रांची: झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों के लिए मतदान के साथ राजनीतिक सरगर्मियां चरम पर पहुंच गई हैं। चुनावी गणित ऐसा है कि दोनों प्रमुख गठबंधनों—सत्तारूढ़ INDIA गठबंधन और विपक्षी NDA—की निगाहें सिर्फ अपने उम्मीदवारों की जीत पर नहीं, बल्कि संभावित क्रॉस वोटिंग को रोकने पर भी टिकी हैं। राज्यसभा की दो सीटों के लिए तीन उम्मीदवार मैदान में होने के कारण मुकाबला दिलचस्प और रोमांचक हो गया है।
इस चुनाव में झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने बैद्यनाथ राम को उम्मीदवार बनाया है, जबकि कांग्रेस ने प्रणव झा को मैदान में उतारा है। दूसरी ओर, NDA ने निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी को समर्थन दिया है। विधानसभा में संख्या बल के आधार पर JMM उम्मीदवार की जीत लगभग तय मानी जा रही है, लेकिन दूसरी सीट पर मुकाबला बेहद कांटे का बन गया है।
क्यों खास है यह चुनाव?
राज्यसभा की दो सीटों के लिए मतदान हो रहा है, लेकिन उम्मीदवार तीन हैं। ऐसे में एक सीट पर जहां स्थिति स्पष्ट दिख रही है, वहीं दूसरी सीट पर जीत-हार का फैसला विधायकों की निष्ठा और मतदान के दौरान उनके रुख पर निर्भर करता दिखाई दे रहा है। यही वजह है कि दोनों गठबंधन अपने-अपने विधायकों को एकजुट रखने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि किसी भी पक्ष में क्रॉस वोटिंग होती है तो चुनाव परिणाम पूरी तरह बदल सकते हैं। इसी आशंका ने दोनों खेमों की चिंता बढ़ा दी है।
विधायकों को एकजुट रखने की कवायद
राज्यसभा चुनाव से पहले राजनीतिक दलों ने अपने विधायकों को एकजुट रखने के लिए विशेष रणनीति अपनाई। भाजपा नीत NDA ने अपने विधायकों को रांची के एक होटल में ठहराया, ताकि किसी भी तरह की राजनीतिक उठापटक या संपर्क अभियान का असर उन पर न पड़े।
बुधवार को NDA के विधायक एक साथ बस में सवार होकर विधानसभा पहुंचे और मतदान में हिस्सा लिया। दूसरी ओर, सत्तारूढ़ INDIA गठबंधन भी लगातार बैठकों के जरिए अपने विधायकों के साथ संपर्क बनाए हुए है। गठबंधन के नेता विधायकों से व्यक्तिगत बातचीत कर उन्हें एकजुट रहने का संदेश दे रहे हैं।
राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी रही कि दोनों पक्षों ने अपने विधायकों पर विशेष नजर रखी हुई है ताकि किसी तरह की टूट-फूट या असंतोष सामने न आए।
मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की का बड़ा बयान
मतदान के दिन राज्य की मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने गठबंधन की एकजुटता पर भरोसा जताया। उन्होंने कहा कि झारखंड के विधायक राज्य के सम्मान और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करेंगे।
उन्होंने कहा, “हम पूरी एकजुटता के साथ विधानसभा की ओर बढ़ रहे हैं। मुझे उम्मीद है कि ऐसे समय में जब देश के कई हिस्सों में विधायकों को प्रभावित करने और राजनीतिक दलों को तोड़ने की कोशिशें होती हैं, झारखंड अपनी गरिमा और आत्मसम्मान की रक्षा करेगा।”
उनके बयान को INDIA गठबंधन की ओर से एकजुटता का संदेश माना जा रहा है।
विधानसभा परिसर में दिखा हाई वोल्टेज ड्रामा
राज्यसभा चुनाव के दौरान विधानसभा परिसर में एक और घटना ने सुर्खियां बटोरीं। मतदान के लिए पहुंचे कांग्रेस विधायक जयमंगल सिंह की एक सुरक्षा अधिकारी से तीखी बहस हो गई।
घटना का वीडियो भी सामने आया, जिसमें विधायक और सुरक्षा अधिकारी के बीच गर्मागर्म बातचीत दिखाई दे रही है। वीडियो में विधायक को यह कहते हुए सुना गया कि, “अभी अरेस्ट करवा दूंगा, पहचानता नहीं है मुझको।” हालांकि बाद में मामला शांत हो गया, लेकिन चुनावी माहौल के बीच इस घटना ने राजनीतिक हलकों में चर्चा को और बढ़ा दिया।
मतदान और मतगणना की व्यवस्था
विधानसभा परिसर में बनाए गए मतदान केंद्र पर सुबह 9 बजे मतदान शुरू हुआ। चुनाव अधिकारियों के अनुसार मतदान प्रक्रिया शाम 4 बजे तक जारी रहेगी। इसके बाद शाम 5 बजे से मतगणना शुरू होने की संभावना है।
प्रशासन ने चुनाव को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की है। विधानसभा परिसर और आसपास के क्षेत्रों में अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है।
झारखंड विधानसभा का गणित क्या कहता है?
