• एनसीडीसी की पर्वतीय राज्यों को दी गई 68% वित्तीय सहायता अकेले उत्तराखंड को मिली
• BBSSL, NCEL और NCOL की सदस्यता में भी उत्तराखंड पहले स्थान पर
• उत्तराखंड के जैविक उत्पाद अब राष्ट्रीय ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुँच रहे हैं
देहरादून/नई दिल्ली, 28 जुलाई। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं हरिद्वार सांसद श्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत द्वारा संसद में पर्वतीय क्षेत्रों में कृषि सहकारी समितियों, बागवानी तथा संबद्ध उत्पादों के उत्पादन और विपणन को लेकर पूछे गए प्रश्न के लिखित उत्तर में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने उत्तराखंड सहित पर्वतीय राज्यों में सहकारिता क्षेत्र की उपलब्धियों और केंद्र सरकार की विभिन्न पहलों की विस्तृत जानकारी दी।
केंद्रीय मंत्री श्री अमित शाह ने बताया कि राष्ट्रीय सहकारिता विकास निगम (NCDC) के माध्यम से पर्वतीय राज्यों में कृषि, बागवानी एवं संबद्ध क्षेत्रों के उत्पादन, प्रसंस्करण तथा विपणन को लगातार प्रोत्साहित किया जा रहा है। पिछले पाँच वर्षों में इन राज्यों को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई गई है तथा तकनीकी सहयोग और विपणन व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए विभिन्न पर्वतीय राज्यों में एनसीडीसी के नए कार्यालय स्थापित किए गए हैं।
उन्होंने बताया कि किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध कराने के लिए भारतीय बीज सहकारी समिति लिमिटेड (BBSSL), कृषि उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने हेतु राष्ट्रीय सहकारी निर्यात लिमिटेड (NCEL) तथा जैविक उत्पादों की ब्रांडिंग और विपणन के लिए राष्ट्रीय सहकारी ऑर्गेनिक्स लिमिटेड (NCOL) का गठन किया गया है। इन संस्थाओं के माध्यम से पर्वतीय राज्यों के कृषि एवं जैविक उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुँचाने का कार्य तेज़ी से आगे बढ़ रहा है।
श्री शाह ने अपने उत्तर में बताया कि उत्तराखंड के किसानों को अब तक 2,488 क्विंटल प्रमाणित बीज उपलब्ध कराए जा चुके हैं। वहीं NCOL द्वारा राज्य के किसानों से 417 मीट्रिक टन जैविक गेहूँ, 40 मीट्रिक टन जैविक बासमती तथा 30 मीट्रिक टन जैविक स्वीटनर्स की खरीद की गई है, जिससे किसानों को बेहतर बाज़ार और उचित मूल्य उपलब्ध हो रहा है।
इस अवसर पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए सांसद त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में सहकारिता आज किसानों की आय बढ़ाने, स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने का प्रभावी माध्यम बन चुकी है।
उन्होंने कहा कि संसद में प्रस्तुत आँकड़े इस बात के प्रमाण हैं कि उत्तराखंड आज सहकारिता के क्षेत्र में देश के सभी पर्वतीय राज्यों का अग्रणी राज्य बनकर उभरा है। वर्ष 2021-22 से 2025-26 के दौरान पर्वतीय राज्यों को एनसीडीसी द्वारा उपलब्ध कराई गई ₹422.95 करोड़ की कुल वित्तीय सहायता में से ₹287.95 करोड़ (लगभग 68 प्रतिशत) अकेले उत्तराखंड को प्राप्त हुए, जो सभी पर्वतीय राज्यों में सर्वाधिक है।
श्री रावत ने बताया कि उत्तराखंड BBSSL, NCEL और NCOL तीनों राष्ट्रीय सहकारी संस्थाओं में सदस्यता के मामले में भी शीर्ष स्थान पर है। राज्य की 551 सहकारी समितियाँ BBSSL, 487 समितियाँ NCEL तथा 387 समितियाँ NCOL की सदस्य हैं, जो सभी पर्वतीय राज्यों में सबसे अधिक हैं। उल्लेखनीय है कि NCEL की कुल सदस्य समितियों में लगभग 56 प्रतिशत तथा NCOL की कुल सदस्य समितियों में लगभग 54 प्रतिशत हिस्सेदारी अकेले उत्तराखंड की है।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के कृषि, बागवानी एवं जैविक उत्पाद अब राष्ट्रीय सीमाओं से आगे बढ़कर अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी पहचान बना रहे हैं। इससे किसानों को बेहतर मूल्य प्राप्त होगा, स्थानीय उत्पादों को वैश्विक मंच मिलेगा तथा राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति और मजबूती मिलेगी।
त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि “सहकारिता से समृद्धि” का राष्ट्रीय संकल्प उत्तराखंड में तेज़ी से साकार हो रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले समय में उत्तराखंड सहकारिता के क्षेत्र में देश के लिए एक आदर्श मॉडल के रूप में स्थापित होगा और इसकी सफलता अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणास्रोत बनेगी।
