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उत्तराखंड: किसाऊ बांध परियोजना को मिली नई रफ्तार, केंद्र की मंजूरी से उत्तराखंड को मिलेगा पानी, बिजली और विकास का बड़ा तोहफा

The Hill India News
Last updated: June 18, 2026 4:15 am
The Hill India News
Published: June 18, 2026
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देहरादून। उत्तराखंड के ऊर्जा, सिंचाई और जल प्रबंधन क्षेत्र के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है। पिछले कई वर्षों से विभिन्न कारणों से अटकी हुई किसाऊ बहुउद्देशीय बांध परियोजना को आखिरकार केंद्र सरकार की मंजूरी मिलने का रास्ता साफ हो गया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक के बाद उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान के बीच इस महत्वाकांक्षी परियोजना को लेकर सहमति बन गई है। इसके साथ ही लंबे समय से प्रतीक्षित इस परियोजना के निर्माण की उम्मीदें फिर से मजबूत हो गई हैं।

टोंस नदी पर प्रस्तावित किसाऊ बांध परियोजना को उत्तर भारत की सबसे महत्वपूर्ण जल एवं ऊर्जा परियोजनाओं में गिना जाता है। टोंस नदी यमुना की सबसे बड़ी सहायक नदी है और यह उत्तराखंड तथा हिमाचल प्रदेश की सीमा से होकर बहती है। वर्षों से इस परियोजना पर चर्चा चल रही थी, लेकिन लागत के बंटवारे, पानी के वितरण और बिजली उत्पादन में हिस्सेदारी जैसे मुद्दों पर राज्यों के बीच सहमति नहीं बन पा रही थी। अब केंद्र सरकार के हस्तक्षेप के बाद सभी पक्षों ने सहमति जताई है और परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर करने का निर्णय लिया गया है।

करीब 15 हजार करोड़ रुपये की लागत वाली यह परियोजना केवल एक बांध निर्माण योजना नहीं है, बल्कि उत्तर भारत के जल संसाधन प्रबंधन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। परियोजना के माध्यम से यमुना बेसिन में जल भंडारण क्षमता बढ़ाई जाएगी, जिससे सिंचाई, पेयजल और पर्यावरणीय जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी।

422 मेगावाट बिजली उत्पादन की क्षमता

किसाऊ बांध परियोजना का सबसे बड़ा लाभ ऊर्जा क्षेत्र में देखने को मिलेगा। परियोजना के तहत लगभग 422 मेगावाट जलविद्युत उत्पादन की क्षमता विकसित की जाएगी। इससे उत्तराखंड को अपने हिस्से की पर्याप्त बिजली प्राप्त होगी, जो राज्य की लगातार बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में सहायक साबित होगी।

उत्तराखंड एक पर्वतीय राज्य होने के कारण जलविद्युत उत्पादन की अपार संभावनाएं रखता है। हालांकि कई परियोजनाएं विभिन्न कारणों से वर्षों से लंबित हैं। ऐसे में किसाऊ परियोजना के आगे बढ़ने को राज्य के ऊर्जा क्षेत्र के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस परियोजना के चालू होने के बाद राज्य को बिजली उत्पादन से अतिरिक्त राजस्व प्राप्त होगा, जिससे आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिलेगी।

सिंचाई और कृषि क्षेत्र को मिलेगा बड़ा लाभ

किसाऊ बांध परियोजना का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू सिंचाई और कृषि क्षेत्र से जुड़ा हुआ है। बांध बनने के बाद यमुना बेसिन में पानी का बेहतर भंडारण संभव हो सकेगा। इससे सूखे या कम वर्षा वाले समय में भी किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध कराया जा सकेगा।

उत्तराखंड समेत यमुना बेसिन से जुड़े अन्य राज्यों में कृषि उत्पादन बढ़ाने के लिए जल उपलब्धता बेहद महत्वपूर्ण है। विशेषज्ञों का मानना है कि परियोजना पूरी होने के बाद लाखों किसानों को इसका प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा। इससे फसल उत्पादन बढ़ेगा और कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