81 सदस्यीय झारखंड विधानसभा में राज्यसभा चुनाव जीतने के लिए उम्मीदवार को कम से कम 28 प्रथम वरीयता मतों की आवश्यकता होती है।
NDA के पास कुल 24 विधायक हैं, जिनमें भाजपा के 21 विधायक शामिल हैं। इसके अलावा लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास), ऑल झारखंड स्टूडेंट्स यूनियन (आजसू) और जनता दल (यूनाइटेड) के एक-एक विधायक गठबंधन के साथ हैं। झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा का एक विधायक भी महत्वपूर्ण भूमिका में माना जा रहा है।
दूसरी तरफ INDIA गठबंधन के पास कुल 56 विधायक हैं। इनमें JMM के 34, कांग्रेस के 16, राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के 4 और CPI(ML) लिबरेशन के 2 विधायक शामिल हैं।
संख्या बल के हिसाब से INDIA गठबंधन मजबूत स्थिति में दिखाई देता है, लेकिन राज्यसभा चुनाव की प्रकृति ऐसी होती है कि व्यक्तिगत मतदान और राजनीतिक समीकरण कई बार आंकड़ों को चुनौती दे देते हैं।
बैद्यनाथ राम की जीत लगभग तय
JMM उम्मीदवार बैद्यनाथ राम के पास अपनी पार्टी के 34 विधायकों का समर्थन है, जो जीत के लिए आवश्यक संख्या से कहीं अधिक है। यही कारण है कि राजनीतिक विश्लेषक उनकी जीत को लगभग सुनिश्चित मान रहे हैं।
उनकी जीत के बाद असली मुकाबला दूसरी सीट के लिए होगा, जहां कांग्रेस के प्रणव झा और NDA समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी आमने-सामने हैं।
दूसरी सीट पर सबसे ज्यादा नजरें
राज्यसभा चुनाव की सबसे बड़ी दिलचस्पी दूसरी सीट को लेकर है। कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा को INDIA गठबंधन का समर्थन प्राप्त है, जबकि परिमल नाथवानी को NDA का समर्थन हासिल है।
यदि INDIA गठबंधन के सभी विधायक एकजुट रहते हैं तो प्रणव झा की राह आसान हो सकती है। लेकिन यदि कुछ विधायक क्रॉस वोटिंग करते हैं या मतदान के दौरान कोई अप्रत्याशित स्थिति बनती है, तो परिमल नाथवानी के लिए अवसर पैदा हो सकता है।
इसी संभावना ने चुनाव को बेहद रोचक बना दिया है। यही कारण है कि मतदान से पहले दोनों पक्षों ने अपने विधायकों को एकजुट रखने के लिए विशेष रणनीति अपनाई और लगातार बैठकें कीं।
परिणाम तय करेंगे राजनीतिक संदेश
झारखंड राज्यसभा चुनाव का परिणाम केवल दो सीटों का फैसला नहीं करेगा, बल्कि यह भी बताएगा कि विधानसभा में गठबंधनों की वास्तविक मजबूती कितनी है। यदि किसी भी पक्ष में क्रॉस वोटिंग होती है तो उसका राजनीतिक संदेश दूरगामी हो सकता है।
फिलहाल राज्य की राजनीति की निगाहें मतगणना पर टिकी हैं। शाम को आने वाले नतीजे यह स्पष्ट करेंगे कि संख्या बल की जीत हुई या फिर राजनीतिक रणनीति और क्रॉस वोटिंग ने चुनावी तस्वीर बदल दी। झारखंड की इस दिलचस्प चुनावी लड़ाई ने राज्य की राजनीति को एक बार फिर राष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में ला खड़ा किया है।
