्या बढ़ाना और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करना है।
एंटी-पेपर लीक बिल को बताया ऐतिहासिक कदम
अपने संबोधन के अंत में जितेंद्र सिंह ने एंटी-पेपर लीक बिल को युवाओं के भविष्य की सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि सरकार चाहती थी कि इस विधेयक पर गंभीर और रचनात्मक चर्चा हो, क्योंकि यह करोड़ों छात्रों के भविष्य से जुड़ा विषय है।
उन्होंने जानकारी दी कि पेपर लीक मामले की सूचना मिलते ही सरकार ने त्वरित कार्रवाई की। मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई, 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया और 92 स्थानों पर छापेमारी की गई। इसके बाद जांच एजेंसी ने समयबद्ध तरीके से चार्जशीट दाखिल की और न्यायिक प्रक्रिया भी शुरू हो गई।
उन्होंने कहा कि नए कानून के लागू होने के बाद ऐसे मामलों की जांच और सुनवाई को तेज गति से पूरा किया जाएगा, ताकि करीब पांच महीने के भीतर अंतिम फैसला हो सके। इससे पेपर लीक जैसे संगठित अपराधों पर प्रभावी रोक लगाने में मदद मिलेगी और प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता एवं विश्वसनीयता मजबूत होगी।
लोकसभा में एंटी-पेपर लीक बिल पर हुई बहस केवल शिक्षा व्यवस्था तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह सत्ता और विपक्ष के बीच तीखे राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का मंच भी बन गई। एक ओर केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने शेरो-शायरी और आंकड़ों के सहारे विपक्ष पर हमला बोला, तो दूसरी ओर कांग्रेस ने सरकार की नीतियों और परीक्षाओं की पारदर्शिता पर सवाल उठाए। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि राज्यसभा में इस विधेयक पर कैसी चर्चा होती है और नया कानून लागू होने के बाद परीक्षा प्रणाली में कितना बदलाव देखने को मिलता है।
