कोलकाता/डायमंड हार्बर: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के अंतिम और सबसे चर्चित अध्याय का परिणाम आज सामने आने जा रहा है। सूबे की हाई-प्रोफाइल फाल्टा विधानसभा सीट पर हुए ऐतिहासिक पुनर्मतदान (Re-voting) के बाद आज सुबह से ही मतों की गणना (Counting) शुरू हो चुकी है। कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच डायमंड हार्बर महिला विश्वविद्यालय परिसर में बनाए गए मतगणना केंद्र और स्ट्रॉन्ग रूम के बाहर भारी पुलिस बल और केंद्रीय सुरक्षा बलों (CAPF) की तैनाती की गई है।
गुरुवार को फाल्टा विधानसभा क्षेत्र के सभी 285 मतदान केंद्रों पर बेहद शांतिपूर्ण और अनुशासित ढंग से पुनर्मतदान संपन्न हुआ था। राहत की बात यह रही कि मतदान के दौरान राज्य के किसी भी हिस्से से हिंसा, तनाव, झड़प या चुनावी धांधली की कोई अप्रिय घटना सामने नहीं आई। इस बार का चुनाव इसलिए भी बेहद दिलचस्प और एकतरफा नजर आ रहा है क्योंकि मतदान से ठीक दो दिन पहले तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कद्दावर उम्मीदवार जहांगीर खान ने खुद को चुनावी दौड़ से बाहर कर लिया था। टीएमसी की इस अचानक वापसी के बाद राज्य में नव-निर्वाचित और सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) की जीत की उम्मीदें काफी प्रबल हो गई हैं।
आखिर क्यों पड़ी फाल्टा सीट पर दोबारा मतदान की जरूरत?
पश्चिम बंगाल की बाकी 293 विधानसभा सीटों के चुनावी नतीजे चार मई को ही घोषित किए जा चुके हैं, जिसमें भारतीय जनता पार्टी ने ऐतिहासिक बहुमत हासिल करते हुए पश्चिम बंगाल की राजनीतिक इतिहास में पहली बार अपने दम पर सत्ता की बागडोर संभाली है। हालांकि, फाल्टा सीट का विवाद सुर्खियों में रहा।
दरअसल, इस सीट पर बीते 29 अप्रैल को मुख्य चरण के तहत मतदान कराया गया था। मतदान के दौरान कई पोलिंग बूथों से गंभीर शिकायतें सामने आईं। विपक्ष और स्थानीय मतदाताओं का आरोप था कि कई इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (EVM) पर किसी इत्र जैसे चिपचिपे पदार्थ और सेलो टेप का इस्तेमाल किया गया था, जिससे मतदाताओं को अपनी पसंद का बटन दबाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। इस मामले की गंभीरता और निष्पक्षता को देखते हुए भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने संज्ञान लिया और पूर्व में हुए मतदान को शून्य घोषित करते हुए फाल्टा में नए सिरे से पुनर्मतदान (Re-polling) कराने का बड़ा ऐतिहासिक फैसला सुनाया था।
मैदान में डटे हैं ये सूरमा: जहांगीर खान के हटने से उलझा गणित
भले ही तृणमूल कांग्रेस के आधिकारिक प्रत्याशी जहांगीर खान ने ऐन वक्त पर चुनाव से हटने का ऐलान कर दिया था, लेकिन तकनीकी और कानूनी रूप से उनका नाम ईवीएम (EVM) पर दर्ज रहा। चुनाव आयोग के नियमों के मुताबिक, नामांकन वापसी की समय सीमा समाप्त होने के बाद मतपत्रों और ईवीएम से किसी भी उम्मीदवार का नाम या चुनाव चिह्न हटाया नहीं जा सकता।
फाल्टा के सियासी समर में मुख्य रूप से निम्नलिखित चेहरे अपनी किस्मत आजमा रहे हैं:
| उम्मीदवार का नाम | राजनीतिक दल | वर्तमान स्थिति |
| देबांग्शु पांडा | भारतीय जनता पार्टी (BJP) | मुख्य रेस में सबसे आगे |
| अब्दुर रज्जाक मोल्ला | भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (Congress) | त्रिकोणीय मुकाबले की कोशिश |
| शंभू नाथ कुर्मी | कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (CPI-M) | वामपंथ की जमीन बचाने की कवायद |
