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पेट्रोल में 30% तक एथेनॉल मिलाने की तैयारी, तेल संकट के बीच सरकार का बड़ा कदम, इंजन और माइलेज को लेकर बढ़ी चर्चा

The Hill India News
Last updated: May 21, 2026 5:24 am
The Hill India News
Published: May 21, 2026
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देश में बढ़ती पेट्रोल-डीजल कीमतों और वैश्विक तेल संकट की आशंकाओं के बीच केंद्र सरकार ने ईंधन नीति को लेकर बड़ा कदम उठाया है। सरकार अब पेट्रोल में 30 प्रतिशत तक एथेनॉल मिश्रण यानी E30 फ्यूल की दिशा में आगे बढ़ने की तैयारी कर रही है। ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स (BIS) ने हाल ही में E22, E25, E27 और E30 जैसे नए एथेनॉल-पेट्रोल मिश्रणों के तकनीकी मानकों को अधिसूचित कर दिया है। हालांकि अभी देशभर में E30 पेट्रोल की बिक्री शुरू नहीं होगी, लेकिन सरकार के इस कदम को भविष्य की बड़ी ईंधन रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।

भारतीय मानक ब्यूरो द्वारा जारी किए गए नए मानक यह संकेत देते हैं कि भारत धीरे-धीरे हाई एथेनॉल ब्लेंडिंग की ओर बढ़ रहा है। इससे पहले सरकार पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण यानी E20 को बढ़ावा दे रही थी और उसका लक्ष्य वर्ष 2030 तक हासिल करना था। बाद में सरकार ने इस लक्ष्य को आगे बढ़ाकर 2025-26 तक पूरा करने की योजना बनाई। अब E30 तक की तैयारी यह दर्शाती है कि आने वाले वर्षों में भारत पारंपरिक पेट्रोल पर अपनी निर्भरता कम करना चाहता है।

सरकार का यह कदम ऐसे समय आया है जब पश्चिम एशिया में जारी तनाव ने वैश्विक तेल बाजार को लेकर चिंता बढ़ा दी है। खासकर अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण कच्चे तेल की सप्लाई प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे अहम समुद्री मार्ग से दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत तेल सप्लाई गुजरती है। यदि वहां संकट गहराता है तो भारत जैसे तेल आयात पर निर्भर देशों पर बड़ा असर पड़ सकता है।

भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है। ऐसे में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल सीधे पेट्रोल-डीजल की कीमतों और देश की अर्थव्यवस्था पर असर डालता है। इसी वजह से सरकार वैकल्पिक ईंधन विकल्पों को तेजी से बढ़ावा दे रही है। एथेनॉल ब्लेंडिंग को ऊर्जा सुरक्षा और आयात निर्भरता कम करने का एक बड़ा उपाय माना जा रहा है।

क्या होता है E20 और E30 फ्यूल?
E20 का मतलब है पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल और 80 प्रतिशत सामान्य पेट्रोल का मिश्रण। इसी तरह E30 में 30 प्रतिशत एथेनॉल मिलाया जाएगा। एथेनॉल मुख्य रूप से गन्ने, मक्का और अन्य कृषि उत्पादों से तैयार किया जाता है। इसे बायोफ्यूल माना जाता है, जो पारंपरिक ईंधन की तुलना में अपेक्षाकृत पर्यावरण के लिए बेहतर माना जाता है।

हालांकि E20 फ्यूल लागू होने के बाद वाहन मालिकों के बीच कई तरह की चिंताएं भी सामने आई थीं। लोगों को डर था कि ज्यादा एथेनॉल मिश्रण से पुराने वाहनों के इंजन पर असर पड़ सकता है और माइलेज कम हो सकती है। कई वाहन मालिकों ने यह भी आशंका जताई थी कि इससे इंजन पार्ट्स जल्दी खराब हो सकते हैं और मेंटेनेंस लागत बढ़ सकती है।

इन चिंताओं पर केंद्र सरकार और पेट्रोलियम मंत्रालय पहले भी सफाई दे चुके हैं। Hardeep Singh Puri ने कहा था कि E20 फ्यूल से इंजन फेल होने या बड़े तकनीकी नुकसान का कोई व्यापक मामला सामने नहीं आया है। सरकार का दावा है कि नई तकनीक वाले वाहन E20 और उससे अधिक एथेनॉल मिश्रण के अनुरूप डिजाइन किए जा रहे हैं।

ऑटोमोबाइल कंपनियां भी अब फ्लेक्स-फ्यूल और हाई एथेनॉल कंपैटिबल इंजन विकसित करने पर काम कर रही हैं। आने वाले समय में कई नई गाड़ियां E20 और E30 जैसे ईंधन मिश्रणों के हिसाब से तैयार की जा सकती हैं। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि पुराने वाहनों के लिए यह बदलाव चुनौतीपूर्ण हो सकता है और सरकार को इस दिशा में स्पष्ट गाइडलाइन जारी करनी चाहिए।

बायोफ्यूल और एथेनॉल इंडस्ट्री लंबे समय से उच्च एथेनॉल मिश्रण को बढ़ावा देने की मांग कर रही थी। उद्योग जगत का कहना है कि इससे किसानों को भी फायदा होगा, क्योंकि एथेनॉल उत्पादन के लिए कृषि उत्पादों की मांग बढ़ेगी। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सकती है और चीनी मिलों व बायोफ्यूल कंपनियों को नया बाजार मिलेगा।

ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार यदि भारत धीरे-धीरे E30 जैसे मिश्रण की ओर बढ़ता है तो इससे विदेशी मुद्रा की बचत हो सकती है और तेल आयात बिल में कमी आएगी। साथ ही यह कदम पर्यावरण प्रदूषण कम करने में भी मददगार साबित हो सकता है।

हालांकि फिलहाल सरकार ने केवल तकनीकी मानकों को मंजूरी दी है और E30 की तत्काल बिक्री शुरू नहीं की गई है। लेकिन यह साफ हो गया है कि भारत आने वाले वर्षों में अपनी ईंधन नीति में बड़ा बदलाव करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार और ऑटोमोबाइल उद्योग इस बदलाव को किस तरह लागू करते हैं और इसका आम उपभोक्ताओं पर क्या प्रभाव पड़ता है।

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