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The Hill India > Blog > फीचर्ड > तेहरान से वर्ल्ड कप तक: क्या अमेरिका-ईरान तनाव की कीमत चुका रही है ईरानी फुटबॉल टीम?
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तेहरान से वर्ल्ड कप तक: क्या अमेरिका-ईरान तनाव की कीमत चुका रही है ईरानी फुटबॉल टीम?

The Hill India News
Last updated: June 17, 2026 7:15 am
The Hill India News
Published: June 17, 2026
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फुटबॉल को हमेशा सीमाओं, राजनीति और संघर्षों से ऊपर का खेल माना जाता है। यह वह मंच है जहां अलग-अलग देशों, संस्कृतियों और विचारधाराओं के लोग एक ही मैदान पर प्रतिस्पर्धा करते हैं और खेल भावना का परिचय देते हैं। लेकिन फीफा फुटबॉल विश्व कप के दौरान ईरान की राष्ट्रीय टीम के साथ हो रही घटनाओं ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या अंतरराष्ट्रीय राजनीति खेलों को भी प्रभावित कर रही है? ईरानी टीम और उसके अधिकारियों के आरोपों ने इस बहस को और तेज कर दिया है कि अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव का असर अब फुटबॉल के मैदान तक पहुंच गया है।

Contents
ईरान ने खुद को बताया विश्व कप की “सबसे पीड़ित टीम”मैच खत्म होते ही अमेरिका छोड़ने का निर्देशअमेरिका, कनाडा और मेक्सिको हैं संयुक्त मेजबानएरिजोना की जगह मेक्सिको में बनाना पड़ा बेस कैंपसपोर्ट स्टाफ को नहीं मिला वीजाखिलाड़ियों पर भी पड़ा असरकोच और एनालिस्ट संभाल रहे अतिरिक्त जिम्मेदारियांफीफा से हस्तक्षेप की मांगटिकट आवंटन को लेकर भी उठा विवादराजनीति और खेल का टकराव

ईरान ने खुद को बताया विश्व कप की “सबसे पीड़ित टीम”

ईरान के मुख्य कोच अमीर घालेनोई ने दावा किया है कि उनकी टीम इस विश्व कप की “सबसे पीड़ित टीम” बन गई है। उनका कहना है कि जिन परिस्थितियों में उनकी टीम को टूर्नामेंट खेलना पड़ रहा है, वैसी चुनौतियों का सामना किसी अन्य देश को नहीं करना पड़ रहा।

कोच के अनुसार, न्यूजीलैंड के खिलाफ मुकाबले के बाद खिलाड़ियों को पर्याप्त आराम का समय तक नहीं दिया गया। मैच समाप्त होते ही टीम को अमेरिका छोड़कर मेक्सिको स्थित अपने ट्रेनिंग कैंप लौटने का निर्देश दे दिया गया। इससे खिलाड़ियों की रिकवरी प्रक्रिया प्रभावित हुई और उन्हें लगातार यात्रा की थकान झेलनी पड़ी।

घालेनोई ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि फुटबॉल खिलाड़ियों के लिए मैच के बाद आराम और रिकवरी बेहद जरूरी होती है। लेकिन उनकी टीम को ऐसी सुविधा नहीं मिली, जिसके कारण खिलाड़ियों पर अतिरिक्त मानसिक और शारीरिक दबाव पड़ा।

मैच खत्म होते ही अमेरिका छोड़ने का निर्देश

ईरानी टीम का सबसे बड़ा आरोप यही है कि उन्हें अमेरिका में सामान्य रूप से रहने और तैयारी करने का अवसर नहीं दिया जा रहा। टीम के अनुसार अमेरिकी प्रशासन ने स्पष्ट नियम बना दिया है कि ईरान के खिलाड़ी और कोचिंग स्टाफ मैच से एक दिन पहले ही अमेरिका में प्रवेश कर सकते हैं और मुकाबला समाप्त होने के तुरंत बाद उन्हें वापस लौटना होगा।

सामान्य परिस्थितियों में विश्व कप जैसी प्रतियोगिताओं में टीमें अपने मैचों के बीच एक ही देश में रहकर अभ्यास करती हैं, ताकि खिलाड़ियों को बार-बार यात्रा न करनी पड़े। हालांकि कभी-कभी टीमें अपने बेस कैंप लौटती भी हैं, लेकिन यह उनका स्वयं का निर्णय होता है। ईरान का आरोप है कि उन्हें यह विकल्प नहीं दिया गया और यात्रा के लिए मजबूर किया गया।

