नई दिल्ली। राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए जांच प्रक्रिया को और अधिक निष्पक्ष एवं प्रभावी बनाने के लिए नई विशेष जांच टीम (SIT) गठित करने के निर्देश दिए हैं। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच का नेतृत्व किसी अनुभवी और वरिष्ठ भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारी को सौंपा जाना चाहिए, ताकि जांच तार्किक और निर्णायक निष्कर्ष तक पहुंच सके। अदालत ने यह भी कहा कि इस पूरे मामले को राजनीतिक रंग देने से बचना चाहिए और इसे केवल एक आपराधिक जांच के रूप में देखा जाना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि राज्य सरकार ने मामले में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल कर दी है तथा जांच लगातार जारी है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि अब तक इस प्रकरण में आठ लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि जांच अभी प्रारंभिक एवं संवेदनशील चरण में है, इसलिए इस समय अधिक जानकारी सार्वजनिक करना उचित नहीं होगा।
मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की तीन सदस्यीय पीठ ने की। सुनवाई के दौरान अदालत ने जांच की प्रगति पर संतोष जताने के बजाय यह सुनिश्चित करने पर जोर दिया कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष, पारदर्शी और किसी भी प्रकार के दबाव से मुक्त हो। चीफ जस्टिस ने कहा कि यदि आवश्यकता हो तो नई SIT का गठन किया जाए और उसमें ऐसे अधिकारियों को शामिल किया जाए जिनका अनुभव गंभीर आपराधिक मामलों की जांच में रहा हो।
अदालत ने सॉलिसिटर जनरल से उत्तर प्रदेश सरकार से निर्देश लेकर अगली सुनवाई में वरिष्ठ IPS अधिकारी का नाम प्रस्तुत करने को कहा। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि जांच टीम का नेतृत्व सक्षम अधिकारी के हाथों में होना चाहिए ताकि सभी तथ्यों की गहराई से जांच हो सके और दोषियों तक कानून पहुंच सके। अदालत ने यह भी दोहराया कि जांच को केवल औपचारिक प्रक्रिया तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए, बल्कि उसे तार्किक और अंतिम निष्कर्ष तक पहुंचाया जाना चाहिए।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को राजनीतिक बहस का विषय बनाने पर भी चिंता व्यक्त की। अदालत ने कहा कि न्यायालय राजनीति करने का मंच नहीं है और न ही किसी पक्ष को राजनीतिक लाभ या हानि पहुंचाने के लिए न्यायिक प्रक्रिया का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। अदालत का कहना था कि यह मूल रूप से एक आपराधिक मामला है, इसलिए इसकी जांच कानून के दायरे में रहकर निष्पक्ष ढंग से होनी चाहिए।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को यह भी बताया कि जांच एजेंसियां लगातार साक्ष्य एकत्र कर रही हैं और गिरफ्तार किए गए आरोपियों से पूछताछ जारी है। इसी दौरान चीफ जस्टिस ने यह भी पूछा कि क्या वर्तमान में चढ़ावा चोरी की जांच वही SIT कर रही है, जिसने प्रारंभिक जांच शुरू की थी। इस पर सरकार की ओर से बताया गया कि जांच जारी है और विस्तृत जानकारी अगली सुनवाई में उपलब्ध कराई जाएगी।
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई अगले सोमवार यानी 27 जुलाई को निर्धारित की है। अदालत ने निर्देश दिया कि तब तक उत्तर प्रदेश सरकार नई SIT के गठन और उसके नेतृत्व के लिए प्रस्तावित वरिष्ठ IPS अधिकारी का नाम प्रस्तुत करे। इसके बाद अदालत आगे की कार्यवाही और जांच की दिशा पर विचार करेगी।
राम मंदिर से जुड़े इस संवेदनशील मामले पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी को जांच प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अब सभी की नजरें अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां नई SIT के गठन और जांच की आगे की रणनीति पर महत्वपूर्ण निर्णय सामने आ सकते हैं।
