देहरादून, 2 जुलाई: उत्तराखंड को देश के अग्रणी खेल राज्यों की श्रेणी में स्थापित करने के संकल्प के साथ मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सूबे के खेल परिदृश्य को बदलने के लिए बड़े नीतिगत फैसलों की घोषणा की है। गुरुवार को सचिवालय में खेल एवं युवा कल्याण विभाग की उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री ने दो टूक शब्दों में निर्देश दिए कि विभिन्न राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में राज्य का गौरव बढ़ाने वाले पदक विजेता खिलाड़ियों को आउट ऑफ टर्न सरकारी सेवा में समायोजित करने की प्रक्रिया को पूरी पारदर्शिता के साथ एक निर्धारित समय-सीमा के भीतर संपन्न किया जाए। मुख्यमंत्री ने इस बात पर विशेष बल दिया कि राज्य के प्रतिभावान खिलाड़ियों को रोजगार के लिए भटकना न पड़े, इसके लिए एक ऐसी ठोस कार्ययोजना तैयार की जाए जिससे आउट ऑफ टर्न नौकरी पाने वाले अधिकांश खिलाड़ियों को खेल विभाग में ही सीधे नियुक्तियां मिल सकें।
राष्ट्रीय खेल नीति 2025 की तर्ज पर तैयार होगी राज्य की नई खेल नीति
मुख्यमंत्री धामी ने बैठक के दौरान अधिकारियों को स्पष्ट रूप से निर्देशित किया कि केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में घोषित की गई महत्वाकांक्षी राष्ट्रीय खेल नीति 2025 के सभी आधुनिक मानकों और रणनीतियों का गहराई से अध्ययन किया जाए। इसी राष्ट्रीय खेल नीति 2025 के अनुरूप ही उत्तराखंड राज्य की नई खेल नीति का खाका तैयार किया जाए, ताकि हमारे खिलाड़ियों को वैश्विक स्तर की आधुनिक सुविधाएं और ट्रेनिंग मिल सके। उन्होंने कहा कि युवाओं के सपनों को साकार करना और राज्य के प्रत्येक खिलाड़ी तक गुणवत्तापूर्ण खेल सुविधाएं पहुंचाना उनकी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने कहा कि विभागीय अधिकारी वातानुकूलित कमरों से बाहर निकलकर जमीनी स्तर पर खिलाड़ियों की वास्तविक आवश्यकता के अनुसार राज्य में खेल योजनाओं को आगे बढ़ाएं।
हल्द्वानी खेल विश्वविद्यालय में अगले महीने से गूंजेगी शैक्षणिक किलकारी
राज्य के युवाओं के लिए एक और बड़ी सौगात की घोषणा करते हुए मुख्यमंत्री ने गोलापार, हल्द्वानी में निर्माणाधीन उत्तराखंड राज्य क्रीड़ा विश्वविद्यालय में आगामी माह से ही नियमित शैक्षणिक सत्र को प्रारंभ करने के कड़े निर्देश दिए हैं। यह विश्वविद्यालय न केवल उत्तराखंड का प्रथम, बल्कि समूचे भारत का 10वां प्रतिष्ठित राज्य खेल विश्वविद्यालय होगा। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को ताकीद की कि गोलापार स्टेडियम में छात्रों की प्रवेश प्रक्रिया के साथ-साथ उच्च स्तर के कोच, प्रशासनिक अधिकारियों और सहायक कर्मचारियों की नियुक्ति प्रक्रिया को युद्धस्तर पर चलाकर तेजी से आगे बढ़ाया जाए। इस विश्वविद्यालय में अंतरराष्ट्रीय स्तर के सभागार, केंद्रीय पुस्तकालय, अनुसंधान केंद्र, शूटिंग रेंज, 8 लेन एथलीट ट्रैक सहित कुल 39 आधुनिक अवसंरचना घटकों का विकास किया जा रहा है, जो इसे देश का एक अनूठा स्पोर्ट्स हब बनाएंगे।
38वें राष्ट्रीय खेल का लेगेसी प्लान: बुनियादी ढांचे के रख-रखाव पर विशेष फोकस
हाल ही में संपन्न हुए 38वें राष्ट्रीय खेल प्रतियोगिता के दौरान राज्य में बड़े पैमाने पर अत्याधुनिक खेल बुनियादी ढांचे का विकास किया गया था। मुख्यमंत्री ने इन विश्वस्तरीय संपत्तियों के दीर्घकालिक उपयोग को सुनिश्चित करने के लिए अधिकारियों को एक व्यापक ‘लेगेसी प्लान’ पर तेज गति से कार्य करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि 38वें राष्ट्रीय खेल प्रतियोगिता के दौरान विकसित किए गए बुनियादी ढांचे के रख-रखाव पर विशेष ध्यान दिया जाए एवं इसके लिए एक पुख्ता कार्य योजना तैयार हो। महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कॉलेज देहरादून, हल्द्वानी गोलापार स्टेडियम, रुद्रपुर वेलोड्रोम, टिहरी झील, हरिद्वार एवं सीमांत जनपद पिथौरागढ़ स्थित स्टेडियमों में जो भी विश्वस्तरीय सुविधाएं विकसित की गई हैं, उन्हें स्थानीय खिलाड़ियों के नियमित अभ्यास के लिए और अधिक उपयोगी एवं सुलभ बनाया जाए।