न्यूजीलैंड के खिलाफ मुकाबले के बाद खिलाड़ियों को तत्काल मेक्सिको के तिजुआना स्थित कैंप में लौटना पड़ा। इससे टीम की तैयारियों पर असर पड़ा और खिलाड़ियों को अतिरिक्त थकान का सामना करना पड़ा।

अमेरिका, कनाडा और मेक्सिको हैं संयुक्त मेजबान

इस बार फीफा विश्व कप का आयोजन तीन देशों—अमेरिका, मेक्सिको और कनाडा—द्वारा संयुक्त रूप से किया जा रहा है। यह विश्व कप इतिहास का सबसे बड़ा आयोजन माना जा रहा है, जिसमें बड़ी संख्या में टीमें भाग ले रही हैं।

हालांकि टूर्नामेंट के दौरान ईरान की स्थिति अन्य देशों से अलग दिखाई दे रही है। अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से राजनीतिक तनाव बना हुआ है। मध्य पूर्व में हाल के घटनाक्रमों, ईरान और इजरायल के बीच बढ़े तनाव तथा अमेरिकी नीतियों के कारण दोनों देशों के रिश्ते पहले से ही संवेदनशील बने हुए हैं।

ऐसे माहौल में विश्व कप में भाग लेने आई ईरानी टीम को अतिरिक्त प्रशासनिक और वीजा संबंधी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

एरिजोना की जगह मेक्सिको में बनाना पड़ा बेस कैंप

शुरुआती योजना के अनुसार ईरान की टीम अपना आधिकारिक बेस कैंप अमेरिका के एरिजोना राज्य में स्थापित करना चाहती थी। इससे खिलाड़ियों को यात्रा में आसानी होती और वे अमेरिकी मैदानों तथा मौसम के अनुसार बेहतर तैयारी कर सकते थे।

लेकिन अमेरिका में प्रवेश को लेकर अनिश्चितता और वीजा संबंधी चिंताओं के कारण ईरान को अपनी योजना बदलनी पड़ी। अंततः टीम ने मेक्सिको के तिजुआना शहर को अपना प्रशिक्षण केंद्र बनाया।

इस फैसले का असर टीम की रणनीति और तैयारी दोनों पर पड़ा। खिलाड़ियों को हर मैच के लिए बार-बार अंतरराष्ट्रीय यात्रा करनी पड़ रही है, जिससे समय और ऊर्जा दोनों की खपत बढ़ रही है।

सपोर्ट स्टाफ को नहीं मिला वीजा

ईरानी फुटबॉल महासंघ ने आरोप लगाया है कि टीम के एक दर्जन से अधिक सपोर्ट स्टाफ सदस्यों को अमेरिकी वीजा नहीं दिया गया। इन लोगों में टीम प्रबंधन, मीडिया संचालन और प्रशासनिक कार्यों से जुड़े कर्मचारी शामिल बताए जा रहे हैं।

इन अधिकारियों की अनुपस्थिति ने टीम के रोजमर्रा के संचालन को प्रभावित किया है। विश्व कप जैसे बड़े टूर्नामेंट में केवल खिलाड़ी ही नहीं, बल्कि पर्दे के पीछे काम करने वाला बड़ा स्टाफ भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। मीडिया समन्वय, यात्रा प्रबंधन, प्रशिक्षण व्यवस्था, खिलाड़ियों की जरूरतों का ध्यान रखना और प्रशासनिक कार्यों को संभालना इन्हीं लोगों की जिम्मेदारी होती है।

ईरानी महासंघ का कहना है कि जब अन्य सभी देशों को पूर्ण स्टाफ के साथ भाग लेने की सुविधा मिल रही है, तब ईरान को ऐसी समस्याओं का सामना करना पड़ना निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा की भावना के विपरीत है।

खिलाड़ियों पर भी पड़ा असर

केवल सपोर्ट स्टाफ ही नहीं, बल्कि कुछ खिलाड़ियों को भी वीजा संबंधी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। ईरान के फॉरवर्ड खिलाड़ी मेहदी तोराबी का मामला विशेष रूप से चर्चा में रहा।

