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उत्तराखंड वन विभाग में ‘बंपर तबादले’: गृह जनपद के पास तैनाती से फील्ड स्टाफ को बड़ी राहत, नए भर्ती रेंजर्स को भी जिम्मेदारी

The Hill India News
Last updated: June 11, 2026 1:32 am
The Hill India News
Published: June 11, 2026
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देहरादून: उत्तराखंड वन विभाग में लंबे समय से चली आ रही प्रशासनिक जड़ता को तोड़ते हुए धामी सरकार ने फील्ड कर्मचारियों के स्थानांतरण में एक बड़ा और अभूतपूर्व कदम उठाया है। राज्य के अन्य बड़े महकमों की तरह ही वन विभाग में भी फील्ड स्टाफ के तबादले हमेशा से एक जटिल और चुनौतीपूर्ण प्रक्रिया रहे हैं। अक्सर देखा गया है कि दुर्गम और संवेदनशील क्षेत्रों में तैनात वनकर्मी अपने गृह जनपद या उसके आसपास ट्रांसफर की मांग करते रहते हैं, लेकिन ठोस नीति और इच्छाशक्ति के अभाव में इस पर कभी बड़े स्तर पर काम नहीं हो सका। इसे प्रशासनिक हलकों में ‘असंभव’ मान लिया गया था, लेकिन पहली बार वन मुख्यालय ने इस दिशा में गंभीर प्रयास करते हुए मैदानी और पहाड़ी क्षेत्रों के संतुलन को साधते हुए बंपर तबादला सूची जारी की है।

Contents
‘होमवर्क’ का दिखा असर: पहली बार इच्छा और जरूरत में दिखा संतुलनवन आरक्षी और वन दरोगा स्तर पर बड़े पैमाने पर फेरबदलसालों से एक ही जगह जमे कर्मियों की विदाई, सुगम-दुर्गम का विवाद थमेगागढ़वाल संभाग में भी अलग से जारी हुई सूचीवन सुरक्षा और वन्यजीव प्रबंधन पर पड़ेगा सकारात्मक असर

‘होमवर्क’ का दिखा असर: पहली बार इच्छा और जरूरत में दिखा संतुलन

दरअसल, वन विभाग में तैनात अधिकतर फील्ड कर्मचारी अपनी पारिवारिक परिस्थितियों या स्वास्थ्य कारणों से मैदानी जिलों में पोस्टिंग के लिए आवेदन करते हैं। सीमित पदों और भौगोलिक चुनौतियों के कारण सभी फील्ड स्टाफ को उनकी मर्जी के मुताबिक तैनाती देना व्यावहारिक रूप से मुमकिन नहीं हो पाता। इसी असंतुलन को दूर करने के लिए इस बार वन मुख्यालय स्तर पर बेहद बारीकी से ‘होमवर्क’ किया गया।

विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की देखरेख में मानव संसाधन (HR) का पूरा डेटा खंगाला गया, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि जो कर्मचारी सालों से एक ही दुर्गम स्थान पर डटे हैं, उन्हें राहत दी जाए और युवाओं को संवेदनशील क्षेत्रों में जिम्मेदारी सौंपी जाए। इस पूरी कवायद का मुख्य उद्देश्य ज्यादा से ज्यादा वन कर्मियों को उनके गृह जनपद या निकटवर्ती क्षेत्रों में तैनाती देकर उनका मनोबल बढ़ाना है।

वन आरक्षी और वन दरोगा स्तर पर बड़े पैमाने पर फेरबदल

विभाग द्वारा जारी आधिकारिक आदेशों के अनुसार, इस स्थानांतरण प्रक्रिया में सबसे बड़ा फोकस जमीनी स्तर पर काम करने वाले कर्मचारियों पर रहा है। मानव संसाधन प्रबंधन को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से:

  • वन आरक्षी (Forest Guards): विभाग ने सबसे बड़ी राहत देते हुए 110 वन आरक्षियों की तबादला सूची जारी की है। ये वो कर्मचारी हैं जो वनों की सुरक्षा में सीधे तौर पर फ्रंटलाइन पर तैनात रहते हैं।

  • वन दरोगा (Foresters): प्रशासनिक व्यवस्था को चुस्त- दुरुस्त करने के लिए कुल 47 वन दरोगाओं के भी कार्यक्षेत्र में बदलाव किया गया है।

