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उत्तराखंड में फिर तेज हुई ‘जिहाद’ और धर्मांतरण की राजनीति, सीएम धामी की सख्त चेतावनी से गरमाया माहौल

The Hill India News
Last updated: May 19, 2026 4:15 am
The Hill India News
Published: May 19, 2026
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उत्तराखंड में एक बार फिर ‘लव जिहाद’, ‘लैंड जिहाद’, धर्मांतरण और धार्मिक पहचान से जुड़े मुद्दों ने प्रदेश की राजनीति और सामाजिक माहौल को पूरी तरह गर्म कर दिया है। पश्चिम बंगाल समेत अन्य राज्यों में चुनावी प्रक्रिया खत्म होने के बाद अब देवभूमि उत्तराखंड में हिंदुत्व, जनसांख्यिकीय बदलाव, धार्मिक अतिक्रमण और धर्मांतरण जैसे मुद्दे राजनीतिक विमर्श के केंद्र में आ गए हैं। राज्य सरकार लगातार इन मामलों पर सख्त रुख दिखा रही है, जबकि विपक्ष इसे जनता के असली मुद्दों से ध्यान भटकाने की राजनीति बता रहा है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के हालिया बयानों ने इस बहस को और तेज कर दिया है।

बीते दिनों देहरादून की सड़कों पर बजरंग दल और कई हिंदू संगठनों ने जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों के हाथों में ‘लव जिहाद बंद करो’, ‘धर्मांतरण रोको’ और ‘लैंड जिहाद नहीं चलेगा’ जैसे नारे लिखी तख्तियां दिखाई दीं। प्रदर्शन के कारण शहर के कई इलाकों में लंबा जाम लग गया और लोगों को भारी गर्मी में घंटों परेशानी झेलनी पड़ी। इन संगठनों का आरोप है कि उत्तराखंड में सुनियोजित तरीके से धार्मिक संतुलन बदलने की कोशिशें हो रही हैं और सरकार को इस दिशा में और कठोर कार्रवाई करनी चाहिए।

इसी बीच मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उधम सिंह नगर जिले के सितारगंज में आयोजित एक जनसभा के दौरान धर्मांतरण और तथाकथित ‘जिहाद’ के मुद्दों पर बेहद सख्त बयान दिया। थारू, राणा और बुक्सा जनजातीय समुदायों के बीच आयोजित सभा में मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि उत्तराखंड में जबरन या प्रलोभन देकर धर्म परिवर्तन कराने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों की जगह जेल में होगी और राज्य सरकार ने इसी उद्देश्य से सख्त धर्मांतरण कानून लागू किया है।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि उत्तराखंड की मूल संस्कृति, परंपरा और जनजातीय पहचान को बचाना सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि थारू, राणा और बुक्सा जैसी जनजातियां राज्य की सांस्कृतिक विरासत हैं और उनकी परंपराओं को सुरक्षित रखने के लिए सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री ने महाराणा प्रताप का उदाहरण देते हुए कहा कि सनातन संस्कृति की रक्षा करना राज्य सरकार का कर्तव्य है और किसी भी प्रकार के सांस्कृतिक या धार्मिक अतिक्रमण को स्वीकार नहीं किया जाएगा।

धामी ने अपने संबोधन में ‘लैंड जिहाद’ का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने दावा किया कि कुछ लोग धार्मिक प्रतीकों का इस्तेमाल कर सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जा करने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन सरकार ने सख्ती दिखाते हुए 12 हजार एकड़ से अधिक भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड में ‘थूक जिहाद’ और ‘लव जिहाद’ जैसी गतिविधियों को किसी भी हालत में नहीं चलने दिया जाएगा।

दरअसल, तराई क्षेत्र में ईसाई मिशनरियों द्वारा कथित धर्मांतरण की घटनाओं के सामने आने के बाद प्रशासन और सरकार दोनों अलर्ट मोड में दिखाई दे रहे हैं। जिला प्रशासन को ऐसे मामलों पर लगातार निगरानी रखने और तुरंत कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति को लालच, दबाव या धोखे से धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर किया जाता है तो यह कानूनन अपराध है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

उधर हरिद्वार जिले की सुल्तानपुर नगर पंचायत में बनी एक मस्जिद को लेकर विवाद और गहरा गया है। प्रशासन की कार्रवाई के बाद मस्जिद प्रबंधन ने स्वयं ऊंची मीनारों को हटाने का काम शुरू कर दिया है। जिला प्रशासन का कहना है कि मस्जिद निर्माण में निर्धारित मानकों और अनुमति प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया था। हरिद्वार के जिलाधिकारी मयूर दीक्षित के अनुसार सोशल मीडिया पर मस्जिद की ऊंची मीनारों और निर्माण को लेकर शिकायतें सामने आई थीं, जिसके बाद प्रशासन ने मामले का संज्ञान लिया।

प्रशासन ने पहले मस्जिद प्रबंधन को नोटिस जारी किया, लेकिन समय पर जवाब नहीं मिलने और निर्माण कार्य न हटाए जाने के बाद एसडीएम के नेतृत्व में टीम मौके पर पहुंची। प्रशासन ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि अवैध निर्माण नहीं हटाया गया तो परिसर को सील कर दिया जाएगा। इसके बाद मस्जिद प्रबंधन ने स्वयं मीनार हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी।