पेयजल संकट से भी मिलेगी राहत

भविष्य में बढ़ती आबादी और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों को देखते हुए जल संसाधनों का संरक्षण बेहद आवश्यक माना जा रहा है। किसाऊ परियोजना के जरिए बड़ी मात्रा में जल संग्रहण किया जाएगा, जिससे आने वाले वर्षों में पेयजल आवश्यकताओं को पूरा करने में मदद मिलेगी।

दिल्ली सहित यमुना बेसिन के कई बड़े शहरों और कस्बों को इस परियोजना से अप्रत्यक्ष लाभ मिलने की संभावना है। जल भंडारण क्षमता बढ़ने से गर्मियों के दौरान जल संकट की स्थिति को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकेगा।

केंद्र सरकार उठाएगी 90 प्रतिशत खर्च

परियोजना को गति देने के लिए फंडिंग के मोर्चे पर भी महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। बैठक में तय किया गया कि परियोजना के जल घटक (वॉटर कंपोनेंट) की लागत का 90 प्रतिशत हिस्सा केंद्र सरकार केंद्रीय सहायता के रूप में वहन करेगी। शेष 10 प्रतिशत राशि संबंधित राज्यों द्वारा साझा की जाएगी।

यह फैसला इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इतनी बड़ी परियोजना का वित्तीय बोझ अकेले राज्यों के लिए उठाना आसान नहीं था। केंद्र सरकार की ओर से बड़े हिस्से की फंडिंग मिलने से परियोजना को तेजी से लागू करने का रास्ता साफ हो गया है।

यमुना नदी के पुनर्जीवन में भी निभाएगी अहम भूमिका

किसाऊ बांध परियोजना का प्रभाव केवल बिजली और सिंचाई तक सीमित नहीं रहेगा। यह यमुना नदी के पुनर्जीवन और पर्यावरणीय संतुलन को बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। बांध के माध्यम से नियंत्रित और स्वच्छ जल प्रवाह सुनिश्चित किया जाएगा, जिससे यमुना नदी में पर्यावरणीय प्रवाह बनाए रखने में मदद मिलेगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि इससे नदी की जल गुणवत्ता में सुधार होगा और निचले क्षेत्रों में रहने वाले करोड़ों लोगों को लाभ मिलेगा। लंबे समय से यमुना नदी में घटते जलस्तर और प्रदूषण को लेकर चिंता जताई जाती रही है। ऐसे में यह परियोजना नदी संरक्षण की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।

उत्तराखंड के विकास की नई उम्मीद

उत्तराखंड सरकार किसाऊ बहुउद्देशीय बांध परियोजना को राज्य के विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण मान रही है। ऊर्जा, सिंचाई, पेयजल और पर्यावरण संरक्षण जैसे कई क्षेत्रों से जुड़ी यह परियोजना राज्य की दीर्घकालिक जरूरतों को पूरा करने में मदद करेगी। लंबे समय से लंबित इस योजना को केंद्र स्तर पर मिली सहमति के बाद अब उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही एमओयू पर हस्ताक्षर होंगे और परियोजना को केंद्रीय मंत्रिमंडल की अंतिम मंजूरी भी मिल जाएगी।

यदि सभी प्रक्रियाएं समय पर पूरी होती हैं तो किसाऊ बांध परियोजना उत्तराखंड के लिए एक “गेम चेंजर” साबित हो सकती है। इससे न केवल राज्य की ऊर्जा और जल सुरक्षा मजबूत होगी, बल्कि रोजगार, राजस्व और क्षेत्रीय विकास के नए अवसर भी पैदा होंगे। वर्षों से इंतजार कर रहे उत्तराखंड के लिए यह परियोजना विकास के एक नए अध्याय की शुरुआत मानी जा रही है।

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