उत्तराखंडफीचर्ड

उत्तराखंड: पौड़ी गढ़वाल में खौफनाक वारदात, आपसी विवाद में पड़ोसी को पेट्रोल डालकर जिंदा जलाने की कोशिश; हालत नाजुक

पौड़ी गढ़वाल (उत्तराखंड)। देवभूमि उत्तराखंड के शांत पर्वतीय अंचलों से एक ऐसी सनसनीखेज और मानवता को शर्मसार करने वाली घटना सामने आई है, जिसने कानून-व्यवस्था और सामाजिक ताने-बाने पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जनपद पौड़ी गढ़वाल के थलीसैंण थाना क्षेत्र अंतर्गत रौली गांव में आपसी रंजिश के चलते एक शख्स को पेट्रोल छिड़ककर जिंदा जलाने का दुस्साहसिक प्रयास किया गया। इस जघन्य वारदात में पीड़ित गंभीर रूप से झुलस गया है, जिसे आनन-फानन में जिला अस्पताल भर्ती कराया गया है। वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी ग्रामीण मौके से फरार हो गया। पुलिस ने हत्या के प्रयास का मुकदमा दर्ज कर आरोपी की तलाश में कई टीमें रवाना कर दी हैं।


चाय की चुस्कियों के बीच अचानक फैला मौत का तांडव

प्राप्त विवरण के अनुसार, शनिवार की शाम रौली गांव में अन्य दिनों की तरह सामान्य और शांत थी। गांव के निवासी 40 वर्षीय वीरेंद्र सिंह अपने घर के ऊपरी हिस्से में बने कमरे में कुछ ग्रामीणों और परिचितों के साथ बैठे हुए थे। सभी लोग सौहार्दपूर्ण माहौल में चाय पी रहे थे और बातचीत का दौर चल रहा था। इसी दौरान उनका पड़ोसी आनंद सिंह वहां आ धमका। चश्मदीदों के मुताबिक, आनंद सिंह के तेवर भांपने में वहां मौजूद लोग नाकाम रहे। दोनों के बीच किसी पुरानी बात या तात्कालिक विषय को लेकर बहस शुरू हो गई।

प्रत्यक्षदर्शियों ने पुलिस को बताया कि विवाद इतना बढ़ा कि आनंद सिंह ने आव देखा न ताव, अपने साथ लाए डिब्बे से पेट्रोल निकालकर वीरेंद्र सिंह के ऊपर छिड़क दिया। इससे पहले कि कमरे में मौजूद अन्य लोग स्थिति की गंभीरता को समझ पाते या आनंद को काबू में कर पाते, आरोपी ने माचिस जलाकर वीरेंद्र को आग के हवाले कर दिया। पल भर में ही चाय की महक वाला कमरा चीख-पुकार और धुएं के गुबार में तब्दील हो गया।


ग्रामीणों की सूझबूझ से बची जान, 45 फीसदी झुलसा पीड़ित

आग की लपटों से घिरे वीरेंद्र सिंह दर्द से चिल्लाते हुए कमरे में भागने लगे। कमरे में मौजूद अन्य लोगों और चीख-पुकार सुनकर दौड़े ग्रामीणों ने अदम्य साहस का परिचय दिया। ग्रामीणों ने बिना वक्त गंवाए पानी और उपलब्ध सूखी घास व बोरे की मदद से बमुश्किल आग पर काबू पाया और वीरेंद्र को मौत के मुंह से बाहर निकाला। हालांकि, तब तक वह काफी गंभीर रूप से झुलस चुके थे।

ग्रामीणों ने तत्काल आपातकालीन ‘108 एंबुलेंस सेवा’ को इसकी सूचना दी। मौके पर पहुंची एंबुलेंस के जरिए पीड़ित को तुरंत जिला अस्पताल पौड़ी ले जाया गया, जहां डॉक्टरों की टीम उनके उपचार में जुटी है। मुख्य चिकित्सा अधीक्षक के अनुसार, पीड़ित वीरेंद्र सिंह का शरीर करीब 45 प्रतिशत तक झुलस चुका है। झुलसने की तीव्रता को देखते हुए डॉक्टरों ने उनकी हालत को स्थिर लेकिन चिंताजनक बताया है। अगले 48 घंटे मरीज की रिकवरी के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।


पुलिसिया तफ्तीश तेज: घटनास्थल से बरामद हुए अहम सुराग

दिल दहला देने वाली इस वारदात की सूचना मिलते ही थलीसैंण थाना पुलिस बल के साथ रौली गांव पहुंची। पुलिस टीम ने घटनास्थल का सघन निरीक्षण किया और फॉरेंसिक साक्ष्य जुटाए। थलीसैंण थानाध्यक्ष रविंद्र नेगी ने मीडिया को बताया कि घटनास्थल से आरोपी की एक जली हुई कमीज और चप्पल बरामद हुई है, जिससे यह साफ होता है कि आग लगाने के दौरान आरोपी खुद भी आंशिक रूप से इसकी चपेट में आया या घबराहट में अपने कपड़े और जूते वहीं छोड़ भागा।

पुलिस की प्रारंभिक जांच में यह बात उभरकर सामने आई है कि दोनों पक्षों के बीच लंबे समय से आपसी विवाद और रंजिश चल रही थी। इसी रंजिश के प्रतिशोध में आरोपी ने इस खौफनाक साजिश को अंजाम दिया। वारदात के बाद से ही पूरे गांव में तनाव का माहौल है, जिसे देखते हुए एहतियातन पुलिस बल की तैनाती पर भी विचार किया जा रहा है।


हत्या के प्रयास का मुकदमा दर्ज, तलाश में पुलिस की ताबड़तोड़ दबिश

इस खौफनाक घटनाक्रम को लेकर पीड़ित वीरेंद्र सिंह की पत्नी ने थलीसैंण थाने में लिखित तहरीर दी है। पत्नी की शिकायत और चश्मदीदों के बयानों के आधार पर पुलिस ने आरोपी आनंद सिंह के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की हत्या के प्रयास (Attempt to Murder) से जुड़ी गंभीर और गैर-जमानती धाराओं में मुकदमा पंजीकृत कर लिया है।

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के निर्देश पर इस पूरे प्रकरण की विवेचना उपनिरीक्षक (एसआई) तनवीर अहमद को सौंपी गई है। पुलिस क्षेत्राधिकारी ने बताया कि आरोपी की गिरफ्तारी के लिए थलीसैंण पुलिस के अलावा एसओजी और सर्विलांस सेल को भी सक्रिय किया गया है। आरोपी आनंद सिंह के संभावित ठिकानों, रिश्तेदारों और करीबियों के घरों पर लगातार दबिश दी जा रही है। पुलिस का दावा है कि आरोपी को जल्द ही सलाखों के पीछे भेज दिया जाएगा।


सामाजिक ताने-बाने पर उठते गंभीर सवाल

उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों को अपनी शांति, सौहार्द और शून्य अपराध दर के लिए जाना जाता रहा है। लेकिन हाल के दिनों में छोटी-मोटी रंजिशों और आपसी विवाद के कारण होने वाले ऐसे जघन्य अपराधों ने समाजशास्त्रियों और बुद्धिजीवियों को चिंता में डाल दिया है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि जरा सी बात पर किसी को जिंदा जला देने जैसी क्रूर मानसिकता का पहाड़ों में पनपना बेहद डरावना है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि आरोपी को कठोरतम सजा दिलाई जाए ताकि भविष्य में कोई भी कानून को हाथ में लेने या ऐसी अमानवीय हरकत करने की हिम्मत न कर सके।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button