देशभर में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक और भर्ती घोटालों को लेकर युवाओं का गुस्सा अब सड़कों पर दिखाई देने लगा है। उत्तराखंड में भी इस मुद्दे ने जोर पकड़ लिया है। गैरसैंण और हल्द्वानी सहित कई स्थानों पर युवा कांग्रेस और एनएसयूआई (NSUI) से जुड़े छात्रों एवं कार्यकर्ताओं ने जोरदार प्रदर्शन करते हुए केंद्र सरकार, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) और परीक्षा प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। प्रदर्शनकारियों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए तत्काल इस्तीफे की मांग की है।
गैरसैंण में युवा कांग्रेस और एनएसयूआई के कार्यकर्ताओं ने मुख्य चौराहे पर प्रदर्शन करते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री का पुतला फूंका और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शन में शामिल छात्रों का कहना था कि लगातार हो रहे पेपर लीक और भर्ती घोटालों ने देश के करोड़ों युवाओं का विश्वास तोड़ दिया है। उनका आरोप है कि राष्ट्रीय और राज्य स्तर की परीक्षाओं में पारदर्शिता और गोपनीयता बनाए रखने में संबंधित एजेंसियां विफल साबित हुई हैं, जिसका सीधा असर युवाओं के भविष्य पर पड़ रहा है।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि NEET, JEE, UGC-NET जैसी महत्वपूर्ण परीक्षाओं में अनियमितताओं की खबरों ने छात्रों के मन में असुरक्षा की भावना पैदा कर दी है। छात्र पूरे साल कठिन मेहनत करके प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं, लेकिन परीक्षा प्रक्रिया में गड़बड़ियों और पेपर लीक की घटनाओं से उनका परिश्रम और भविष्य दोनों प्रभावित हो रहे हैं। उनका कहना था कि शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता तभी कायम रह सकती है, जब परीक्षा प्रणाली पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी हो।
उत्तराखंड में पहले भी कई भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक के मामले सामने आ चुके हैं। विशेष रूप से उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) से जुड़े भर्ती घोटालों ने प्रदेश में युवाओं के बीच बड़ा असंतोष पैदा किया था। राज्य सरकार द्वारा सख्त नकल विरोधी कानून लागू किए जाने के बाद भी यदि पेपर लीक जैसी घटनाएं सामने आती हैं, तो यह व्यवस्था की गंभीर विफलता को दर्शाता है। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि ऐसे मामलों में शामिल दोषियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए और निष्पक्ष जांच कराई जाए।
छात्र संगठनों ने यह भी मांग उठाई कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली की न्यायिक समीक्षा कराई जाए और यदि किसी स्तर पर लापरवाही या भ्रष्टाचार पाया जाता है, तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो। उनका कहना था कि केवल परीक्षाएं रद्द कर देना या जांच बैठा देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए मजबूत और पारदर्शी व्यवस्था विकसित करना आवश्यक है।
नगर पंचायत अध्यक्ष गैरसैंण मोहन भंडारी ने प्रदर्शन के दौरान कहा कि यह आंदोलन केवल एक परीक्षा या एक भर्ती से जुड़ा मुद्दा नहीं है, बल्कि देश के करोड़ों युवाओं के भविष्य और शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता का सवाल है। उन्होंने युवाओं से एकजुट होकर भ्रष्टाचार और पेपर लीक के खिलाफ आवाज उठाने का आह्वान किया। उनका कहना था कि यदि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता नहीं होगी, तो प्रतिभाशाली युवाओं का विश्वास व्यवस्था से उठ जाएगा।
जिला कांग्रेस महासचिव प्रदीप कुंवर ने कहा कि पिछले कई वर्षों में भर्ती परीक्षाओं और पेपर लीक के अनेक मामले सामने आए हैं, जिससे छात्रों का भविष्य प्रभावित हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि युवाओं के साथ अन्याय हो रहा है और इस स्थिति के लिए जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री को नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए। साथ ही चेतावनी दी कि यदि इस मांग पर ध्यान नहीं दिया गया, तो युवा कांग्रेस भविष्य में बड़ा जन आंदोलन शुरू करेगी।
कांग्रेस नगर अध्यक्ष कुंवर रावत ने भी परीक्षा प्रणाली की खामियों पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि छात्र दिन-रात मेहनत करके प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं, लेकिन पेपर लीक की घटनाएं उनके सपनों को तोड़ देती हैं। उनका कहना था कि सरकार को युवाओं की चिंताओं को गंभीरता से लेना चाहिए और ऐसी व्यवस्था बनानी चाहिए, जिससे परीक्षाओं की निष्पक्षता पर कोई सवाल न उठे।
इधर, दिल्ली में छात्रों पर हुए कथित लाठीचार्ज के विरोध में हल्द्वानी के बुद्ध पार्क में भी कांग्रेस कार्यकर्ताओं और छात्रों ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के खिलाफ नारेबाजी की तथा शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि छात्रों की आवाज को दबाने के बजाय उनकी समस्याओं का समाधान किया जाना चाहिए।
पेपर लीक और भर्ती घोटालों का मुद्दा केवल उत्तराखंड या किसी एक राज्य तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राष्ट्रीय स्तर पर युवाओं की चिंता का विषय बन चुका है। प्रतियोगी परीक्षाओं की निष्पक्षता पर सवाल उठने से लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित होता है। ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि परीक्षा प्रणाली को तकनीकी रूप से और अधिक सुरक्षित बनाने, निगरानी तंत्र को मजबूत करने और दोषियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई की आवश्यकता है।
फिलहाल उत्तराखंड में उठी यह आवाज केवल राजनीतिक विरोध तक सीमित नहीं दिखाई दे रही, बल्कि यह युवाओं की उस चिंता को सामने ला रही है, जो अपने भविष्य को लेकर आशंकित हैं। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार और संबंधित एजेंसियां इन मांगों पर क्या कदम उठाती हैं और परीक्षा प्रणाली में विश्वास बहाल करने के लिए कौन से ठोस सुधार किए जाते हैं।
