नैनीताल: विश्व प्रसिद्ध बाबा नीम करोरी के पावन धाम ‘कैंचीधाम’ में 15 जून को होने वाले वार्षिक स्थापना दिवस मेले की तैयारियाँ उस समय तनाव में बदल गईं, जब सुरक्षा ड्यूटी में तैनात दो पुलिसकर्मियों पर ही मर्यादा लांघने का गंभीर आरोप लगा। मंदिर के समीप स्थित एक होमस्टे संचालक की बेटी के साथ कथित छेड़खानी के बाद पूरे क्षेत्र में जनआक्रोश भड़क उठा है। घटना से नाराज स्थानीय निवासियों और व्यापारियों ने न सिर्फ आरोपी सिपाहियों को रंगे हाथों पकड़कर उनकी धुनाई कर दी, बल्कि पुलिस चौकी का घेराव कर घंटों नारेबाजी भी की।
लाखों श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र में स्थापना दिवस से ठीक पहले हुई इस शर्मनाक घटना ने न केवल खाकी को दागदार किया है, बल्कि मेले की सुरक्षा व्यवस्थाओं पर भी बड़े सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। मामले की संवेदनशीलता और जनआक्रोश को देखते हुए नैनीताल के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) मंजूनाथ टीसी ने तत्काल मोर्चा संभालते हुए सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
क्या है पूरा घटनाक्रम?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह पूरी घटना कैंचीधाम मंदिर के ठीक पास स्थित एक होमस्टे की है। 15 जून को होने वाले महामेले के मद्देनजर क्षेत्र में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। इसी मेले की सुरक्षा ड्यूटी में तैनात दो पुलिस सिपाहियों पर आरोप है कि उन्होंने होमस्टे संचालक की बेटी के साथ अमर्यादित व्यवहार और छेड़खानी की। युवती के शोर मचाने पर परिवार और आसपास के लोग तुरंत मौके पर इकट्ठा हो गए।
जैसे ही यह खबर फैली कि आस्था के इस बड़े पर्व पर सुरक्षा का जिम्मा संभालने वाले रक्षक ही भक्षक बन गए हैं, स्थानीय लोगों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। आक्रोशित भीड़ ने दोनों आरोपी सिपाहियों को मौके पर ही दबोच लिया और उनकी जमकर पिटाई कर दी। इसके बाद उग्र भीड़ दोनों को घसीटते हुए स्थानीय पुलिस चौकी ले गई।
पुलिस चौकी का घेराव और तीखी नारेबाजी
घटना के बाद सैकड़ों की संख्या में स्थानीय ग्रामीण और व्यापारी पुलिस चौकी के बाहर जमा हो गए। लोगों ने चौकी का पूर्ण रूप से घेराव कर दिया और उत्तराखंड पुलिस प्रशासन के खिलाफ तीखी नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों का साफ कहना था कि जब तक दोषी पुलिसकर्मियों को निलंबित कर उनके खिलाफ सख्त धाराओं में मुकदमा दर्ज नहीं किया जाता, तब तक वे पीछे नहीं हटेंगे। स्थिति को संभालने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों को हस्तक्षेप करना पड़ा।
‘कर्फ्यू जैसा माहौल’— पुलिस की कार्यप्रणाली से पहले ही नाराज थे व्यापारी
स्थानीय लोगों और व्यापारियों का यह गुस्सा केवल छेड़खानी की घटना तक सीमित नहीं था। दरअसल, इस बार कैंचीधाम स्थापना दिवस विवाद के पीछे पुलिस द्वारा लागू किए गए कुछ कड़े और मनमाने नियम भी एक बड़ी वजह बनकर उभरे हैं।
व्यापारियों और ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिस प्रशासन ने स्थापना दिवस मेले से तीन दिन पहले ही कैंचीधाम क्षेत्र और नैनीताल जिले की सीमाओं पर वाहनों की आवाजाही को पूरी तरह से रोक दिया था। स्थानीय निवासियों का कहना है:
“पुलिस ने मेले से तीन दिन पहले ही पूरे क्षेत्र में कर्फ्यू जैसा माहौल बना दिया है। जगह-जगह बैरिकेटिंग कर दी गई है और वाहनों का आवागमन पूरी तरह प्रतिबंधित है। कैंचीधाम के इतिहास में आज से पहले ऐसा कभी नहीं हुआ। इस मनमाने रवैये के कारण देश-विदेश से आ रहे श्रद्धालुओं, पर्यटकों और स्थानीय व्यापारियों को भारी मानसिक और आर्थिक प्रताड़ना झेलनी पड़ रही है।”
इस पाबंदी के कारण स्थानीय लोगों में पहले से ही सुलग रहा असंतोष, छेड़खानी की इस घटना के बाद दावानल की तरह भड़क उठा।
एसएसपी मंजूनाथ टीसी का कड़ा रुख: ‘दोषी बख्शे नहीं जाएंगे’
मामले की गंभीरता को देखते हुए नैनीताल के एसएसपी मंजूनाथ टीसी ने त्वरित संज्ञान लिया है। उन्होंने घटना की पुष्टि करते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच के आदेश दे दिए हैं।
एसएसपी ने मीडिया को दिए अपने बयान में स्पष्ट और कड़े शब्दों में कहा:
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“खाकी की गरिमा से समझौता किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”
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“मामले की जांच शुरू कर दी गई है और यदि महिला से अभद्रता या छेड़खानी के आरोप सही पाए जाते हैं, तो दोनों दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ सख्त से सख्त कानूनी कदम उठाए जाएंगे।”
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“पुलिस का काम जनता की सुरक्षा करना है, भय या असुरक्षा का माहौल पैदा करना नहीं।”
आस्था की नगरी में सुरक्षा और साख पर सवाल
बाबा नीम करोरी का कैंचीधाम न केवल भारत बल्कि वैश्विक स्तर पर करोड़ों लोगों की अगाध श्रद्धा का केंद्र है। हर साल 15 जून को यहाँ स्थापना दिवस के अवसर पर लाखों की संख्या में वीआईपी, विदेशी सैलानी और श्रद्धालु बाबा के दर्शन और मालपुए का प्रसाद लेने पहुँचते हैं। इतने बड़े और पवित्र आयोजन से ठीक पहले कैंचीधाम स्थापना दिवस विवाद का सामने आना पुलिस और जनता के बीच के विश्वास को गहरी चोट पहुँचाता है।
स्थानीय बुद्धिजीवियों का कहना है कि पुलिस को सुरक्षा और व्यवस्था के नाम पर स्थानीय लोगों को प्रताड़ित करने के बजाय उनके साथ समन्वय बिठाकर काम करना चाहिए था। बहरहाल, इस घटना ने मेले के ठीक पहले नैनीताल पुलिस प्रशासन को बैकफुट पर धकेल दिया है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस जनआक्रोश को शांत करने और मेले को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए क्या कदम उठाता है।