बताया जा रहा है कि यह मस्जिद करीब दस महीने पहले भी चर्चा में आई थी। आरोप था कि इसे उत्तराखंड की सबसे बड़ी मस्जिद के रूप में विकसित किया जा रहा था और इसकी मीनारों की ऊंचाई निर्धारित मानकों से कहीं अधिक थी। प्रशासन का दावा है कि निर्माण के लिए न तो जिला प्रशासन और न ही विकास प्राधिकरण से अनुमति ली गई थी। इस कार्रवाई के बाद राज्यभर में धार्मिक निर्माण और अतिक्रमण को लेकर बहस और तेज हो गई है।

इसी बीच उधम सिंह नगर जिले के गदरपुर क्षेत्र में धर्म परिवर्तन से जुड़ा एक और मामला प्रशासनिक कार्रवाई के केंद्र में आ गया है। जांच के बाद एक व्यक्ति के अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र को निरस्त करने की संस्तुति जिला स्क्रूटनी समिति को भेजी गई है। इस मामले की शुरुआत ग्राम मजारशीला निवासी अरविंद सैनी की शिकायत से हुई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि गांव में अवैध रूप से चर्च संचालित कर धर्म परिवर्तन कराया जा रहा है।

प्रशासन ने मामले की जांच शुरू की और उप जिलाधिकारी ऋचा सिंह के अनुसार जांच में ऐसे तथ्य सामने आए जिनसे संकेत मिला कि संबंधित व्यक्ति ने कथित रूप से धर्म परिवर्तन किया है। जांच के दौरान सोशल मीडिया गतिविधियों और सार्वजनिक पोस्ट को भी आधार बनाया गया। प्रशासन का कहना है कि संबंधित व्यक्ति को वर्ष 2019 में अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र जारी किया गया था, लेकिन संयुक्त जांच रिपोर्ट के आधार पर अब उसके निरस्तीकरण की सिफारिश की गई है। अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई संविधान (अनुसूचित जाति) आदेश 1950 और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप की जा रही है।

इन सभी घटनाओं के बीच कांग्रेस ने धामी सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता गरिमा मेहरा दसौनी ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार विकास, रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे मुद्दों पर विफल रही है और जनता का ध्यान भटकाने के लिए धार्मिक ध्रुवीकरण का सहारा लिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि मुख्यमंत्री स्वयं मंचों से ‘लव जिहाद’ और ‘थूक जिहाद’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल करेंगे, तो इससे समाज में तनाव और विभाजन बढ़ेगा।

कांग्रेस का कहना है कि प्रदेश में बेरोजगारी, पलायन, महंगाई और खराब बुनियादी सुविधाएं जैसे मुद्दे लगातार बढ़ रहे हैं, लेकिन सरकार इन समस्याओं के समाधान के बजाय धार्मिक मुद्दों को हवा दे रही है। विपक्ष का आरोप है कि चुनाव नजदीक आते ही ऐसे मुद्दों को राजनीतिक रूप से अधिक उछाला जाता है ताकि जनता का ध्यान असली समस्याओं से हटाया जा सके।

वहीं भाजपा और सरकार का कहना है कि यह केवल राजनीति नहीं बल्कि राज्य की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान को सुरक्षित रखने का प्रयास है। भाजपा नेताओं का दावा है कि उत्तराखंड देवभूमि है और यहां की परंपराओं, धार्मिक स्थलों और जनजातीय संस्कृति की रक्षा करना सरकार की जिम्मेदारी है। पार्टी का कहना है कि यदि किसी भी प्रकार का अवैध धर्मांतरण, अतिक्रमण या सांस्कृतिक बदलाव की कोशिश होगी तो सरकार सख्त कार्रवाई करेगी।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उत्तराखंड में धार्मिक और सांस्कृतिक मुद्दों की राजनीति आने वाले समय में और तेज हो सकती है। राज्य में लगातार जनसंख्या असंतुलन, भूमि कब्जा, अवैध धार्मिक निर्माण और धर्मांतरण जैसे विषयों पर बयानबाजी बढ़ती जा रही है। इन मुद्दों का असर केवल राजनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज में भी इसका गहरा प्रभाव दिखाई दे रहा है।

प्रदेश में बढ़ती धार्मिक राजनीति के कारण सामाजिक तनाव की आशंका भी बढ़ रही है। एक ओर हिंदू संगठन इसे सांस्कृतिक संरक्षण की लड़ाई बता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर विपक्ष और कुछ सामाजिक संगठन इसे समाज को बांटने वाली राजनीति मान रहे हैं। ऐसे में प्रशासन और सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती कानून व्यवस्था बनाए रखने और सामाजिक संतुलन कायम रखने की है।

फिलहाल उत्तराखंड की राजनीति में ‘धर्मांतरण’, ‘लव जिहाद’, ‘लैंड जिहाद’ और धार्मिक अतिक्रमण जैसे मुद्दे सबसे ज्यादा चर्चा में हैं। मुख्यमंत्री धामी के सख्त बयानों और प्रशासनिक कार्रवाइयों के बाद यह साफ हो गया है कि आने वाले समय में राज्य में इन मुद्दों पर राजनीतिक संघर्ष और अधिक तेज हो सकता है। चुनावी माहौल के करीब आते ही इन विषयों को लेकर सियासी बयानबाजी और सामाजिक बहस दोनों लगातार बढ़ती दिखाई दे रही हैं।

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