| जहांगीर खान | तृणमूल कांग्रेस (TMC) | तकनीकी रूप से शामिल (चुनावी दौड़ से बाहर) |
| दीप हाटी | निर्दलीय | स्थानीय समीकरणों पर नजर |
| चंद्रकांत रॉय | निर्दलीय | चुनावी मैदान में सक्रिय |
बंपर वोटिंग: लोकतंत्र के उत्सव में जनता ने बढ़-चढ़कर लिया हिस्सा
फाल्टा की राजनीतिक चेतना का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि दोबारा मतदान होने के बावजूद वोटर्स के उत्साह में कोई कमी नहीं देखी गई। चुनाव अधिकारियों द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक, शाम पांच बजे तक विधानसभा क्षेत्र के कुल 2.36 लाख पंजीकृत मतदाताओं में से 86.11 प्रतिशत लोगों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया।
अगर इसकी तुलना 29 अप्रैल को हुए विवादित मतदान से की जाए, तो उस समय भी इसी अवधि तक 86.71 प्रतिशत मतदान रिकॉर्ड किया गया था। कड़े सुरक्षा इंतजामों और निष्पक्ष माहौल के कारण महिलाओं और फर्स्ट-टाइम वोटर्स (पहली बार वोट देने वाले युवाओं) ने लंबी-लंबी कतारों में लगकर बिना किसी डर के लोकतंत्र के इस पर्व में अपनी आहुति दी।
बीजेपी के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह सीट? बदल जाएंगे विधानसभा के समीकरण
जहांगीर खान के अचानक चुनावी मैदान छोड़ने से फाल्टा का पूरा राजनीतिक परिदृश्य पूरी तरह भारतीय जनता पार्टी के पक्ष में झुकता हुआ दिखाई दे रहा है। राज्य में पहले ही सरकार बना चुकी भाजपा इस सीट पर अपनी एकतरफा और प्रचंड जीत को लेकर पूरी तरह आश्वस्त है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि टीएमसी के वॉकओवर के बाद भाजपा प्रत्याशी देबांग्शु पांडा की राह बेहद आसान हो गई है।
विधानसभा की सीटों का नया गणित:
यदि आज घोषित होने वाले नतीजों में भाजपा फाल्टा विधानसभा सीट को अपने नाम करने में सफल रहती है, तो साल 2026 के इस ऐतिहासिक विधानसभा चुनाव में उसकी कुल जीती हुई सीटों का आंकड़ा बढ़कर 208 तक पहुंच जाएगा। हालांकि, तकनीकी रूप से सदन के भीतर संख्या बल थोड़ा अलग रह सकता है। दरअसल, पार्टी के शीर्ष नेतृत्व और अधिकारी द्वारा भवानीपुर सीट को अपने पास बरकरार रखते हुए नंदीग्राम सीट को खाली करने का फैसला लिया गया है, जिसके चलते तात्कालिक तौर पर विधानसभा में भाजपा के विधायकों की वास्तविक संख्या 207 ही दर्ज की जाएगी।
“फाल्टा की जनता ने राज्य में चल रही विकास की लहर और भयमुक्त शासन के पक्ष में मतदान किया है। मतपेटियां खुलते ही यह साफ हो जाएगा कि बंगाल की जनता अब तुष्टिकरण और चुनावी धांधली की राजनीति को पूरी तरह नकार चुकी है।”
— स्थानीय बीजेपी नेतृत्व, पश्चिम बंगाल
स्ट्रॉन्ग रूम के बाहर त्रि-स्तरीय सुरक्षा घेरा, काउंटिंग पर पैनी नजर
डायमंड हार्बर महिला विश्वविद्यालय में वोटों की गिनती सुचारू और शांतिपूर्ण ढंग से पूरी कराने के लिए चुनाव आयोग ने त्रि-स्तरीय (Three-tier) सुरक्षा घेरा तैयार किया है। स्ट्रॉन्ग रूम के सबसे अंदरूनी घेरे में केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के सशस्त्र जवान तैनात हैं, जबकि बाहरी घेरों की जिम्मेदारी राज्य पुलिस और सशस्त्र पुलिस बल को सौंपी गई है। मतगणना केंद्र के भीतर केवल अधिकृत पास धारक एजेंटों, उम्मीदवारों और निर्वाचन अधिकारियों को ही प्रवेश की अनुमति दी जा रही है।
शुरुआती रुझानों में डाक मतपत्रों (Postal Ballots) की गिनती के बाद ईवीएम के वोटों के चक्रवार (Round-wise) आंकड़े सामने आने शुरू हो जाएंगे। दोपहर तक फाल्टा विधानसभा के अंतिम परिणाम की तस्वीर पूरी तरह साफ होने की उम्मीद है।