रिपोर्टों के अनुसार, शुरुआत में उन्हें केवल एक बार अमेरिका में प्रवेश की अनुमति मिली थी। इससे यह आशंका पैदा हो गई थी कि यदि टीम को दोबारा अमेरिका में मैच खेलना पड़ा तो वह उसमें हिस्सा नहीं ले पाएंगे।

इस स्थिति ने टीम प्रबंधन की चिंता बढ़ा दी थी। हालांकि बाद में विवाद बढ़ने के बाद उन्हें आवश्यक अनुमति मिल गई और अब वे टूर्नामेंट के आगामी मुकाबलों में भाग लेने के पात्र हैं। फिर भी यह घटना ईरानी टीम की परेशानियों का प्रतीक बन गई।

कोच और एनालिस्ट संभाल रहे अतिरिक्त जिम्मेदारियां

ईरानी फुटबॉल महासंघ के अनुसार सपोर्ट स्टाफ की कमी के कारण कई जिम्मेदारियां ऐसे लोगों को निभानी पड़ रही हैं जो मूल रूप से उन कार्यों के लिए नियुक्त नहीं थे।

महासंघ का कहना है कि मीडिया संबंधी कई कार्य टीम के विश्लेषकों को करने पड़ रहे हैं। सामान्य परिस्थितियों में यह काम प्रशिक्षित मीडिया अधिकारियों द्वारा किया जाता है। लेकिन आवश्यक स्टाफ की अनुपस्थिति के कारण टीम के अन्य सदस्यों पर अतिरिक्त बोझ पड़ गया है।

महासंघ ने कहा कि इससे न केवल कार्यकुशलता प्रभावित होती है, बल्कि खिलाड़ियों और कोचिंग स्टाफ का ध्यान भी खेल से हटकर प्रशासनिक समस्याओं पर केंद्रित होने लगता है।

फीफा से हस्तक्षेप की मांग

ईरानी फुटबॉल महासंघ ने पूरे मामले को लेकर फीफा से हस्तक्षेप करने की मांग की है। महासंघ का कहना है कि विश्व फुटबॉल की सर्वोच्च संस्था होने के नाते फीफा की जिम्मेदारी है कि सभी टीमों को समान अवसर और निष्पक्ष वातावरण उपलब्ध कराया जाए।

ईरान ने फीफा से अनुरोध किया है कि जिन अधिकारियों को वीजा नहीं मिला है, उनके मामलों पर गंभीरता से विचार किया जाए। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि टूर्नामेंट के दौरान किसी भी टीम के साथ राजनीतिक आधार पर भेदभाव न हो।

महासंघ ने यह भी कहा है कि विश्व कप जैसे वैश्विक आयोजन में सभी प्रतिभागी देशों के लिए समान नियम लागू होने चाहिए और किसी भी टीम को अतिरिक्त बाधाओं का सामना नहीं करना चाहिए।

टिकट आवंटन को लेकर भी उठा विवाद

टूर्नामेंट शुरू होने से ठीक पहले ईरानी फुटबॉल महासंघ ने एक और गंभीर आरोप लगाया था। महासंघ का दावा था कि उसे आवंटित किए गए कुछ टिकट रद्द कर दिए गए, जिससे समर्थकों और अधिकारियों के बीच असंतोष पैदा हुआ।

इस मुद्दे पर भी ईरान ने फीफा से शिकायत दर्ज कराते हुए निष्पक्षता और पारदर्शिता की मांग की थी। महासंघ का कहना था कि टिकट वितरण की प्रक्रिया में किसी भी प्रकार का भेदभाव स्वीकार नहीं किया जा सकता।

राजनीति और खेल का टकराव

विशेषज्ञों का मानना है कि यह पूरा विवाद केवल फुटबॉल तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे अमेरिका और ईरान के जटिल राजनीतिक संबंध भी दिखाई देते हैं। दोनों देशों के बीच दशकों से तनाव बना हुआ है और समय-समय पर यह विभिन्न रूपों में सामने आता रहा है।

हालांकि खेल संगठनों का हमेशा यह प्रयास रहता है कि राजनीति को खेल से दूर रखा जाए, लेकिन वास्तविकता यह है कि अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में कई बार राजनीतिक परिस्थितियों का असर देखने को मिलता है।

ईरान की टीम के आरोपों ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि क्या सभी देशों को वास्तव में समान अवसर मिल रहे हैं या कुछ टीमों को राजनीतिक परिस्थितियों के कारण अतिरिक्त चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।

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