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ऋषिकेश–डोईवाला हाईवे पर 3000 से अधिक पेड़ों के प्रस्तावित कटान का विरोध तेज, कांग्रेस और सामाजिक संगठनों ने सात मोड़ पर किया प्रदर्शन

The Hill India News
Last updated: July 12, 2026 10:11 am
The Hill India News
Published: July 12, 2026
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परवादून/ऋषिकेश। ऋषिकेश–डोईवाला राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना के तहत 3000 से अधिक हरे-भरे पेड़ों के प्रस्तावित कटान को लेकर विरोध के स्वर लगातार तेज होते जा रहे हैं। इसी क्रम में परवादून जिला कांग्रेस कमेटी ने विभिन्न सामाजिक एवं पर्यावरण संरक्षण संगठनों के साथ मिलकर शनिवार को सात मोड़ क्षेत्र में शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में शामिल लोगों ने सरकार से विकास परियोजनाओं के साथ पर्यावरण संरक्षण को समान महत्व देने की अपील करते हुए पेड़ों के अंधाधुंध कटान पर तत्काल रोक लगाने की मांग की।

प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं, पर्यावरण प्रेमियों और स्थानीय नागरिकों ने हाथों में तख्तियां लेकर वृक्षों को बचाने की मांग उठाई। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि उत्तराखंड जैसे संवेदनशील हिमालयी राज्य में हजारों पेड़ों की कटाई केवल पर्यावरण ही नहीं बल्कि जल स्रोतों, जैव विविधता और भविष्य की पीढ़ियों के लिए भी गंभीर चुनौती बन सकती है। उनका कहना था कि विकास आवश्यक है, लेकिन ऐसा विकास जो प्रकृति की कीमत पर हो, वह दीर्घकालिक रूप से समाज के हित में नहीं माना जा सकता।

परवादून जिला कांग्रेस अध्यक्ष मोहित उनियाल ने प्रदर्शन को संबोधित करते हुए कहा कि उत्तराखंड की पहचान उसकी हरियाली, पर्वतीय पारिस्थितिकी और प्राकृतिक संपदा से है। यदि विकास के नाम पर हजारों हरे-भरे वृक्षों की बलि दी जाती है तो यह केवल पर्यावरण का नुकसान नहीं होगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के साथ भी अन्याय होगा।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस पर्यावरण संरक्षण के इस जनहित के मुद्दे पर पूरी मजबूती के साथ जनता के साथ खड़ी है और वृक्षों को बचाने के लिए लोकतांत्रिक तरीके से अपना संघर्ष जारी रखेगी। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि परियोजना के डिजाइन और क्रियान्वयन पर पुनर्विचार करते हुए ऐसे विकल्प तलाशे जाएं, जिनसे विकास कार्य भी प्रभावित न हों और अधिक से अधिक पेड़ों को सुरक्षित रखा जा सके।
जिला महासचिव राहुल सैनी ने कहा कि उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था, पर्यटन और प्राकृतिक संतुलन का आधार यहां के जंगल हैं। यदि विकास योजनाओं में पर्यावरणीय पहलुओं की अनदेखी की गई तो इसका दुष्प्रभाव केवल वर्तमान पीढ़ी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आने वाले वर्षों में जल संकट, भूस्खलन, तापमान वृद्धि और जैव विविधता के नुकसान जैसी गंभीर समस्याएं सामने आ सकती हैं।

उन्होंने कहा कि सरकार को परियोजनाओं के लिए आधुनिक और पर्यावरण अनुकूल तकनीकों का उपयोग करना चाहिए, जिससे सड़क निर्माण और विकास कार्यों के साथ-साथ प्रकृति का संरक्षण भी सुनिश्चित किया जा सके। उनका कहना था कि पर्यावरण और विकास एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि संतुलित योजना के माध्यम से दोनों को साथ लेकर आगे बढ़ा जा सकता है।

डोईवाला कांग्रेस नगर अध्यक्ष करतार नेगी ने कहा कि स्थानीय जनता की भावनाओं को नजरअंदाज कर पेड़ों का बड़े पैमाने पर कटान किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के लोग वर्षों से इन पेड़ों को अपनी प्राकृतिक धरोहर मानते हैं और यदि सरकार ने इस निर्णय पर पुनर्विचार नहीं किया तो जनसहभागिता के साथ आंदोलन को और व्यापक स्वरूप दिया जाएगा।

प्रदर्शन के दौरान मौजूद सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी पर्यावरण संरक्षण को लेकर अपनी चिंता व्यक्त की। उनका कहना था कि उत्तराखंड पहले से ही जलवायु परिवर्तन, अतिवृष्टि, भूस्खलन और प्राकृतिक आपदाओं जैसी चुनौतियों का सामना कर रहा है। ऐसे समय में बड़े पैमाने पर वृक्षों की कटाई प्राकृतिक संतुलन को और अधिक प्रभावित कर सकती है।

प्रदर्शनकारियों ने सरकार से मांग की कि यदि किसी परियोजना के लिए पेड़ों का कटान अपरिहार्य हो तो पहले विशेषज्ञों की राय, विस्तृत पर्यावरणीय अध्ययन और स्थानीय लोगों से व्यापक संवाद सुनिश्चित किया जाए। साथ ही, वैकल्पिक मार्गों और तकनीकों पर भी गंभीरता से विचार किया जाए ताकि पेड़ों की संख्या को न्यूनतम स्तर तक सीमित रखा जा सके।

कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित लोगों ने पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लेते हुए अधिक से अधिक वृक्षों को बचाने और हरित उत्तराखंड के निर्माण के लिए जनजागरूकता अभियान चलाने का निर्णय लिया। वक्ताओं ने कहा कि प्रकृति केवल वर्तमान पीढ़ी की नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों की भी साझा विरासत है। इसलिए विकास की हर योजना में पर्यावरणीय संतुलन को सर्वोच्च प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
प्रदर्शन में परवादून कांग्रेस जिलाध्यक्ष मोहित उनियाल, जिला महासचिव राहुल सैनी, डोईवाला कांग्रेस नगर अध्यक्ष करतार नेगी, जिला महासचिव शार्दूल नेगी, स्वतंत्र बिष्ट, मनीष यादव, आशिक अली, रोहित नेगी, राजन थापा, सोहेब अली, हर्षित उनियाल, साहिल अली, विवेक सैनी, अमन बहुगुणा, राहुल बहुगुणा, सूरज भट्ट, शुभम काम्बोज, अनुज कन्नौजिया, अर्चित सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता एवं विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।

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