  • उपवन क्षेत्राधिकारी (Deputy Rangers): वन मुख्यालय से उपवन क्षेत्राधिकारी स्तर के अधिकारियों के भी तबादले किए गए हैं, हालांकि प्रशासनिक निरंतरता बनाए रखने के लिए इनकी संख्या सीमित रखी गई है।

इसके अतिरिक्त, हाल ही में सेवा में शामिल हुए नए भर्ती रेंजर्स (Forest Range Officers) को भी पहली फील्ड पोस्टिंग देने से जुड़ा महत्वपूर्ण आदेश जारी कर दिया गया है। नई ऊर्जा और आधुनिक प्रशिक्षण से लैस इन युवा अधिकारियों की तैनाती से वन क्षेत्रों के प्रबंधन में नई गति आने की उम्मीद है।

सालों से एक ही जगह जमे कर्मियों की विदाई, सुगम-दुर्गम का विवाद थमेगा

उत्तराखंड वन विभाग में यह शिकायत आम थी कि रसूखदार या पैरवी वाले वनकर्मी सालों से एक ही सुगम या पसंदीदा जगह पर जमे हुए थे, जबकि कई जरूरतमंद वनकर्मी बार-बार अनुरोध और वैध कारणों के बावजूद अपने गृह जनपद के आसपास आने के लिए तरस रहे थे। लंबे समय से लंबित इन मांगों के कारण फील्ड स्टाफ के बीच एक तरह की निराशा पनप रही थी, जिसका सीधा असर वनों और वन्यजीवों की सुरक्षा पर पड़ रहा था।

इन्हीं व्यावहारिक दिक्कतों को भांपते हुए इस बार स्वेच्छा (Voluntary Request) और पात्रता के आधार पर पारदर्शी तरीके से पोस्टिंग देने की कोशिश की गई है। इस बड़ी राहत से न केवल वन कर्मियों का तनाव कम होगा, बल्कि वे अधिक प्रोत्साहित होकर अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर सकेंगे।

गढ़वाल संभाग में भी अलग से जारी हुई सूची

यह तबादला प्रक्रिया केवल वन मुख्यालय स्तर तक ही सीमित नहीं रही है। केंद्रीकृत व्यवस्था के साथ-साथ क्षेत्रीय संतुलन का भी पूरा ध्यान रखा गया है। जहां एक तरफ वन मुख्यालय से लगभग 180 फील्ड वन कर्मियों के तबादले की मुख्य सूची जारी की गई, वहीं दूसरी तरफ CCF (मुख्य वन संरक्षक) गढ़वाल कार्यालय की ओर से भी गढ़वाल क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले वन प्रभागों के लिए वन कर्मियों की एक अलग से स्थानांतरण सूची जारी की गई है।

इस दोहरे स्तर पर की गई प्रशासनिक सर्जरी के बाद यह माना जा रहा है कि उन कर्मचारियों को सबसे बड़ी राहत मिली है, जो पिछले कई वर्षों से हर स्थानांतरण सत्र में केवल उम्मीद लगाए बैठे थे, लेकिन अंतिम सूची में उनका नाम शामिल नहीं हो पाता था।

वन सुरक्षा और वन्यजीव प्रबंधन पर पड़ेगा सकारात्मक असर

राष्ट्रीय स्तर के विशेषज्ञों और सेवानिवृत्त वन अधिकारियों का मानना है कि फील्ड स्टाफ की संतुष्टि का सीधा संबंध वनों की सुरक्षा से होता है। उत्तराखंड का एक बड़ा हिस्सा वन क्षेत्र और अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से सटा है, जहां मानव-वन्यजीव संघर्ष, दावानल (जंगल की आग), और अवैध कटान जैसी गंभीर चुनौतियां रोजाना सामने आती हैं। ऐसे में यदि फ्रंटलाइन स्टाफ मानसिक रूप से संतुष्ट और अपने परिवार के नजदीक तैनात रहेगा, तो वह फील्ड में अधिक समय और बेहतर आउटपुट दे पाएगा। सरकार के इस कदम को वन प्रशासन के आधुनिकीकरण और संवेदीकरण की दिशा में एक बड़ा नीतिगत सुधार माना जा रहा है।

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