39वें राष्ट्रीय खेल 2027 और ‘एक जिला एक स्पोर्ट्स’ (ODOS) का रोडमैप
भविष्य की चुनौतियों और संभावनाओं को देखते हुए मुख्यमंत्री ने आगामी 39वें राष्ट्रीय खेल 2027 के लिए अभी से कमर कसने को कहा है। उन्होंने निर्देश दिए कि आगामी राष्ट्रीय खेलों में देवभूमि के उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए विभिन्न खेल विधाओं में अभी से विशेष प्रशिक्षण शिविरों (Special Training Camps) का संचालन शुरू कर दिया जाए। इसके लिए विभिन्न खेल संघों (Sports Associations) के साथ मिलकर पारदर्शी तरीके से प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की चयन और चिन्हीकरण प्रक्रिया को गति दी जाए। राज्य सरकार का संकल्प आगामी राष्ट्रीय खेलों में और बेहतर प्रदर्शन कर देवभूमि को वैश्विक पटल पर ‘खेलभूमि’ के रूप में स्थापित करना है।
इसके अतिरिक्त, राज्य में खेल संस्कृति को जमीनी स्तर पर मजबूत करने के लिए ‘एक जिला एक स्पोर्ट्स’ (ODOS) नीति की समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी जनपदों में उनके लिए निर्धारित विशिष्ट खेलों के अनुसार कोचिंग, जमीनी स्तर पर प्रतिभा की पहचान (Talent Scouting) और स्वस्थ प्रतिस्पर्धात्मक माहौल को विकसित किया जाए। इसके तहत प्रत्येक जिला खेल छात्रावास को उस जनपद के निर्धारित खेल के लिए अनिवार्य रूप से ‘ODOS खेल नर्सरी’ के रूप में अपग्रेड और विकसित किया जाएगा। ग्रामीण क्षेत्रों की खेल प्रतिभाओं को निखारने के लिए मुख्यमंत्री ने ‘एक ब्लॉक एक मिनी स्टेडियम’ योजना की गति को और तेज करने का निर्देश दिया।
प्रगति रिपोर्ट: अब तक की उपलब्धियां
उच्च स्तरीय बैठक में अधिकारियों द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट के अनुसार, राज्य सरकार के प्रयासों के सकारात्मक परिणाम धरातल पर दिखने लगे हैं:
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खिलाड़ियों का समायोजन: राज्य सरकार द्वारा अब तक कुल 29 मेडल धारक उत्कृष्ट खिलाड़ियों को विभिन्न सरकारी सेवाओं में सफलतापूर्वक समायोजित कर उनका भविष्य सुरक्षित किया जा चुका है।
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मिनी स्टेडियमों का संजाल: ग्रामीण खेल प्रतिभाओं को मंच देने के लिए ‘एक ब्लॉक एक मिनी स्टेडियम’ योजना के तहत अब तक कुल 48 मिनी स्टेडियमों का निर्माण पूरा हो चुका है, जबकि 10 अन्य मिनी स्टेडियमों का कार्य तीव्र गति से चल रहा है। शेष ब्लॉकों में भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया अंतिम चरण में है।
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महिला सशक्तिकरण: चंपावत के लोहाघाट में भारत के प्रथम ‘महिला आवासीय स्पोर्ट्स कॉलेज’ का निर्माण कार्य अंतिम चरणों में है। इस कॉलेज के सुचारू संचालन के लिए 16 पद सृजित किए जा चुके हैं और वर्तमान में प्रवेश प्रक्रिया गतिमान है।
बैठक में रही शीर्ष अधिकारियों की मौजूदगी
इस महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक में उत्तराखंड की खेल एवं युवा कल्याण मंत्री रेखा आर्या ने राज्य में चल रही खेल परियोजनाओं की प्रगति की जानकारी दी। बैठक में प्रमुख सचिव आ.के. सुधांशु, सचिव शैलेश बगौली, खेल विभाग के विशेष प्रमुख सचिव अमित सिन्हा, खेल निदेशक दीप्ति सिंह, संयुक्त निदेशक शक्ति सिंह, उप निदेशक नीरज गुप्ता तथा सहायक निदेशक राजेश ममंगाई सहित खेल एवं युवा कल्याण विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी और रणनीतिकार उपस्थित रहे।
